पश्चिम चंपारण के मझौलिया में पौधों की मजबूत संरचना और कीट नियंत्रण पर कार्यशाला, वैज्ञानिकों ने दिया लाइव डेमो
प्रशिक्षण के दौरान फलदार पौधे के बारे में जानकारी प्राप्त करते छात्र
मझौलिया के कृषि विज्ञान केंद्र में फलदार पौधों की वैज्ञानिक ट्रेनिंग-प्रूनिंग पर कार्यशाला हुई. छात्रों ने मजबूत ढांचा बनाने और कीट-रोग घटाने की तकनीक सीखी. इससे फलों की गुणवत्ता व पैदावार बढ़ती है.
पश्चिम चंपारण: मझौलिया प्रखंड क्षेत्र के कृषि विज्ञान केंद्र (केवीके), माधोपुर में सोमवार को 'ग्रामीण उद्यानिकी कार्य अनुभव कार्यक्रम' (RHWEP) के अंतर्गत एक दिवसीय विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया गया. इस दौरान पंडित दीनदयाल उपाध्याय उद्यानिकी एवं वानिकी महाविद्यालय, पिपराकोठी के उद्यानिकी संकाय के छात्र-छात्राओं को फलदार पौधों में वैज्ञानिक तरीके से ट्रेनिंग (ढांचा प्रबंधन) एवं प्रूनिंग (कटाई-छंटाई) की विभिन्न तकनीकों और उनके कृषि महत्व से अवगत कराया गया. प्रशिक्षण में विद्यार्थियों को सैद्धांतिक जानकारी देने के साथ-साथ प्रक्षेत्र में ले जाकर प्रायोगिक अनुभव भी प्रदान किया गया.
पौधों के मजबूत ढांचे के लिए ट्रेनिंग और रोग मुक्ति के लिए प्रूनिंग जरूरी: डॉ. अभिषेक
केंद्र के वरीय वैज्ञानिक एवं प्रधान डॉ. अभिषेक प्रताप सिंह ने प्रशिक्षण सत्र को संबोधित करते हुए कहा कि ट्रेनिंग पौधों की प्रारंभिक अवस्था में एक मजबूत और संतुलित ढांचा तैयार करने की वैज्ञानिक प्रक्रिया है. इसके विपरीत, प्रूनिंग के माध्यम से पौधों की अनावश्यक, रोगग्रस्त, सूखी और आपस में उलझी शाखाओं को हटाया जाता है. उन्होंने आम, अमरूद, अंगूर और आड़ू जैसे प्रमुख फलदार वृक्षों में अपनाई जाने वाली 'सेंट्रल लीडर सिस्टम', 'ओपन सेंटर सिस्टम' और 'मॉडिफाइड लीडर सिस्टम' के बारे में विस्तृत प्रायोगिक जानकारी दी, जिससे पौधे संतुलित रूप से विकसित हो सकें.
धूप-हवा के संचार से घटता है कीट-रोगों का प्रकोप: डॉ. सौरभ दुबे
संस्थान के पौधा संरक्षण वैज्ञानिक डॉ. सौरभ दुबे ने बताया कि वैज्ञानिक पद्धति से ट्रेनिंग व प्रूनिंग करने से पौधों के आंतरिक भाग तक भरपूर धूप और ताजी हवा का संचार होता है. इससे कवक व कीट-रोगों का प्रकोप काफी हद तक कम हो जाता है, जिससे कीटनाशकों पर होने वाला खर्च घटता है. उन्होंने कहा कि इस विधि से फलों की गुणवत्ता, चमक, पैदावार और वृक्षों की दीर्घायु में उल्लेखनीय सुधार होता है. प्रशिक्षण के दौरान छात्रों को प्रूनिंग का उपयुक्त समय, अत्याधुनिक औजारों के सुरक्षित उपयोग और कटाई के तुरंत बाद घाव वाले स्थान पर फफूंद से बचाव हेतु 'बोर्डो पेस्ट' लगाने का लाइव डेमो भी करके दिखाया गया.
महाविद्यालय के छात्र-छात्राएं और तकनीकी कर्मी रहे उपस्थित
प्रायोगिक सत्र के दौरान विद्यार्थियों ने प्रक्षेत्र में स्वयं विभिन्न औजारों का संचालन कर पौधों की छंटाई की बारीकियां समझीं. इस अवसर पर केंद्र के तकनीकी कर्मियों में विनीत कुमार, कमलेश कुमार, मुन्ना कुमार, शंभू कुमार, मनोज कुमार, शैलेन्द्र कुमार उपस्थित थे. वहीं प्रशिक्षण लेने वाले छात्रों में विकेश कुमार, हिमांशु, पीयूष, अंकित, प्रमेश समेत उद्यानिकी संकाय के दर्जनों छात्र-छात्राएं सक्रिय रूप से शामिल रहे.
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