बिहार में 19 से 22 सितंबर तक छाए रहेंगे बादल, गरज-चमक के साथ बारिश के आसार : किसानों के लिए कृषि सलाह जारी

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सांकेतिक तस्वीर

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बिहार में 19 से 22 सितंबर तक मौसम का पूर्वानुमान जारी किया गया है, जिसमें दक्षिण बिहार में बादल छाए रहने और हल्की बारिश की संभावना जताई गई है. किसानों के लिए धान, मक्का, अरहर, सब्जी और पपीता की खेती के साथ-साथ पशुओं को बीमारियों से बचाने के लिए विशेष सलाह दी गई है.

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भागलपुर : बिहार कृषि विश्वविद्यालय की ग्रामीण कृषि मौसम सेवा और भारत मौसम विज्ञान विभाग के सहयोग से 19 से 22 सितंबर 2026 तक के लिए मध्यावधि मौसम पूर्वानुमान जारी किया गया है. पूर्वानुमान के अनुसार इस अवधि में दक्षिण बिहार के जिलों में आसमान में घने बादल छाए रह सकते हैं. एक-दो स्थानों पर गरज-चमक के साथ तेज हवा चलने और हल्की से मध्यम बारिश होने की संभावना है.

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इस दौरान अधिकतम तापमान 33 से 34 डिग्री और न्यूनतम तापमान 27 से 28 डिग्री सेंटीग्रेड के बीच रहने का अनुमान है. सुबह के समय सापेक्ष आर्द्रता 80 से 85 प्रतिशत तथा दोपहर में 60 से 70 प्रतिशत रह सकती है. पूर्वानुमान अवधि में 10 से 15 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से पूरबा हवा चलने की संभावना है.

धान की फसल को लेकर किसानों को दी गयी सलाह

निचली भूमि में 3 से 7 दिनों तक जलभराव रहने और आंशिक फसल क्षति की स्थिति में खेत से तत्काल पानी निकालने की सलाह दी गयी है. क्षतिग्रस्त स्थानों पर दोबारा रोपाई करें और इसके लिए उपलब्ध स्वस्थ पौधों का उपयोग करें. पानी निकलने के बाद आवश्यक पौध संरक्षण उपाय अपनाएं.

यदि लंबे समय तक पानी में डूबने के कारण धान की फसल पूरी तरह नष्ट हो गयी है, तो खेत की स्थिति और बुवाई के समय के अनुसार सरसों, मसूर, मटर या तोरिया जैसी कम अवधि वाली रबी फसल लेने की सलाह दी गयी है.

मध्यम भूमि में जहां पौधों की संख्या पर्याप्त है, वहां फसल को बचाने पर ध्यान दें. जल निकासी, गैप फिलिंग और पोषक तत्व प्रबंधन करें. पूरी फसल नष्ट होने की स्थिति में मिट्टी के काम करने योग्य होते ही कम अवधि वाली रबी फसल की तैयारी करें.

कम वर्षा की स्थिति में खेत में खरपतवार बढ़ने की संभावना रहती है. ऐसे में समय पर निराई-गुड़ाई करने और इसके बाद 20 से 30 किलोग्राम नाइट्रोजन प्रति हेक्टेयर की दर से उपरिवेशन करने की सलाह दी गयी है. इसके अलावा बिस्पायरिबेक सोडियम 200 ग्राम प्रति हेक्टेयर एवं पायरेजोसल्फ्यूरॉन 200 ग्राम प्रति हेक्टेयर का मिश्रण खेत में हल्की नमी रहने पर स्प्रे करने तथा इसके बाद नाइट्रोजन का उपरिवेशन करने की सलाह दी गयी है.

खरीफ मक्का में तना छेदक पर रखें नजर

खरीफ मक्का में तना छेदक के प्रकोप की नियमित निगरानी करने की सलाह दी गयी है. प्रभावित पौधों की मध्य कतिका सूखकर मुरझा जाती है और खींचने पर आसानी से निकल आती है.

ऐसे लक्षण दिखाई देने पर कार्बोफ्यूरान 3 जी 17 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर की दर से गाभा में प्रयोग करने की सलाह दी गयी है.

अरहर में गैप फिलिंग और निराई-गुड़ाई करें

अरहर की फसल में आवश्यकता के अनुसार गैप फिलिंग, छंटाई और निराई-गुड़ाई करते रहने की सलाह दी गयी है. वहीं सितंबर वाली अरहर की खेती के लिए खेत की तैयारी करने को कहा गया है.

सब्जियों की खेती के लिए भी सलाह

फूलगोभी की मध्य अवधि वाली पूसा हिम ज्योति, डी-96 और पंत शुभ्रा जैसी किस्मों की बुआई करने की सलाह दी गयी है. मिर्च की बुआई उठी हुई क्यारियों पर करने को कहा गया है.

पपीते की पौध तैयार करने का अनुकूल समय

पपीते की बीज बुआई के लिए मौसम को अनुकूल बताया गया है. एक हेक्टेयर क्षेत्र के लिए करीब 300 से 350 ग्राम बीज की आवश्यकता होती है. बीजों को बाविस्टिन 2 ग्राम प्रति किलोग्राम बीज की दर से उपचारित कर 150 गेज पॉलीथिन की 20×15 सेंटीमीटर आकार की थैलियों में बोने की सलाह दी गयी है.

पौधशाला में 7 से 10 सेंटीमीटर की दूरी पर 10 से 15 सेंटीमीटर ऊंची क्यारियों में बीज बोएं. पौधे 20 से 25 सेंटीमीटर ऊंचाई के होने पर रोपाई के लिए तैयार किए जा सकते हैं.

पपीते की अनुशंसित किस्मों में पूसा ड्वार्फ, पूसा नन्हा, पूसा डेलीसियस, सीओ-7, अर्का सूर्या और रेड लेडी शामिल हैं.

पशुओं को इन बीमारियों से बचाने की सलाह

पशुओं में PPR, FMD यानी खुरपका-मुंहपका और HS यानी गलघोंटू रोग का खतरा देखते हुए समय पर टीकाकरण कराने की सलाह दी गयी है. पशुओं को स्वच्छ और सूखी जगह पर रखें तथा बीमार पशुओं को स्वस्थ पशुओं से अलग रखें.

रोग के लक्षण दिखाई देने पर तुरंत पशु चिकित्सक से संपर्क करें और पशुओं की अनावश्यक आवाजाही पर नियंत्रण रखें. गलघोंटू और लंगड़ी रोग से बचाव के लिए इस महीने टीकाकरण कराने की सलाह दी गयी है.

पशुओं को संतुलित और पौष्टिक आहार दें. लम्पी रोग से बचाव के लिए पशुओं के बाड़े को साफ और सूखा रखने तथा प्रतिदिन सफाई के बाद चूने के पाउडर का छिड़काव करने की सलाह दी गयी है.

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