पॉवर हाउस चौक के बाद अब नेपाली पथ पर कार्रवाई की तैयारी, ग्लास हाउस समेत 30 दुकानों पर चलेगा बुलडोजर?

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बेतिया सदर के एसडीएम विकास कुमार | Prabhat Khabar Network

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बेतिया में पावर हाउस चौक के बाद अब नेपाली पथ तक अतिक्रमण पर प्रशासन की नजर है. 30 कब्जाधारकों को नोटिस, 17 सितंबर तक साक्ष्य सहित जवाब मांगा गया है. 9 सितंबर को दो दर्जन दुकानें हटाई गई थीं.

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बेतिया न्यूज: बेतिया शहर को अतिक्रमण मुक्त बनाने की प्रशासनिक मुहिम अब पावर हाउस चौक से आगे कविवर नेपाली चौक तक पहुंचने वाली है. पावर हाउस चौक से कविवर नेपाली चौक तक फोरलेन सड़क के लिए चिन्हित अतिक्रमण के मामले में प्रशासन ने 30 कब्जाधारकों को नोटिस जारी किया है. संबंधित लोगों को 17 सितंबर तक अपने कब्जे के समर्थन में साक्ष्य के साथ जवाब देने की मोहलत दी गयी है. जवाब पर विचार के बाद प्रशासन आगे की कार्रवाई करेगा.

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तीन दिन पहले तोड़े गए थे दो दर्जन दुकान

इससे पहले 9 सितंबर को प्रशासन ने आलोक भारती मोड़ से पावर हाउस चौक तक अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई की थी. इस दौरान पावर हाउस चौक की दो दर्जन दुकानों को हटाया गया था. अब इसी अभियान को आगे बढ़ाते हुए नेपाली पथ की ओर कार्रवाई की तैयारी है. इससे सड़क किनारे दुकान और अन्य निर्माण कर कारोबार करने वालों में हलचल बढ़ गयी है.

17 सितंबर के बाद तय होगा अगला कदम

सदर एसडीएम विकास कुमार के अनुसार, नोटिस पाने वाले कब्जाधारकों को 17 सितंबर तक साक्ष्य सहित अपना जवाब देना है. प्राप्त जवाबों की जांच और विचारण के बाद चिन्हित सरकारी सड़क को अतिक्रमण मुक्त कराने की कार्रवाई की जाएगी. यानी फिलहाल संबंधित कब्जाधारकों को अपना पक्ष रखने का अवसर दिया गया है.

बरवत सेना से जीएमसीएच तक बनना है फोरलेन

बरवत सेना से गवर्मेंट मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल तक स्वीकृत फोरलेन सड़क को जिला मुख्यालय के लिए महत्वपूर्ण परियोजना बताते हुए एसडीएम ने लोगों से प्रशासन को सहयोग करने की अपील की है. प्रशासन का कहना है कि शहर के विकास और यातायात व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए सड़क को अतिक्रमण मुक्त रखना जरूरी है.

अतिक्रमण के खिलाफ अभियान रहेगा जारी

सदर एसडीएम ने कहा कि जिला मुख्यालय क्षेत्र को अतिक्रमण मुक्त बनाना प्रशासन की प्राथमिकता है. अलग-अलग क्षेत्रों में क्रमवार कार्रवाई की जाएगी. साथ ही ऐसे मामलों की वास्तविक जानकारी भी उच्च न्यायालय के समक्ष रखने की प्रक्रिया चल रही है, जहां आधी-अधूरी जानकारी के आधार पर स्टे अथवा यथास्थिति के आदेश के कारण सरकारी और सार्वजनिक भूमि को अतिक्रमण मुक्त कराने की कार्रवाई रुकी हुई है.

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