भागलपुर में अगले 72 घंटे भारी: 40 KM की रफ्तार से चलेगी आंधी और कड़कड़ाएगी बिजली

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Bhagalpur Weather Update: भागलपुर और आसपास के क्षेत्रों में मानसून की सुस्ती से किसान परेशान हैं; मौसम विभाग ने अगले 72 घंटों में आंशिक बादल छाए रहने और हल्की से मध्यम बारिश होने का नया पूर्वानुमान जारी किया है.

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Bhagalpur Weather Update: भागलपुर जिले में मानसून की कछुआ चाल और उमस भरी गर्मी के बीच मौसम विज्ञान केंद्र ने राहत भरी भविष्यवाणी की है. मौसम विभाग के ताजा पूर्वानुमान के अनुसार, भागलपुर और इसके सीमावर्ती इलाकों में अगले तीन दिनों तक मौसम का मिजाज पूरी तरह बदला-बदला रहेगा. इस अवधि के दौरान आसमान में आंशिक रूप से बादल छाए रहेंगे और जिले के कई हिस्सों में गरज-चमक के साथ हल्की से मध्यम स्तर की मानसूनी बारिश होने के प्रबल आसार हैं. इसके साथ ही मौसम वैज्ञानिकों ने 40 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलने की भी चेतावनी जारी की है.

काले बादल छा रहे, लेकिन झमाझम बारिश का इंतजार

  • सूखा सा माहौल: जिले में पिछले दो दिनों से लगातार आसमान में घने काले बादल उमड़-घुमड़ रहे हैं और रुक-रुक कर तेज बिजली भी चमक रही है. हालांकि, बादलों के इस घेरे के बावजूद किसानों और आम लोगों को जिस झमाझम बारिश का इंतजार है, वह अब तक नहीं हुई है.
  • नाकाफी फुहारें: भागलपुर के शहरी और ग्रामीण इलाकों में कहीं 10 से 15 मिनट तक हल्की बारिश दर्ज की जा रही है, तो कहीं सिर्फ आंशिक बूंदाबांदी होकर ही मौसम साफ हो जा रहा है. रविवार सुबह भी जिले के कुछ हिस्सों में हल्की फुहारें पड़ीं, लेकिन इससे उमस भरी गर्मी और तापमान में कोई खास गिरावट दर्ज नहीं की गई.

Bhagalpur Weather Update: खेतों में पानी की कमी, धान की रोपनी पर पड़ने लगा सीधा असर

आषाढ़ का महीना बीतने की कगार पर है और खेतों में पर्याप्त पानी न होने से खरीफ सीजन की मुख्य फसल (धान) की खेती पिछड़ती नजर आ रही है.

ग्रामीण इलाकों के किसानों का कहना है कि आर्द्रा नक्षत्र के दौरान तैयार की गई धान की नर्सरी (बिचड़ा) अब पूरी तरह खेतों में रोपाई के लिए तैयार हो चुकी है. लेकिन आसमान से पर्याप्त पानी नहीं बरसने के कारण खेतों में दरारें पड़ रही हैं और रोपनी का काम शुरू नहीं हो पा रहा है. निजी या सरकारी बोरिंग (पंपसेट) के सहारे केवल सीमित खेतों में ही रोपाई संभव है, जो काफी खर्चीली साबित हो रही है. बड़े पैमाने पर सामूहिक खेती के लिए प्रकृति की मानसूनी बारिश बेहद जरूरी है.

कृषि विशेषज्ञों के मुताबिक, यदि अगले तीन दिनों के भीतर मौसम विभाग के पूर्वानुमान के अनुसार अच्छी और लगातार बारिश नहीं होती है, तो धान के बिचड़े खेतों में ही ओवर-एज (बूढ़े) होने लगेंगे. इससे धान की अंतिम पैदावार और गुणवत्ता पर सीधा प्रतिकूल असर पड़ेगा. जिला कृषि विभाग भी मौसम के इस बदलते रुख पर लगातार नजर बनाए हुए है और किसानों को कम पानी में तैयार होने वाली वैकल्पिक फसलों की तैयारियों को लेकर भी सचेत रहने की सलाह दी जा रही है.

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