बेगूसराय में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा पर संकुल स्तरीय कार्यशाला, शिक्षकों ने रखे विचार
कार्यशाला को संबोधित करते समन्वयक अंगद कुमार पंडित
Begusarai News : मंसूरचक के गोविंदपुर संकुल में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा पर एक दिवसीय कार्यशाला आयोजित, शिक्षा के सर्वांगीण विकास और आधुनिक तकनीकों पर हुई विस्तृत चर्चा.
Begusarai News : प्रखंड के उच्चतर माध्यमिक विद्यालय गोविंदपुर संकुल में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा विषय पर संकुल स्तरीय एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया. कार्यशाला की अध्यक्षता संकुल समन्वयक सह प्रधानाध्यापक अंगद कुमार पंडित ने की. कार्यक्रम का शुभारंभ वंदे मातरम् और राष्ट्रगान के साथ किया गया.
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शिक्षा को बताया विकास की मजबूत आधारशिला
कार्यशाला को संबोधित करते हुए उत्क्रमित मध्य विद्यालय उर्दू तेमूंहा के प्रधानाध्यापक डॉ. सुरेंद्र कुमार चौधरी ने कहा कि गुणवत्तापूर्ण शिक्षा किसी व्यक्ति, समाज और राष्ट्र के विकास की सबसे मजबूत आधारशिला है. शिक्षा का उद्देश्य केवल बच्चों को पढ़ना-लिखना या परीक्षा में अच्छे अंक प्राप्त करना सिखाना नहीं है, बल्कि उनमें ज्ञान, कौशल, संस्कार, विवेक, रचनात्मकता, आत्मविश्वास और जिम्मेदारी की भावना विकसित करना भी है. उन्होंने कहा कि ऐसी शिक्षा, जो विद्यार्थियों को जीवन की समस्याओं को समझने और उनका समाधान करने में सक्षम बनाए तथा समाज के प्रति उनके कर्तव्यों का बोध कराए, वही वास्तविक अर्थों में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा है.
सर्वांगीण विकास पर दिया गया जोर
डॉ. सुरेंद्र कुमार चौधरी ने कहा कि गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रत्येक विद्यार्थी की क्षमता और आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए उसके सर्वांगीण विकास में सहायक होनी चाहिए. इसमें केवल पाठ्यपुस्तक का ज्ञान ही नहीं, बल्कि व्यावहारिक ज्ञान, नैतिक मूल्य, वैज्ञानिक दृष्टिकोण, सामाजिक व्यवहार, तकनीकी दक्षता और जीवन कौशल भी शामिल होने चाहिए. उन्होंने कहा कि शिक्षा ऐसी होनी चाहिए, जो विद्यार्थी को ज्ञानवान, कुशल, संस्कारी, आत्मनिर्भर और जिम्मेदार नागरिक बनाए.
गतिविधि आधारित शिक्षा की आवश्यकता
कार्यशाला में विद्यार्थियों को केवल किताबों तक सीमित न रखने पर भी जोर दिया गया. वक्ताओं ने कहा कि प्रयोग, गतिविधियों, परियोजनाओं, खेल और वास्तविक जीवन के उदाहरणों के माध्यम से शिक्षा देने से बच्चों की सीखने की क्षमता बेहतर होती है. शिक्षा के साथ ईमानदारी, अनुशासन, सहयोग, दया, सहिष्णुता, देशप्रेम और पर्यावरण संरक्षण जैसे नैतिक मूल्यों के विकास को भी महत्वपूर्ण बताया गया.
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डिजिटल तकनीक के उचित उपयोग पर चर्चा
वक्ताओं ने कहा कि आज के डिजिटल युग में कंप्यूटर, इंटरनेट, डिजिटल उपकरणों और आधुनिक तकनीक का उचित उपयोग विद्यार्थियों की सीखने की क्षमता को बढ़ाने में सहायक हो सकता है. तकनीक का प्रभावी और संतुलित उपयोग गुणवत्तापूर्ण शिक्षा को और बेहतर बना सकता है.
हर बच्चे तक पहुंचे गुणवत्तापूर्ण शिक्षा
कार्यशाला में इस बात पर विशेष जोर दिया गया कि गुणवत्तापूर्ण शिक्षा का लाभ समाज के प्रत्येक बच्चे को मिलना चाहिए. आर्थिक, सामाजिक, ग्रामीण या शहरी स्थिति के आधार पर शिक्षा में किसी प्रकार का भेदभाव नहीं होना चाहिए. कार्यशाला में अमर कुमार आनंद, अर्पणा कुमारी सहित संकुल स्तर के सभी प्रधानाध्यापकों ने भी अपने विचार रखे और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा को मजबूत बनाने पर विशेष बल दिया.
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