गंगा किनारे फिर गूंजेगा दिनकर का ओज,सिमरिया में जुटेगा साहित्य और संस्कृति का महाकुंभ

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राष्ट्रकवि दिनकर जी का प्रतिमा

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राष्ट्रकवि रामधारी सिंह दिनकर की 118वीं जयंती के अवसर पर सिमरिया में साहित्य, संस्कृति का महासंगम. जानिए 23-24 सितंबर के कार्यक्रम.

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बेगूसराय: बेगूसराय के सिमरिया गांव एक बार फिर राष्ट्रकवि रामधारी सिंह दिनकर की ओजस्वी वाणी और साहित्यिक चेतना का केंद्र बनने जा रहा है. दिनकर की 118वीं जयंती के अवसर पर 23 और 24 सितंबर को यहां साहित्य,संस्कृति,राजनीति और विचारों का ऐसा संगम देखने को मिलेगा,जिसमें राज्य सरकार के मंत्री और जनप्रतिनिधियों से लेकर देशभर के नामचीन साहित्यकार,आलोचक,प्रोफेसर,रंगकर्मी और विचारक शामिल होंगे.दो दिनों तक दिनकर की जन्मभूमि उनकी कविताओं,विचारों,व्याख्यानों, संगोष्ठियों और नाट्य प्रस्तुतियों से जीवंत रहेगी.

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कई मंत्री होंगे शामिल

आज 23 सितंबर को जयंती समारोह का शुभारंभ राजकीय सम्मान और श्रद्धांजलि कार्यक्रमों के साथ होगा.बिहार सरकार के कला,संस्कृति एवं युवा विभाग के मंत्री डॉ. प्रमोद कुमार तथा पथ निर्माण मंत्री इंजीनियर कुमार शैलेंद्र मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होंगे.

इनके अलावा विधायक कुंदन कुमार,विधायक रजनीश कुमार,विधान पार्षद सर्वेश कुमार,डीएम रिची पांडेय, एसपी मनीष,बरौनी रिफाइनरी के कार्यकारी निदेशक सत्य प्रकाश,एनटीपीसी के परियोजना प्रमुख जयदीप घोष,एचयूआरएल के प्लांट हेड नितिन सक्सेना और बरौनी डेयरी के प्रबंध निदेशक रवींद्र कुमार सहित कई गणमान्य लोग राष्ट्रकवि को श्रद्धांजलि देंगे.

साहित्यिक संगोष्ठी आयोजित

वही 24 सितंबर को दिनकर पुस्तकालय परिसर में राष्ट्रीय स्तर की साहित्यिक संगोष्ठी आयोजित होगी.अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के हिंदी विभागाध्यक्ष एवं प्रख्यात आलोचक प्रो. कमलानंद झा मुख्य वक्ता होंगे. दिनकर और महाकवि विद्यापति के साहित्य पर उनके शोध कार्य को विशेष रूप से महत्वपूर्ण माना जाता है.

जामिया मिल्लिया इस्लामिया के उर्दू प्रोफेसर सरवरुल हुदा भी संगोष्ठी में शामिल होंगे. उन्होंने दिनकर के ऐतिहासिक गद्य ग्रंथ संस्कृति के चार अध्याय का उर्दू में अनुवाद किया है.वे संस्कृति का पांचवां अध्याय विषय पर अपना व्याख्यान प्रस्तुत करेंगे.इसके अलावा काशी हिंदू विश्वविद्यालय के हिंदी प्राध्यापक प्रो. रामाज्ञा शशिधर,प्रसिद्ध गद्य लेखक डॉ. अभय कुमार ठाकुर और प्रो. कमलेश अपने विचार साझा करेंगे.

बनारस से पहुंचे सुप्रसिद्ध रंग निर्देशक प्रणव मुखर्जी

इस अवसर पर विशेष रूप से तैयार स्मारिका समर शेष है का विमोचन भी किया जाएगा. जयंती समारोह की सांस्कृतिक संध्या में दिनकर के साहित्य का रंगमंचीय रूपांतरण आकर्षण का केंद्र रहेगा. बनारस से पहुंचे सुप्रसिद्ध रंग निर्देशक प्रणव मुखर्जी के निर्देशन में कलाकारों की टीम दिनकर की रचनाओं पर आधारित काव्य कोलाज प्रस्तुत करेगी. इसके माध्यम से दिनकर की कविताओं में मौजूद राष्ट्रबोध,संघर्ष,स्वाभिमान और मानवीय संवेदना को मंच पर जीवंत किया जाएगा.

