भागलपुर व दक्षिण बिहार में 29 जुलाई तक झमाझम बारिश के आसार: BAU सबौर ने जारी की कृषि एडवाइजरी

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बिहार कृषि विश्वविद्यालय और भारत मौसम विज्ञान विभाग ने 25 से 29 जुलाई तक दक्षिण बिहार में घने बादलों और मूसलाधार बारिश की भविष्यवाणी की है. मौसम वैज्ञानिकों ने इसे किसानों के लिए वरदान बताया है, खासकर धान की रोपाई और जल संचयन के लिए.

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बिहार कृषि विश्वविद्यालय (BAU), सबौर और भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) द्वारा जारी ताजा मौसम पूर्वानुमान के अनुसार, 25 से 29 जुलाई के दौरान भागलपुर समेत दक्षिण बिहार के आसमान में घने बादल छाए रहेंगे. इस अवधि में कई हिस्सों में गरज-चमक, आंधी और मूसलाधार बारिश की संभावना जताई गई है. मौसम वैज्ञानिकों ने लगातार हो रही इस मानसूनी बारिश को किसानों और फसलों के लिए बेहद वरदान बताया है.

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मौसम पूर्वानुमान: इन 7 जिलों में भारी बारिश और वज्रपात की चेतावनी

मौसम विभाग के अनुसार आगामी दिनों में मौसम का मिजाज इस प्रकार रहेगा:

  • भारी बारिश का अलर्ट: अरवल, भोजपुर, बक्सर, गया, रोहतास, कैमूर और नवादा जिलों में एक-दो स्थानों पर मेघगर्जन, वज्रपात (ठनका) और तेज सतही हवाओं (झोंकेदार हवा) के साथ भारी वर्षा की संभावना है.
  • तापमान व आर्द्रता: अधिकतम तापमान 31-32°C और न्यूनतम तापमान 25-26°C रहने का अनुमान है. सुबह में हवा में नमी (आर्द्रता) 80-90% और दोपहर में 55-60% रहेगी.
  • हवा की रफ्तार: पूर्वानुमान अवधि में 10 से 15 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से पुरवा हवा चलने का अनुमान जताया गया है.

बिहार कृषि विश्वविद्यालय (BAU) सबौर की किसानों को सलाह

कृषि वैज्ञानिकों ने बारिश के पानी का पूरा लाभ उठाने और धान की रोपाई में तेजी लाने के लिए निम्नलिखित सुझाव दिए हैं:

उर्वरक की संतुलित मात्रा का करें प्रयोग:

धान की रोपाई से ठीक पहले प्रति हेक्टेयर की दर से खेत में निम्नलिखित उर्वरकों का प्रयोग करें:

  • नाइट्रोजन: 25-30 किलोग्राम
  • फॉस्फोरस: 40 किलोग्राम
  • पोटाश: 30 किलोग्राम
  • जिंक सल्फेट: 25 किलोग्राम

सुगंधित किस्मों और कतरनी धान की करें बुआई:

किसानों को सलाह दी गई है कि वे क्षेत्र की प्रसिद्ध सुगंधित किस्मों जैसे 'भागलपुर कतरनी' आदि की रोपाई को प्राथमिकता दें.

वर्षा जल संचयन (Water Harvesting) करें:

निचली जमीन वाले खेतों के चारों ओर मजबूत मेड़ (बांध) बना लें, ताकि बारिश का पानी खेत में ही जमा रहे. इस संचित पानी का उपयोग आने वाले दिनों में आवश्यकता अनुसार सिंचाई के लिए किया जा सकेगा.


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