यूं ही नहीं राजकीय शिक्षक पुरस्कार के लिए चुने गए दुर्योधन बैठा, उर्दू मध्य विद्यालय के 843 बच्चों के हैं फेवरेट गुरुजी, बदल दी है स्कूल की तस्वीर

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पश्चिम चंपारण के मझौलिया स्थित राजकीय उर्दू मध्य विद्यालय गढ़वा भोगाड़ी की बदली तस्वीर. प्रधानाध्यापक दुर्योधन बैठा के प्रयासों से नामांकन, स्मार्ट क्लास, किचेन गार्डन और बच्चों की गतिविधियों में हुआ बड़ा बदलाव. राजकीय शिक्षक पुरस्कार के लिए चयनित दुर्योधन बैठा की पूरी कहानी जानिए.

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Teacher's day special: सरकारी स्कूल का नाम आते ही अक्सर लोगों के जेहन में सीमित संसाधन और कम सुविधाओं की तस्वीर उभरती है. लेकिन मझौलिया प्रखंड के राजकीय उर्दू मध्य विद्यालय गढ़वा भोगाड़ी ने इस सोच को बदलने की कोशिश की है. विद्यालय में लगातार बढ़ता नामांकन, आधुनिक शिक्षण व्यवस्था, बच्चों की गतिविधियों में भागीदारी और समाज से जुड़ी जागरूकता के कार्यक्रम इसे अलग पहचान दे रहे हैं. इस बदलाव के पीछे विद्यालय के प्रधानाध्यापक दुर्योधन बैठा की सोच और लगातार किए गए प्रयासों की बड़ी भूमिका है. यही वजह है कि उन्हें राजकीय शिक्षक पुरस्कार के लिए चुना गया है.

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एचएम के प्रयास से 324 से 843 तक पहुंचा नामांकन

विद्यालय की सबसे बड़ी उपलब्धियों में तेजी से बढ़ा छात्र नामांकन है. प्रधानाध्यापक दुर्योधन बैठा के नेतृत्व में विद्यालय में बच्चों की संख्या 324 से बढ़कर 843 तक पहुंच गयी. आज विद्यालय में करीब 600 बच्चे नामांकित हैं. अधिक से अधिक बच्चों को सरकारी स्कूल से जोड़ने के लिए सहायक शिक्षकों के साथ विद्यालय शिक्षा समिति, स्थानीय जनप्रतिनिधियों और पोषक क्षेत्र के लोगों के साथ लगातार बैठकें की गयीं. अभिभावकों को सरकारी विद्यालय में मिलने वाली सुविधाओं और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के प्रति जागरूक किया गया.

छिजन रोकने के लिए पढ़ाई को बनाया आनंददायी

केवल नामांकन बढ़ाना ही लक्ष्य नहीं रहा. बच्चों को विद्यालय से जोड़े रखना भी चुनौती थी. इसके लिए शिक्षकों के सहयोग से सकारात्मक शैक्षणिक गतिविधियां, खेलकूद, आनंददायी चेतना सत्र और बच्चों के साथ दोस्ताना संवाद शुरू किया गया. इसका असर यह हुआ कि बच्चे विद्यालय को केवल पढ़ाई की जगह नहीं, बल्कि अपनेपन के स्थान के रूप में देखने लगे. प्रधानाध्यापक के अनुसार मन, दिमाग और शरीर से बच्चों को विद्यालय से जोड़ने की कोशिश की गयी, ताकि स्कूल छोड़ने की प्रवृत्ति पर रोक लग सके.

पढ़ाई के साथ बागवानी और किचेन गार्डन

विद्यालय में बच्चों को किताबों से बाहर की दुनिया से भी जोड़ने का प्रयास किया गया. छात्रों के सहयोग से विद्यालय परिसर में बागवानी करायी गयी. यूथ एवं यूको क्लब और मिशन लाइफ के सदस्यों के सहयोग से किचेन गार्डन तैयार किया गया. इससे बच्चों को पर्यावरण संरक्षण, पौधों की देखभाल और प्राकृतिक संसाधनों के महत्व की जानकारी व्यवहारिक रूप से मिली.

आपदा प्रबंधन का दिया व्यवहारिक ज्ञान

भूकंप, आगलगी, बाढ़ और आसमानी बिजली जैसी प्राकृतिक आपदाओं से होने वाली क्षति को कम करने के लिए विद्यालय में जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किये गये. बच्चों को केवल आपदा के बारे में जानकारी नहीं दी गयी, बल्कि ऐसी स्थिति में क्या सावधानी बरतनी चाहिए और खुद के साथ दूसरों की सुरक्षा कैसे की जा सकती है, इसकी व्यावहारिक जानकारी भी दी गयी.

नशे के खिलाफ स्कूल से समाज तक जागरूकता

विद्यालय की गतिविधियां सिर्फ परिसर तक सीमित नहीं रहीं. शराब, गांजा, भांग, अफीम, चरस, सुलेशन आदि नशे से होने वाली सामाजिक, आर्थिक और शारीरिक क्षति के प्रति बच्चों और समाज को जागरूक करने का प्रयास किया गया. स्कूल के कार्यक्रमों के साथ-साथ विद्यालय से बाहर भी लोगों को नशे के दुष्परिणामों के बारे में बताया गया.

