यूजीसी का है निर्देश, तो 25 हजार महीना क्यों नहीं देते

By Prabhat Khabar Digital Desk
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भागलपुर: विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) का निर्देश है कि विश्वविद्यालय में कार्यरत अतिथि व्याख्याता को 1000 रुपये प्रति कक्षा और अधिकतम 25 हजार रुपये महीना के दर से मानदेय दिया जाये. इस निर्देश का अनुपालन तिलकामांझी भागलपुर विश्वविद्यालय में नहीं हो रहा है. विश्वविद्यालय इसे लागू करे. यह बातें सोमवार को तिलकामांझी भागलपुर विश्वविद्यालय परिसर में धरना आयोजित कर नवनियुक्त व्याख्याता संघ के सदस्यों ने कही.

संघ ने विश्वविद्यालयों में शिक्षकों की नियुक्ति को लेकर बिहार सरकार द्वारा प्रस्तावित नियमावली में संशोधन की भी मांग रखी. उनका कहना था कि नियमावली में रिसर्च पब्लिकेशन, पुस्तक लेखन, विभिन्न जर्नल में प्रकाशित आलेख, राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय सेमिनारों में प्रस्तुत शोध पत्र के अलावा विवि में कार्यरत अतिथि व्याख्याताओं के अनुभव पर भी अंक का प्रावधान करने की मांग की.

उक्त मांगों को लेकर कुलाधिपति, शिक्षा मंत्री व कुलपति के नाम अलग-अलग ज्ञापन प्रतिकुलपति प्रो एके राय को सौंपा. इससे पूर्व प्रतिकुलपति से वार्ता के लिए प्रोक्टर डॉ रामप्रवेश सिंह व डीएसडब्ल्यू डॉ गुरुदेव पोद्दार धरना पर बैठे संघ के सदस्यों से मिले. प्रतिकुलपति से अतिथि व्याख्याताओं ने कहा कि कई महाविद्यालयों के खाते में राशि समाप्त हो जाने के कारण उन्हें मानदेय नहीं मिल रहा है. विश्वविद्यालय अपने आंतरिक कोष से मानदेय की व्यवस्था करे. प्रतिकुलपति ने कहा कि कुलपति के आने के बाद उनके ज्ञापन कुलाधिपति व शिक्षा मंत्री को भेज दिये जायेंगे. विश्वविद्यालय स्तर की समस्या पर विचार-विमर्श कर दूर किया जायेगा.

धरना की अध्यक्षता संघ के अध्यक्ष डॉ आनंद आजाद ने की. इस मौके पर उपाध्यक्ष डॉ गोपाल महाराणा, डॉ अरुण पासवान, डॉ मुरलीधर मंडल, डॉ अमरेंद्र कुमार, डॉ सत्यम शरणम, डॉ राजीव कुमार सिंह, डॉ कौशल मिश्र, डॉ आलोक वर्धन, डॉ ललन कुमार राय, डॉ वरदराज, डॉ विश्वनाथ, डॉ सरिता श्रीवास्तव, डॉ कपिलदेव मंडल, डॉ मो कलीमुद्दीन, डॉ कुमारी अलका, डॉ संगीता कुमारी, डॉ संजय कुमार रजक, डॉ दिनेश कुमार, डॉ मनोज कुमार, डॉ संजीव कुमार, डॉ मो अफसर अहमद आदि मौजूद थे.

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