नई पीढ़ी को रेलवे का इतिहास दिखाने वाली धरोहर खुद बदहाली की कहानी कह रही, झाड़ियों में घिरी क्रेन

Updated:
विज्ञापन

सफाई के अभाव में झाड़ियों से घिरा रेल धरोहर घोषित क्रेन

WhatsApp चैनल से जुड़ेंगूगल पर प्रभात खबर चुनें

नरकटियागंज की ऐतिहासिक मीटर गेज क्रेन, जिसे रेलवे के गौरवशाली इतिहास को बताने के लिए प्रदर्शित किया गया था, अब बदहाली का शिकार है. चारों ओर झाड़-झंखाड़ और गंदगी के बीच यह धरोहर उपेक्षा की कहानी कह रही है. स्थानीय लोग इसके संरक्षण की मांग कर रहे हैं.

विज्ञापन

West Champaran News: नरकटियागंज में रेलवे की ओर से धरोहर के रूप में प्रदर्शित की गयी ऐतिहासिक मीटर गेज क्रेन अब बदहाली का शिकार है. नगर के वार्ड संख्या 17 स्थित रेलवे के सर्कुलेटिंग एरिया में रखी गयी क्रेन के चारों ओर झाड़-झंखाड़ और गंदगी फैली हुई है. क्रेन के ऊपर भी खर-पतवार उग आये हैं. जिस धरोहर को नई पीढ़ी को रेलवे के गौरवशाली इतिहास से परिचित कराने के उद्देश्य से सजाया गया था, अब वही रखरखाव के अभाव में उपेक्षा का शिकार दिखाई दे रही है.

विज्ञापन

कभी बच्चों और युवाओं के आकर्षण का केंद्र थी क्रेन

कुछ समय पहले तक ऐतिहासिक क्रेन को देखने के लिए लोग यहां रुकते थे. बच्चे और युवा इसके साथ सेल्फी भी लेते थे. रेलवे की ओर से इसे आकर्षक रूप देकर प्रदर्शित किया गया था, जिससे लोगों में इसके इतिहास को जानने की रुचि बढ़ी थी. लेकिन नियमित साफ-सफाई और रखरखाव नहीं होने के कारण अब इसकी स्थिति लगातार खराब होती जा रही है.

1976 में इज्जतनगर में हुआ था निर्माण

रेलवे के इतिहास से जुड़ी यह मीटर गेज क्रेन संख्या 1635 आईएसी वर्ष 1976 में पूर्वोत्तर रेलवे के इज्जतनगर में निर्मित हुई थी. वाष्प इंजन से चलने वाली इस क्रेन ने नरकटियागंज में करीब 32 वर्षों तक काम किया. वर्ष 1981 से 2013 तक इसका इस्तेमाल डिजास्टर कार्यों में किया गया.

नई पीढ़ी के लिए धरोहर के रूप में किया गया प्रदर्शित

सेवा अवधि पूरी होने के बाद रेलवे ने इसे संरक्षित कर नई पीढ़ी के मार्गदर्शन के लिए प्रदर्शित करने का निर्णय लिया. तत्कालीन समस्तीपुर मंडल रेल प्रबंधक विनय श्रीवास्तव के निर्देश पर 12 दिसंबर 2024 को मैकेनिकल टीम ने क्रेन स्थापित करने के लिए स्थल का निरीक्षण किया था. टीम ने क्रेन से जुड़ी रिपोर्ट डीआरएम को सौंपी थी.

साफ-सफाई और रंग-रोगन के बाद हुआ था प्रदर्शन

रेलवे की ओर से 25 दिसंबर 2024 को क्रेन की साफ-सफाई कर रंग-रोगन कराया गया था. इसके बाद उसे आकर्षक रूप दिया गया. 15 जनवरी को क्रेन को उसके इतिहास से जुड़ी जानकारी वाले बोर्ड के साथ आम लोगों के लिए प्रदर्शित किया गया. शुरुआत में लोगों ने इसमें काफी रुचि दिखायी, लेकिन अब तस्वीर बदल गयी है.

संरक्षण नहीं हुआ तो अधूरा रह जाएगा उद्देश्य

स्थानीय लोगों का कहना है कि रेलवे को इस ऐतिहासिक धरोहर के संरक्षण और नियमित रखरखाव पर ध्यान देना चाहिए. सर्कुलेटिंग एरिया में रखी गयी क्रेन यदि इसी तरह उपेक्षित रही तो आने वाली पीढ़ी को रेलवे के इतिहास और इस धरोहर से परिचित कराने का उद्देश्य प्रभावित होगा. लोगों ने नियमित साफ-सफाई और संरक्षण की व्यवस्था कराने की मांग की है.

यह भी पढ़ें: चीनी मिलें खुलने से पहले गन्ने का भाव तय करने की मांग, 650 रुपये क्विंटल के लिए किसानों का धरना

आपके शहर में

विज्ञापन

Prabhat Khabar App :

देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए

Download from Google PlayDownload from App Store
विज्ञापन