कचरा फेंकने के विवाद में हुई थी हत्या, 15 साल बाद तीन दोषियों को मिली 5-5 साल की सजा

Author Israel ansari|Edited by Aaruni Thakur
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न्यायालय में आरोपी के साथ पुलिस व एपीपी | Prabhat Khabar Network

न्यायालय में आरोपी के साथ पुलिस व एपीपी

15 साल पहले कचरा फेंकने को लेकर शुरू हुआ विवाद खूनी जंग में बदल गया. इस मामले में अदालत ने अब तीन आरोपियों को दोषी ठहराते हुए 5-5 साल की सश्रम कारावास की सजा सुनाई है. यह फैसला पीड़ित परिवार के लिए न्याय की एक अहम घड़ी है.

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वर्ष 2011 में कचरा फेंकने के विवाद से शुरू हुए झगड़े में एक व्यक्ति की हत्या के मामले में करीब 15 साल बाद अदालत का फैसला आया है. बगहा के पिपरिया गांव से जुड़े इस चर्चित मामले में जिला एवं अपर सत्र न्यायाधीश द्वितीय रविरंजन की अदालत ने तीन आरोपियों को दोषी ठहराते हुए पांच-पांच वर्ष के सश्रम कारावास की सजा सुनाई है.

फैसले को लंबे समय से लंबित इस मामले का महत्वपूर्ण न्यायिक पड़ाव माना जा रहा है.

कचरा फेंकने के विवाद ने लिया था हिंसक रूप

अपर लोक अभियोजक कमलेश शर्मा ने बताया कि मामला बगहा थाना कांड संख्या-158/11 से संबंधित है.

अभियोजन के अनुसार, नगर थाना क्षेत्र के पिपरिया गांव में कचरा फेंकने को लेकर शुरू हुआ विवाद देखते ही देखते हिंसक झड़प में बदल गया. आरोप है कि इसी दौरान अमर लाल साह, राजन साह और राजू साह ने विक्रम चौधरी के साथ मारपीट की और उनकी गर्दन मरोड़कर हत्या कर दी.

बेटे ने दर्ज कराई थी प्राथमिकी

घटना के बाद मृतक के पुत्र होसीला चौधरी ने अपने पिता की हत्या को लेकर प्राथमिकी दर्ज कराई थी.

पुलिस ने मामले की जांच के दौरान साक्ष्य जुटाए और आरोप पत्र न्यायालय में समर्पित किया.

गवाहों और साक्ष्यों के आधार पर हुई सुनवाई

सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने गवाहों के बयान और दस्तावेजी साक्ष्य अदालत के समक्ष प्रस्तुत किए. वहीं बचाव पक्ष ने भी अपने तर्क रखे.

दोनों पक्षों की दलीलें सुनने और उपलब्ध साक्ष्यों का परीक्षण करने के बाद अदालत ने अमर लाल साह, राजन साह और राजू साह को दोषी करार देते हुए प्रत्येक को पांच-पांच वर्ष के सश्रम कारावास की सजा सुनाई.

डेढ़ दशक बाद आया फैसला

करीब डेढ़ दशक पुराने इस मामले में आए फैसले से पीड़ित परिवार को न्याय मिलने की उम्मीद पूरी हुई है.

अदालत के इस निर्णय को लंबे समय से लंबित आपराधिक मामलों के निस्तारण की दिशा में एक महत्वपूर्ण न्यायिक फैसला माना जा रहा है.


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