भागलपुर की बाढ़ के बीच बड़ा दावा: नेपाल-भारत हाई डैम के लिए 11 हजार करोड़ मंजूर, मंत्री ने बताया कैसे रुकेगी तबाही

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आपदा प्रबंधन मंत्री रत्नेश सदा ने कहा कि नेपाल-भारत हाई डैम के लिए 11 हजार करोड़ की स्वीकृति मिली

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बिहार में बाढ़ नियंत्रण के लिए नेपाल और भारत के बीच 11 हजार करोड़ की लागत से हाई डैम बनाने की योजना पर काम शुरू हो गया है. आपदा प्रबंधन मंत्री रत्नेश सदा ने बताया कि यह बाढ़ की समस्या से निपटने की दिशा में एक बड़ा कदम है.

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Nepal India High Dam: सोमवार को भागलपुर पहुंचे आपदा प्रबंधन मंत्री रत्नेश सदा ने प्रभात खबर से बातचीत में बाढ़, नदियों में बढ़ती गाद और भविष्य में बाढ़ नियंत्रण को लेकर सरकार की योजनाओं की जानकारी दी. उन्होंने कहा कि आपदा का स्थायी समाधान संभव नहीं है, लेकिन बाढ़ के प्रभाव को कम करने के लिए बड़े स्तर पर काम किया जा सकता है.

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मंत्री ने नेपाल में ग्लेशियर फटने से आयी आपदा का उदाहरण देते हुए कहा कि ऐसी प्राकृतिक घटनाओं को पूरी तरह रोकना संभव नहीं है. इसके बावजूद बिहार सरकार के प्रस्ताव पर भारत सरकार की ओर से नेपाल और भारत के बीच हाई डैम बनाने की दिशा में कदम बढ़ाया गया है.

11 हजार करोड़ से हाई डैम का दावा, बाढ़ नियंत्रण पर नजर

मंत्री रत्नेश सदा के अनुसार हाई डैम के लिए 11 हजार करोड़ रुपये की स्वीकृति मिल चुकी है. प्रस्तावित हाई डैम को बिहार में बाढ़ नियंत्रण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताया जा रहा है.

बिहार के कई इलाकों में हर साल नदियों के जलस्तर बढ़ने से बाढ़ की स्थिति बनती है. ऐसे में हाई डैम की योजना का उद्देश्य पानी के प्रवाह को नियंत्रित करने और बिहार में बाढ़ के प्रभाव को कम करने से जुड़ा है.

हालांकि इस योजना का वास्तविक असर परियोजना के निर्माण, स्थान, तकनीकी व्यवस्था और नेपाल-भारत के बीच आवश्यक प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही सामने आयेगा. फिलहाल मंत्री ने इसे बाढ़ की समस्या से निपटने के लिए सरकार की बड़ी पहल के तौर पर बताया है.

फरक्का बराज हटाने के लिए भी शुरू हुआ ‘नीतीश संवाद’

मंत्री ने गंगा समेत बिहार की प्रमुख नदियों में बढ़ती गाद की समस्या का भी जिक्र किया. उन्होंने कहा कि गंगा, गंडक, कोसी समेत अन्य नदियों में गाद की समस्या बढ़ गयी है.

इसी संदर्भ में फरक्का बराज को हटाने को लेकर भी राजनीतिक स्तर पर चर्चा शुरू होने की बात उन्होंने कही. मंत्री के अनुसार जदयू के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा की ओर से बक्सर से ‘नीतीश संवाद’ कार्यक्रम शुरू किया गया है.

यह संवाद गंगा नदी के किनारे बसे बिहार के 12 जिलों में आयोजित किया जायेगा. इसके जरिये फरक्का बराज को हटाने का प्रस्ताव तैयार करने की बात कही गयी है.

मंत्री ने कहा कि बराज हटाने के लिए संबंधित प्रक्रिया में एनओसी की जरूरत होगी. उन्होंने दावा किया कि फरक्का बराज हटने से बाढ़ की समस्या के समाधान में मदद मिलेगी. उन्होंने यह भी कहा कि विदेश मंत्री एस जयशंकर ने फरक्का बराज को हटाने की बात कही है.

अभी भागलपुर में राहत सबसे बड़ी प्राथमिकता

एक तरफ सरकार लंबे समय के लिए बाढ़ नियंत्रण की योजनाओं की बात कर रही है, तो दूसरी ओर भागलपुर में इस समय बाढ़ प्रभावित परिवारों को तत्काल राहत की जरूरत है. मंत्री रत्नेश सदा ने बताया कि वह मंगलवार को बाढ़ग्रस्त क्षेत्रों का निरीक्षण करेंगे.

