अगर आप शिक्षक हैं तो यह खबर आपके लिए है, 31 जुलाई तक कराना होगा 'प्रशस्त एप 2.0' पर पंजीकरण

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शिक्षक ध्यान दें: प्रशस्त एप 2.0 पर 31 जुलाई तक कराएं...

प्रतीकात्मक तस्वीर

बिहार शिक्षा विभाग ने शिक्षकों के लिए प्रशस्त एप 2.0 पर पंजीकरण अनिवार्य कर दिया है। 31 जुलाई तक रजिस्ट्रेशन पूरा करना होगा, जिसके बाद 15 अगस्त से विशेष आवश्यकता वाले बच्चों की स्क्रीनिंग शुरू होगी।

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Bettiah News: बिहार शिक्षा विभाग ने सभी सरकारी और निजी विद्यालयों के शिक्षक-शिक्षिकाओं के लिए प्रशस्त एप 2.0 पर पंजीकरण अनिवार्य कर दिया है. विभाग ने सभी जिलों को निर्देश दिया है कि 31 जुलाई तक शत-प्रतिशत शिक्षकों का रजिस्ट्रेशन पूरा कराया जाए. इसके बाद 15 अगस्त से 15 सितंबर तक इसी एप के माध्यम से विद्यार्थियों की स्क्रीनिंग होगी.

यह निर्देश बिहार शिक्षा परियोजना परिषद की राज्य कार्यक्रम पदाधिकारी (समावेशी शिक्षा) गार्गी कुमारी ने सभी जिला शिक्षा पदाधिकारियों और जिला कार्यक्रम पदाधिकारियों को जारी किया है.

क्यों जरूरी है प्रशस्त एप 2.0?

जारी पत्र के अनुसार एनसीईआरटी, नई दिल्ली ने प्रशस्त एप 2.0 विकसित किया है. इसका उद्देश्य विद्यालयों में पढ़ने वाले विशेष आवश्यकता वाले बच्चों (CWSN) की प्रारंभिक पहचान करना है.

इससे ऐसे विद्यार्थियों को समय पर समावेशी शिक्षा, शैक्षणिक सहायता और अन्य जरूरी सुविधाएं उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी.

शिक्षकों को कैसे करना होगा पंजीकरण?

शिक्षकों को यू-डाइस (UDISE) में दर्ज अपने मोबाइल नंबर के माध्यम से निर्धारित पोर्टल पर पंजीकरण करना होगा.

शिक्षा विभाग ने सभी प्रखंड शिक्षा पदाधिकारियों, बीआरसी और विद्यालयों को आवश्यक कार्रवाई करने का निर्देश दिया है. यदि जरूरत पड़ी तो विशेष पंजीकरण शिविर भी लगाए जाएंगे.

31 जुलाई तक पूरा करना होगा रजिस्ट्रेशन

विभाग ने स्पष्ट किया है कि 31 जुलाई तक सभी शिक्षक-शिक्षिकाओं का पंजीकरण पूरा कराना संबंधित विद्यालयों और शिक्षा अधिकारियों की जिम्मेदारी होगी.

समय सीमा के भीतर लक्ष्य पूरा कराने के लिए जिला और प्रखंड स्तर पर लगातार निगरानी भी की जाएगी.

15 अगस्त से शुरू होगी विद्यार्थियों की स्क्रीनिंग

राज्य कार्यक्रम के अनुसार 15 अगस्त से 15 सितंबर तक सभी सरकारी और निजी विद्यालयों में प्रशस्त एप 2.0 के माध्यम से विद्यार्थियों की स्क्रीनिंग की जाएगी.

इस दौरान ऐसे बच्चों की पहचान होगी जिन्हें सीखने, देखने, सुनने, बोलने, व्यवहार या अन्य किसी प्रकार की विशेष शैक्षणिक सहायता की आवश्यकता है. विभाग का मानना है कि इससे जरूरतमंद विद्यार्थियों तक आवश्यक सुविधाएं समय पर पहुंचाई जा सकेंगी.


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रवि 'रंक'

लेखक के बारे में

By रवि 'रंक'

90 के दशक में विद्यार्थी जीवन से ही रवि 'रंक' के आलेख, निबंध, संस्मरण और कविताएं क्षेत्रीय पत्र पत्रिकाओं के लिए लिखते रहे हैं. हिंदी विषय में स्नातकोत्तर योग्यताधारी रवि 'रंक' ने दैनिक हिंदुस्तान के पटना से प्रकाशित उत्तर बिहार संस्करण के साथ जनवरी 2001 से अपनी पत्रकारिता शुरु की. फरवरी 2020 में हिंदुस्तान से अलग होकर प्रभात खबर के पश्चिम चंपारण संस्करण में बतौर जिला मुख्यालय संवाददाता के रूप में पदस्थापित हैं.

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