दो शताब्दी पुरानी कंस वध मेले की परंपरा कायम, 70 से 80 हजार श्रद्धालु-दर्शक पहुंचे

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प्रतीकात्मक तस्वीर

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पश्चिम चंपारण के योगापट्टी में दो शताब्दी से चली आ रही ऐतिहासिक कंस वध मेले की परंपरा आज भी जीवंत है. इस वर्ष 70 से 80 हजार श्रद्धालुओं और दर्शकों ने मेले का आनंद लिया, जिसमें नाच, नाटक और कुश्ती प्रतियोगिताएं शामिल थीं.

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पश्चिम चंपारण: योगापट्टी के मच्छरगावां में करीब दो शताब्दी से चली आ रही ऐतिहासिक कंस वध मेले की परंपरा आज भी कायम है. नगर पंचायत के नरसिंह नारायण स्टेडियम और बड़े बाजार में आयोजित मेले में जिले सहित दूर-दराज के क्षेत्रों से करीब 70 से 80 हजार श्रद्धालु और दर्शक पहुंचे. नाच, नाटक और झूलों से सजा मेला चार दिनों तक चलेगा. 15 सितंबर को छठियार पूजन और 16 सितंबर को मूर्ति विसर्जन होगा.

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परंपरा के अनुसार श्रीकृष्ण और बलदेव का स्वरूप धारण करने वाले कलाकार ठाकुर धाम मंदिर में पूजा-अर्चना के बाद स्टेडियम पहुंचे. यहां कंस की प्रतिमा का वध किया गया. इसके बाद दरबार परिवार के प्रांगण में विजय पूजन हुआ.

आयोजन ठाकुर धाम मंदिर, दरबार परिवार, कंस वध मेला आयोजन समिति और ग्रामीणों के सहयोग से हुआ. प्रशासन की ओर से सुरक्षा समेत अन्य व्यवस्थाएं दुरुस्त रखी गयीं.

विराट दंगल में 14 जोड़ी पहलवानों ने दिखाया दमखम

मेले के अवसर पर अंबेडकर चौक पूर्व टोला में विराट दंगल का भी आयोजन किया गया. इसका उद्घाटन मंत्री नंदकिशोर राम और लौरिया विधायक विनय बिहारी ने किया.

दंगल में नेपाल, हरियाणा, पंजाब, अयोध्या और बिहार से पहुंचे करीब 14 जोड़ी पहलवानों ने दमखम दिखाया. अशोक पहलवान, नेपाल के देवा थापा, बसंत थापा और छपरा के निर्दोष बाबा ने अपने-अपने मुकाबले जीते.

मंत्री नंदकिशोर राम ने दंगल को ऐतिहासिक बताते हुए इसे ग्रामीण खेल प्रतिभाओं के लिए महत्वपूर्ण मंच बताया.

1857 में हुआ था ठाकुर धाम मंदिर का निर्माण

शिव शंकर प्रसाद सिंह के अनुसार, ठाकुर धाम मंदिर का निर्माण वर्ष 1857 में बाबू मोहन सिंह ने कराया था. आयोजन समिति के अध्यक्ष अरविंद शाह, कोषाध्यक्ष विनोद प्रसाद, सचिव लाल बाबू शाह, अभिषेक आनंद, पप्पू पारस, भिखारी, मनीष, अभय और बलिराम ने आयोजन में सहयोग किया.

मंदिर की चारदीवारी का पुनर्निर्माण बृज बिहारी सिंह के सहयोग से कराया जा रहा है. विधायक विनय बिहारी, शिव शंकर प्रसाद सिंह, विनोद बिहारी सिंह, बृज बिहारी सिंह और शिव प्रसाद सिंह का भी आयोजन में महत्वपूर्ण योगदान रहा.

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