बिहार में महिला फुटबॉल के जन्मदाता हैं नरसिंह प्रसाद यादव, 48 साल से तैयार कर रहे खिलाड़ियों की नई पीढ़ी

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रामपुर के अर्जुन विक्रम शाह स्टेडियम में महिला फुटबॉल प्रतियोगिताएं नरसिंह प्रसाद यादव के नाम से जानी जाती हैं. दशकों से उनके योगदान ने उन्हें बिहार में महिला फुटबॉल का जन्मदाता बना दिया है.

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Bihar Women's Football: रामनगर के अर्जुन विक्रम शाह स्टेडियम में जब भी महिला फुटबॉल प्रतियोगिता होती है, एक नाम सबसे अधिक सम्मान के साथ लिया जाता है. वह नाम है वरीय रेफरी नरसिंह प्रसाद यादव का, जिन्हें खिलाड़ी और खेल प्रेमी आज भी 'गुरु' कहकर पुकारते हैं. दशकों से महिला फुटबॉल के लिए किए गए उनके योगदान ने उन्हें बिहार में महिला फुटबॉल का जन्मदाता बना दिया है.4

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एक मैच ने बदल दी सोच

नरसिंह प्रसाद यादव बताते हैं कि वर्ष 1976 में पटना के मोइनुल हक स्टेडियम में भारत और स्वीडन के बीच खेले गए अंतरराष्ट्रीय मुकाबले ने उनके जीवन की दिशा बदल दी. उसी मैच को देखने के बाद उन्होंने बिहार में महिला फुटबॉल को आगे बढ़ाने का संकल्प लिया.

1977 से शुरू हुई नई शुरुआत

इस सोच को उन्होंने अगले ही वर्ष जमीन पर उतारा. वर्ष 1977 में रामनगर क्लब मैदान में भारत एकादश और शेष भारत एकादश के बीच प्रदर्शनी मैच का आयोजन कराया गया. इस आयोजन में अर्जुन विक्रम शाह और डब्ल्यूएफएफआई के एस.आर. जैदी का सहयोग मिला.

यही आयोजन आगे चलकर बिहार में महिला फुटबॉल आंदोलन की मजबूत नींव साबित हुआ.

कई जिलों तक पहुंचा अभियान

नरसिंह प्रसाद यादव के प्रयासों से महिला फुटबॉल का विस्तार केवल रामनगर तक सीमित नहीं रहा. बेतिया, रांची, छपरा, मुजफ्फरपुर और पटना सहित कई जिलों में महिला फुटबॉल की टीमों का गठन हुआ और प्रतियोगिताएं आयोजित होने लगीं.

शुरुआती दौर आसान नहीं था. संसाधनों की कमी और सामाजिक चुनौतियों के बावजूद उन्होंने खिलाड़ियों को प्रशिक्षण दिलाया और लगातार प्रतियोगिताओं का आयोजन कराया.

इतिहास का अहम पड़ाव

महिला फुटबॉल के सफर में मेहसी में आयोजित पहली अंतरजिला सैयद एजाज हुसैन ट्रॉफी को भी एक महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जाता है. इस प्रतियोगिता ने बिहार में महिला फुटबॉल को नई पहचान दिलाने में बड़ी भूमिका निभाई.

गुरु के मार्गदर्शन में चमकीं कई खिलाड़ी

नरसिंह प्रसाद यादव के प्रशिक्षण और मार्गदर्शन में पूनम सिंह, आदिती, शमीम आरा, श्वेता श्रीवास्तव, मोहनी कुमारी और पुष्पा कुमारी जैसी कई खिलाड़ियों ने राष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बनाई.

इन खिलाड़ियों ने बाद में रेलवे, बिहार पुलिस और शिक्षा विभाग जैसी सरकारी सेवाओं में भी स्थान हासिल किया.

योगदान को मिला सम्मान

महिला फुटबॉल के विकास में उनके योगदान को देखते हुए तत्कालीन मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव के कार्यकाल में महिला खिलाड़ियों को दो बार सम्मानित किया गया.

आज बिहार में करीब 20 महिला फुटबॉल टीमें सक्रिय हैं. इन टीमों की अनेक खिलाड़ी नरसिंह प्रसाद यादव को अपना गुरु मानती हैं.

उम्र बढ़ी, जुनून नहीं

उम्र के इस पड़ाव पर भी नरसिंह प्रसाद यादव मैदान से दूर नहीं हुए हैं. वह आज भी रेफरी और मार्गदर्शक की भूमिका निभा रहे हैं. नई पीढ़ी को महिला फुटबॉल के जरिए आगे बढ़ने की प्रेरणा देना उनके जीवन का सबसे बड़ा लक्ष्य बना हुआ है.


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