कमर तक पानी में ड्यूटी, बिना पुल ऐसे भारत-नेपाल सीमा की सुरक्षा कर रहे SSB जवान

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बाढ़ के पानी में गश्त करते जवान | Prabhat Khabar Network

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भारत-नेपाल सीमा पर तैनात एसएसबी के जवान बाढ़ और उफनते नालों से जंग लड़ रहे हैं. लगातार बारिश के कारण कमर तक पानी में उतरकर भी वे सीमा की चौकसी निभा रहे हैं. पुल के अभाव में डेढ़ किलोमीटर दूर बीओपी तक पहुंचना एक बड़ी चुनौती बन गया है.

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वाल्मीकिनगर से विवेक सिंह की रिपोर्ट

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Valmikinagar News: भारत-नेपाल सीमा पर तैनात सशस्त्र सीमा बल (एसएसबी) के जवान इन दिनों सिर्फ सीमाई चौकसी ही नहीं, बल्कि बाढ़ और उफनते नालों से भी जंग लड़ रहे हैं. पश्चिम चंपारण के वाल्मीकिनगर क्षेत्र में लगातार बारिश के कारण जलजमाव और तेज बहाव ने जवानों की ड्यूटी को और मुश्किल बना दिया है. पुल के अभाव में कई बार जवानों को कमर से लेकर गले तक पानी में उतरकर गश्त और जरूरी कार्य पूरे करने पड़ते हैं.

डेढ़ किलोमीटर दूर बीओपी तक पहुंचना बना चुनौती

21वीं वाहिनी एसएसबी की एक बॉर्डर आउट पोस्ट (बीओपी) भारत-नेपाल सीमा से करीब डेढ़ किलोमीटर दूर झंडू टोला में स्थित है. इस बीओपी तक पहुंचने का रास्ता घने जंगल से होकर गुजरता है. बीच में पड़ने वाले नाले पर अब तक पुल का निर्माण नहीं हो सका है. बरसात के मौसम में यही नाला जवानों के लिए सबसे बड़ी परेशानी बन जाता है.

राशन लाने में भी उठाना पड़ता है बड़ा जोखिम

एसएसबी के जवानों को राशन, ईंधन और अन्य जरूरी सामान लाने के लिए प्रतिदिन करीब तीन किलोमीटर दूर बाजार तक ट्रैक्टर से जाना पड़ता है. वापसी के दौरान तेज बहाव वाले नाले को पार करना किसी जोखिम भरे अभियान से कम नहीं होता. फिसलन भरे रास्ते और तेज पानी के बीच हर कदम पर हादसे का खतरा बना रहता है.

पानी बढ़ते ही प्रभावित हो जाती है गश्त

स्थानीय लोगों के अनुसार, जब नाले का जलस्तर बढ़ जाता है तो आवागमन लगभग ठप हो जाता है. इसका असर सीमाई गश्त, नियमित ड्यूटी और अन्य आवश्यक कार्यों पर भी पड़ता है. जंगल वाले इस रास्ते में जंगली जानवरों का खतरा भी हमेशा बना रहता है, जिससे जवानों की मुश्किलें और बढ़ जाती हैं.

पुल निर्माण की मांग लंबे समय से लंबित

ग्रामीणों का कहना है कि जो जवान हर मौसम में देश की सीमाओं की सुरक्षा में तैनात रहते हैं, उनके लिए सुरक्षित सड़क और पुल की व्यवस्था होना बेहद जरूरी है. बताया जाता है कि इस समस्या को लेकर पहले भी उच्चाधिकारियों को पत्र भेजा जा चुका है, लेकिन अब तक सड़क और पुल का निर्माण नहीं हो पाया है.

विषम परिस्थितियों में भी निभा रहे हैं जिम्मेदारी

सभी चुनौतियों के बावजूद एसएसबी के जवान सीमाई इलाकों में लगातार गश्त, निगरानी और जरूरत पड़ने पर राहत कार्यों में भी पूरी मुस्तैदी से जुटे हैं. उनका साहस, अनुशासन और कर्तव्यनिष्ठा यह साबित करती है कि देश की सीमाएं केवल हथियारों से ही नहीं, बल्कि जवानों के अदम्य हौसले और समर्पण से भी सुरक्षित रहती हैं.

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