भागलपुर में बैंककर्मियों की हड़ताल से 250 शाखाओं में लटके ताले, 500 करोड़ का लेनदेन प्रभावित
राधा रानी सिन्हा रोड में प्रदर्शन करते बैंककर्मी. | Prabhat Khabar Network
भागलपुर में बैंक यूनियनों की राष्ट्रव्यापी हड़ताल का व्यापक असर देखने को मिला. जिले की 250 बैंक शाखाएं और एटीएम बंद रहने से करीब 500 करोड़ रुपये का बैंकिंग कारोबार प्रभावित हुआ. ग्राहकों को भारी असुविधा का सामना करना पड़ा.
संयुक्त राष्ट्र फोरम ऑफ बैंक यूनियंस (UFBU) के राष्ट्रव्यापी आह्वान पर शुक्रवार को भागलपुर जिले में बैंक कर्मचारियों की एक दिवसीय अखिल भारतीय हड़ताल का व्यापक असर देखने को मिला.
जिलेभर में फैले राष्ट्रीयकृत, ग्रामीण और निजी बैंकों की लगभग 250 शाखाओं के साथ-साथ 250 एटीएम भी पूरी तरह बंद रहे. बैंक शाखाओं में ताले लटके रहने के कारण नकद जमा-निकासी, चेक क्लियरिंग, ड्राफ्ट और अन्य जरूरी वित्तीय सेवाएं ठप रहीं, जिससे करीब 500 करोड़ रुपये का बैंकिंग कारोबार प्रभावित होने का अनुमान है.
जोनल ऑफिस के सामने धरना-प्रदर्शन और नारेबाजी
हड़ताल के दौरान राधा रानी सिन्हा रोड स्थित बैंक ऑफ इंडिया और इलाहाबाद बैंक के जोनल ऑफिस के सामने सैकड़ों बैंक अधिकारी और कर्मचारी एकजुट हुए:
- हाथों में बैनर और पोस्टर थामे कर्मियों ने केंद्र सरकार और इंडियन बैंक्स एसोसिएशन (IBA) के खिलाफ जमकर नारेबाजी की.
- आंदोलन का नेतृत्व कर रहे संयोजक अरविंद कुमार रामा ने कहा कि बैंक कर्मियों में सरकार की नीतियों को लेकर गहरा रोष है और जब तक मांगें पूरी नहीं होतीं, तब तक संघर्ष जारी रहेगा.
बैंक कर्मियों की दो प्रमुख मांगें
आंदोलनकारियों ने स्पष्ट किया कि कई दौर की द्विपक्षीय बैठकों और वार्ताओं के बावजूद कोई सकारात्मक परिणाम नहीं निकलने के कारण उन्हें हड़ताल का रास्ता चुनना पड़ा:
- 5-दिवसीय बैंकिंग: देश भर के बैंकों में लंबे समय से लंबित 5-दिवसीय सप्ताह (5-Day Work Week) के नियम को तत्काल लागू किया जाए.
- पीएलआई योजना वापसी: सरकार द्वारा लाई गई एकतरफा और भेदभावपूर्ण परफॉर्मेंस लिंक्ड इंसेंटिव (PLI) योजना को तुरंत वापस लिया जाए.
प्रमुख बैंक यूनियनों की रही भागीदारी
इस राष्ट्रव्यापी हड़ताल को सफल बनाने में कई प्रमुख राष्ट्रीय बैंक यूनियनों ने सक्रिय रूप से भाग लिया, जिनमें मुख्य रूप से ऑल इंडिया बैंक इंप्लाइज एसोसिएशन (AIBEA), ऑल इंडिया बैंक ऑफिसर्स कॉन्फेडरेशन (AIBOC), नेशनल कन्फेडरेशन ऑफ बैंक इम्प्लाइज (NCBE), और बैंक इम्प्लाइज फेडरेशन ऑफ इंडिया (BEFI) शामिल रहीं. यूनियनों ने निजी क्षेत्र के बैंकों से भी अपनी शाखाएं और एटीएम बंद रखकर इस जनहितैषी आंदोलन का समर्थन करने की अपील की.
ग्राहकों को हुई भारी असुविधा
बैंकों के अचानक बंद रहने और एटीएम की सेवाएं बाधित होने से आम जनता, छोटे व्यापारियों और छात्रों को भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ा. कई ग्राहक बैंक के मुख्य द्वारों पर पहुंचकर लौटते नजर आए, क्योंकि जरूरी भुगतानों और नकदी संकट के कारण रोजमर्रा के काम अटक गए थे.
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