वर्तमान में सिमरिया गांव में करीब 32 छोटे-बड़े कवि और लेखक लगातार साहित्यिक सृजन कर रहे हैं.इस गांव की साहित्यिक परंपरा से प्रेरित होकर बड़ी संख्या में युवा हिंदी साहित्य के प्रोफेसर,शोधार्थी और प्रशासनिक सेवाओं में भी पहुंचे हैं.स्थानीय समिति पिछले पांच दशकों से लगातार दिनकर जयंती समारोह का आयोजन करती आ रही है.आयोजकों के अनुसार इसका उद्देश्य केवल राष्ट्रकवि की स्मृतियों को जीवित रखना नहीं,बल्कि उनके विचारों को नई पीढ़ी तक पहुंचाना भी है.इधर, जिला प्रशासन और कला एवं संस्कृति विभाग के संयुक्त तत्वावधान में 23 सितंबर को जिले में भी दिनकर जयंती के अवसर पर विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे.


दिनकर भवन,स्वर्ण जयंती पुस्तकालय,दिनकर चौक जीरोमाइल,दिनकर ग्राम सिमरिया और दिनकर आवास सिमरिया में माल्यार्पण कार्यक्रम होगा.डीएम रिची पांडेय के अनुसार दिनकर भवन में सुबह 9:15 बजे तथा स्वर्ण जयंती पुस्तकालय में 9:30 बजे माल्यार्पण किया गया.जबकि दिनकर चौक जीरोमाइल में 10 बजे,दिनकर ग्राम सिमरिया में 10:30 बजे और दिनकर आवास में 10:40 बजे माल्यार्पण किया जाएगा.दोपहर 2 बजे से 4:30 बजे तक समाहरणालय स्थित कारगिल विजय सभा भवन में व्याख्यान एवं सम्मान समारोह होगा.इसमें रश्मिरथी की प्रासंगिकता आज के समय में विषय पर व्याख्यान होगा.मुख्य वक्ता के रूप में बीआरए बिहार विश्वविद्यालय,मुजफ्फरपुर के पूर्व कुलपति प्रो रविंद्र कुमार वर्मा रवि और पीजी सेमेस्टर,सहरसा के प्रो. सिद्धेश्वर काश्यप अपने विचार रखेंगे.मुख्य सांस्कृतिक कार्यक्रम का उद्घाटन शाम 5:30 बजे दिनकर कला भवन में होगा.

इसके बाद आम्रपाली प्रशिक्षण केंद्र की ओर से सांस्कृतिक प्रस्तुति दी जाएगी.शाम 6 बजे एसोसिएशन फॉर सोशल हारमोनी एंड आर्ट,छपरा की टीम द्वारा मो.जहांगीर खान के निर्देशन में कुरुक्षेत्र नाटक का मंचन किया जाएगा.इसके बाद 6:45 से 7:45 बजे तक स्थानीय कवियों का काव्य सत्र होगा. इसमें अशांत भोला,दीनानाथ सुमित,डॉ. सच्चिदानंद पाठक,प्रफुल्ल चंद्र मिश्र,डॉ. रमा मौसम,रंजू ज्योति और स्वाति गोदर काव्य पाठ करेंगे.वहीं शाम 7:45 बजे से रात 10 बजे तक आमंत्रित कवियों का विशेष काव्य सत्र आयोजित होगा.

इसमें विनीत चौहान,प्रताप फौजदार,नीलोत्पल मृणाल,स्वयं श्रीवास्तव और डॉ. तिष्या श्री अपनी काव्य प्रस्तुतियां देंगे.दो दिवसीय यह आयोजन एक बार फिर सिमरिया को साहित्य और संस्कृति के राष्ट्रीय मानचित्र पर केंद्र में लाने जा रहा है.गंगा की लहरों और दिनकर की जन्मभूमि के बीच जब उनकी कविताएं गूंजेंगी तो यह आयोजन केवल जयंती समारोह नहीं,बल्कि उस साहित्यिक विरासत को आगे बढ़ाने का अवसर भी बनेगा,जिसने हिंदी साहित्य को ओज,स्वाभिमान और राष्ट्रीय चेतना की नई भाषा दी.

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