वे प्रभावित लोगों की जरूरतों और राहत व्यवस्था को लेकर प्रशासनिक पदाधिकारियों के साथ समीक्षा करेंगे. जरूरत के अनुसार कम्युनिटी किचन की संख्या बढ़ाने की भी बात कही गयी है.

मंत्री के अनुसार बाढ़ प्रभावित लोगों के बीच सूखा राशन और पॉलीथिन शीट उपलब्ध करायी जा रही है. स्वास्थ्य सुविधा के लिए एंबुलेंस, लोगों की आवाजाही के लिए नाव और शौचालय की व्यवस्था की जा रही है. पशुओं के लिए पशुचारा उपलब्ध कराने की भी व्यवस्था की जा रही है.

सर्पदंश से बचाव के लिए दवाओं की व्यवस्था

बाढ़ के दौरान पानी जमा होने और लोगों के विस्थापित होने से सर्पदंश का खतरा भी बढ़ जाता है. मंत्री ने बताया कि सर्पदंश से बचाव और इलाज के लिए पर्याप्त दवाओं की व्यवस्था कर ली गयी है.

यह व्यवस्था बाढ़ प्रभावित इलाकों में स्वास्थ्य संकट को देखते हुए महत्वपूर्ण है. राहत शिविरों और प्रभावित गांवों में स्वास्थ्य सेवाओं की उपलब्धता आने वाले दिनों में प्रशासन के लिए बड़ी जिम्मेदारी रहेगी.

जदयू नेताओं ने किया मंत्री का स्वागत

भागलपुर पहुंचने पर आपदा प्रबंधन मंत्री रत्नेश सदा का जदयू जिला अध्यक्ष विवेकानंद गुप्ता के नेतृत्व में पार्टी पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं ने स्वागत किया.

सांसद अजय मंडल ने कहा कि मंत्री का भागलपुर आकर बाढ़ की स्थिति की समीक्षा करना सरकार की संवेदनशीलता और जनहित के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाता है. जिला अध्यक्ष विवेकानंद गुप्ता ने कहा कि पार्टी कार्यकर्ता बाढ़ प्रभावित लोगों की सहायता के लिए प्रशासन और सरकार के साथ समन्वय कर सहयोग कर रहे हैं.

वरिष्ठ नेता सुड्डू साईं ने भी बाढ़ के समय सरकार की ओर से स्थिति की निगरानी को महत्वपूर्ण बताया.

मौके पर जदयू नेता संजीव चंद्रवंशी, शबाना दाऊद, शेखर पांडे, प्रदेश महासचिव शंभू शरण चौधरी, प्रदीप कुशवाहा, शैलेन्द्र तोमर, सोनी कुमारी, सीपु मंडल, अर्जुन साह, उमा मोदी, प्रीति कुमारी, जीत राणा, शाबान खान, हासिब, महेश दास, संजीत राय, रिंटू चंद्रवंशी, ब्रजेश कुमार, रितुराज, हाजी मेराजुद्दीन, गोलू मंडल, एहसान उल राजा, वसीम अकरम, रोजी रानी, अशोक सिन्हा, उज्ज्वल कुमार, सुलतानुजमा, निसार अहमद, दुर्गेश कुमार, विकास कुमार, संयुक्ता कुमारी और सोनू द्वारकाधीश समेत अन्य मौजूद थे.

Nepal India High Dam: कब बदलेगी बाढ़ की तस्वीर?

भागलपुर और बिहार के बाढ़ प्रभावित इलाकों के लिए हाई डैम और फरक्का बराज को लेकर प्रस्ताव लंबे समय के समाधान की उम्मीद जगाते हैं. लेकिन फिलहाल जमीन पर चुनौती उन परिवारों की है, जो बाढ़ के पानी के बीच राहत और सुरक्षित ठिकाने की तलाश में हैं.

मंत्री ने मंगलवार को बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का निरीक्षण करने की बात कही है. इसके बाद प्रभावित इलाकों की वास्तविक जरूरतों के आधार पर राहत सुविधाओं में बदलाव किया जा सकता है.

फिलहाल सरकार के सामने दोहरी चुनौती है. एक ओर तत्काल राहत व्यवस्था को मजबूत रखना और दूसरी ओर ऐसी दीर्घकालिक परियोजनाओं को आगे बढ़ाना, जिनसे बिहार को हर साल आने वाली बाढ़ के असर से राहत मिल सके.

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