भारत-नेपाल सीमा के सुस्ता-चकदहवा में जमीन विवाद का जायजा लेने पहुंचे सीमा जागरण मंच के राष्ट्रीय संयोजक

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अखिल भारतीय संयोजक मुरलीधर भिंडे ने ग्रामीणों से ली जानकारी | Prabhat Khabar Network

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सीमा जागरण मंच की एक उच्चस्तरीय टीम ने भारत-नेपाल सीमा के संवेदनशील सुस्ता-चकदहवा क्षेत्र का दौरा किया. टीम ने ग्रामीणों से मिलकर भूमि विवाद और उनकी समस्याओं को समझा.

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भारत नेपाल सीमा: भारत-नेपाल अंतरराष्ट्रीय सीमा से सटे संवेदनशील सुस्ता-चकदहवा क्षेत्र में भूमि विवाद की जमीनी हकीकत जानने के लिए सीमा जागरण मंच की उच्चस्तरीय टीम पहुंची. मंच के अखिल भारतीय संयोजक मुरलीधर भिंडे ने अपनी टीम के साथ चकदहवा गांव का दौरा किया. उन्होंने सीमावर्ती क्षेत्र के ग्रामीणों से मिलकर भूमि विवाद और वहां की मौजूदा परिस्थितियों की विस्तृत जानकारी ली. वाल्मीकिनगर स्थित जल संसाधन विभाग के अतिथि भवन में आयोजित राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक के बाद मंच के पदाधिकारी सीधे सीमावर्ती क्षेत्र पहुंचे.

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केंद्र सरकार को ज्ञापन सौंपने की तैयारी

संयोजक मुरलीधर भिंडे ने कहा कि समाचार माध्यमों से लगातार सुस्ता-चकदहवा क्षेत्र में विवाद की सूचना मिल रही थी. यह दोनों देशों की संप्रभुता और सुरक्षा से जुड़ा बेहद संवेदनशील मामला है. सीमा जागरण मंच सीमावर्ती गांवों की समस्याओं और सुरक्षा को प्रमुखता से उठाने के लिए निरंतर कार्य कर रहा है. उन्होंने आश्वस्त किया कि सीमा से जुड़ी तमाम समस्याओं और विवाद के तथ्यों को राष्ट्रीय स्तर पर साझा किया जाएगा तथा समाधान के लिए केंद्र सरकार को जल्द ही विस्तृत ज्ञापन सौंपा जाएगा.

ग्रामीणों ने बताईं सीमा पर आवागमन व सुरक्षा की समस्याएं

प्रतिनिधिमंडल ने चकदहवा के अलावा बिन टोली, झंडू टोला और कान्ही टोला का भी भ्रमण किया. ग्रामीणों ने अपनी परेशानियां खुलकर रखीं:

  • बुनियादी सुविधाओं का अभाव: सीमाई इलाकों में पक्की सड़कों, बिजली, स्वास्थ्य और बुनियादी विकास सुविधाओं की भारी कमी है.
  • आवागमन और सुरक्षा: स्थानीय निवासियों को सीमा क्षेत्र में आवागमन के दौरान कई सुरक्षा संबंधी बाधाओं का सामना करना पड़ता है.
  • तटबंध निर्माण पर विवाद: पूर्णकालिक महामंत्री गोविंद कुमार यादव ने बताया कि पूर्व में भारतीय क्षेत्र में तटबंध निर्माण को लेकर सुरक्षा कर्मियों और ग्रामीणों के बीच टकराव की नौबत आई थी.

विकास की कमी से बढ़ रहा तनाव

मंच के जिलाध्यक्ष तापोश टैगोर, श्रवण यादव सहित अन्य पदाधिकारियों ने कहा कि सीमाई भारतीय गांवों में विकास की कमी से स्थानीय नागरिक सीधा प्रभावित होते हैं.

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