गंगा के उफान के बीच मौसम का बदला मिजाज: भागलपुर-बांका में तेज बारिश के आसार, धान और फूलगोभी को लेकर वैज्ञानिकों ने क्या कहा?

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भागलपुर में बाढ़ की मार झेल रहे लोगों के लिए बुरी खबर है. मौसम विभाग ने भारी बारिश का अलर्ट जारी किया है. ऐसे में किसानों को धान और फूलगोभी की खेती को लेकर विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी गई है.

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भागलपुर जिले में गंगा नदी का जलस्तर बढ़ गया है. इससे तटवर्ती और निचले इलाकों में बाढ़ का पानी घुस गया है, जिससे लोगों को ऊंचे स्थानों पर शरण लेनी पड़ रही है और उनका दैनिक जीवन पूरी तरह अस्त-व्यस्त हो गया है. जहां एक ओर बाढ़ ने लोगों को परेशान कर रखा है, वहीं दूसरी ओर भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने आने वाले दिनों में भारी बारिश की संभावना जताकर चिंताएं और बढ़ा दी हैं. हालांकि पिछले दो दिनों से बारिश का सिलसिला थमा हुआ था, जिससे लोगों ने थोड़ी राहत महसूस की थी, लेकिन मौसम के बदले मिजाज ने एक बार फिर किसानों और आम नागरिकों की चिंताएं बढ़ा दी हैं. मौसम विभाग के ताजा पूर्वानुमान के अनुसार, 12 सितंबर तक भागलपुर सहित आसपास के जिलों में हल्की से मध्यम और कुछ क्षेत्रों में मूसलाधार बारिश दर्ज की जा सकती है.

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चार जिलों में भारी वर्षा का अनुमान, 34 डिग्री तक रहेगा पारा

मौसम विज्ञान केंद्र के अनुसार अगले कुछ दिनों तक दक्षिण और पूर्वी बिहार के वायुमंडल में मानसूनी ट्रफ और चक्रवाती दबाव का असर बना रहेगा. इसके प्रभाव से भागलपुर, बांका, जमुई और नवादा जिले के एक-दो स्थानों पर गरज-चमक के साथ भारी बारिश होने का पूर्वानुमान व्यक्त किया गया है. यह भारी वर्षा बाढ़ की स्थिति को और गंभीर बना सकती है, इसलिए लोगों को सावधानी बरतने की सलाह दी जाती है.

इस दौरान जिले का अधिकतम तापमान 33 से 34 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान 27 से 28 डिग्री सेल्सियस के आसपास बने रहने की संभावना है. आर्द्रता अधिक रहने से उमस भरी गर्मी भी परेशान करेगी.

खेती-किसानी: फूलगोभी की मध्य अवधि किस्मों की करें बुआई

मौसम के इस रुख को देखते हुए कृषि वैज्ञानिकों ने किसानों के लिए सामयिक कृषि परामर्श (एग्रीकल्चर एडवाइजरी) जारी किया है. वैज्ञानिकों के अनुसार किसान अभी फूलगोभी की उन किस्मों की बुआई शुरू कर सकते हैं जो खेती के मध्य समय में तैयार हो जाती हैं, जैसे 'पूसा हिम ज्योति', 'डी-96' और 'पंत शुभ्रा'. ये किस्में अच्छी पैदावार देती हैं.

इसके अलावा जो किसान सितंबर सत्र वाली अरहर की बुआई की योजना बना रहे हैं, उन्हें खेत की गहरी जुताई कर खेत को पूरी तरह तैयार कर लेना चाहिए.

धान में खरपतवार नियंत्रण और पशुओं को लम्पी से बचाने की सलाह

कृषि विशेषज्ञों ने सलाह दी है कि धान की रोपाई वाले खेतों में खरपतवार की रोकथाम के लिए 'बिस्पायरिबेक सोडियम' (200 ग्राम प्रति हेक्टेयर) और 'पायरेजोसल्फ्यूरॉन' (200 ग्राम प्रति हेक्टेयर) के मिश्रण का छिड़काव खेत में हल्की नमी रहने पर करें. इसके उपरांत फसल की अच्छी बढ़वार के लिए आवश्यकतानुसार फसल में यूरिया या अन्य नाइट्रोजन युक्त खाद डालना चाहिए. अरहर के खेतों में पानी का जमाव न होने दें और नियमित निकाई-गुड़ाई करते रहें.

वहीं मवेशियों में फैलने वाले घातक 'लम्पी त्वचा रोग' से बचाव के लिए पशुपालकों को सावधान रहने की जरूरत है, क्योंकि यह रोग मवेशियों के लिए जानलेवा साबित हो सकता है. पशुपालकों को बाड़े को हमेशा साफ और सूखा रखने की ताकीद की गई है. वैज्ञानिकों ने निर्देश दिया है कि पशुशाला की रोजाना सफाई के बाद फर्श पर चूने के पाउडर का छिड़काव अवश्य करें ताकि संक्रमण से बचाव हो सके.

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