शिक्षक से प्रधानाध्यापक तक का सफर

दुर्योधन बैठा की शिक्षक के रूप में नियुक्ति 23 जून 2000 को बीपीएससी के माध्यम से सहायक शिक्षक पद पर हुई थी. इसके बाद 29 जुलाई 2017 से वे राजकीय उर्दू मध्य विद्यालय गढ़वा भोगाड़ी में प्रधानाध्यापक के पद पर कार्यरत हैं. वर्षों के अनुभव को उन्होंने विद्यालय के विकास की दिशा में इस्तेमाल किया. उनके नेतृत्व में विद्यालय ने संसाधनों के साथ-साथ शैक्षणिक और सामाजिक गतिविधियों पर भी जोर दिया.


स्कूल में लगा हेल्थ कैंप | Prabhat Khabar Network
स्कूल में लगा हेल्थ कैंप | Prabhat Khabar Network

सोशल मीडिया और साइबर सुरक्षा पर भी फोकस

आज के डिजिटल दौर में बच्चों को सोशल मीडिया के सही इस्तेमाल की जानकारी देना भी विद्यालय की प्राथमिकता में शामिल किया गया. फेसबुक, व्हाट्सएप, इंस्टाग्राम और यूट्यूब जैसे प्लेटफॉर्म के लाभ के साथ इनके गलत इस्तेमाल से होने वाले नुकसान पर विशेष कार्यक्रम किये गये. बच्चों को साइबर सुरक्षा, ऑनलाइन ठगी, गलत जानकारी और सोशल मीडिया के दुरुपयोग से बचने के उपायों की जानकारी दी गयी.


सरकारी स्कूल में स्मार्ट क्लास ने बदली पढ़ाई की तस्वीर

विद्यालय को आधुनिक सुविधाओं से लैस करने के लिए भी लगातार प्रयास किये गये. प्रधानाध्यापक के आग्रह पर शिक्षा विभाग, पटना द्वारा जिले में एकमात्र मिडिल स्कूल के रूप में राजकीय उर्दू मध्य विद्यालय गढ़वा भोगाड़ी में स्मार्ट क्लास की व्यवस्था करायी गयी. इससे बच्चों को तकनीक आधारित और रोचक तरीके से पढ़ने का अवसर मिला.


सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत करते बच्चे | Prabhat Khabar Network
सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत करते बच्चे | Prabhat Khabar Network

बिजली के लिए लगा स्पेशल ट्रांसफार्मर

विद्यालय की आधारभूत सुविधाओं को मजबूत करने के लिए बिजली विभाग से विद्यालय के लिए विशेष ट्रांसफार्मर लगवाया गया. वहीं मुखिया के फंड से विद्यालय में बाउंड्री वॉल, पानी सोखता, पेवर ब्लॉक, एक मोटर, 11 नल और पानी की टंकी की व्यवस्था करायी गयी. जिला परिषद सदस्य के फंड से दो सीट वाला शौचालय, एक मोटर और पानी की टंकी उपलब्ध करायी गयी.


अभिभावकों ने भी बढ़ाया सहयोग का हाथ

विद्यालय के विकास में अभिभावकों और स्थानीय लोगों की भागीदारी भी सुनिश्चित की गयी. अभिभावकों के सहयोग से विद्यालय में मंच के लिए लोहे की पाइप, मंच का कपड़ा समेत अन्य सामान उपलब्ध कराया गया. बच्चों के हित में प्रधानाध्यापक ने अपने स्तर से और जनप्रतिनिधियों के सहयोग से तिथि भोज का आयोजन भी कराया.


पर्यावरण संरक्षण को लेकर बच्चों की क्रिएटिविटी | Prabhat Khabar Network
पर्यावरण संरक्षण को लेकर बच्चों की क्रिएटिविटी | Prabhat Khabar Network

चेतना सत्र बना बच्चों की प्रतिभा का मंच

विद्यालय का चेतना सत्र भी अपने आप में खास है. बाल संसद के सदस्य प्रतिदिन अलग-अलग कार्यक्रमों का संचालन करते हैं. इससे बच्चों में नेतृत्व क्षमता, आत्मविश्वास और मंच पर अपनी बात रखने का हुनर विकसित हो रहा है. विद्यालय की गतिविधियों में बच्चों की सक्रिय भागीदारी यह बताती है कि उन्हें सिर्फ परीक्षा के लिए नहीं, बल्कि भविष्य के लिए तैयार करने की कोशिश हो रही है.

भारत का नक्शा बनाए स्कूल के छात्र | Prabhat Khabar Network
भारत का नक्शा बनाए स्कूल के छात्र | Prabhat Khabar Network

टीचर्स डे पर इसलिए खास है यह कहानी

शिक्षक दिवस पर दुर्योधन बैठा की कहानी इसलिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह सिर्फ एक शिक्षक के सम्मान की कहानी नहीं है. यह उस सोच की कहानी है जिसमें सरकारी स्कूल को बेहतर बनाने के लिए शिक्षक, बच्चे, अभिभावक, जनप्रतिनिधि और समाज एक साथ आते हैं. 324 से 843 तक पहुंचा नामांकन, स्मार्ट क्लास, किचेन गार्डन, बाल संसद, आपदा प्रबंधन, साइबर सुरक्षा और नशामुक्ति जैसे प्रयास बताते हैं कि इच्छाशक्ति हो तो सरकारी विद्यालय भी बच्चों और अभिभावकों की पहली पसंद बन सकता है.

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