सरसों तेल की बढ़ी कीमतों ने बिगाड़ा रसोई का बजट, आम लोग परेशान
चीनी और सरसों तेल की बढ़ी कीमतों ने बिगाड़ा रसोई का बजट, आम लोग परेशान | Prabhat Khabar Network
चीनी और सरसों तेल की बढ़ी कीमतों ने बिगाड़ा रसोई का बजट, आम लोग परेशान
पंजवारा (बांका). इन दिनों बेतहाशा बढ़ती महंगाई ने आम जनता और खासकर गृहिणियों की रसोई का बजट पूरी तरह बिगाड़ दिया है.दैनिक उपयोग की दो सबसे अहम वस्तुएं—चीनी और सरसों तेल—की कीमतों में हुई अचानक बढ़ोतरी से गरीब और मध्यम वर्गीय परिवारों की मुश्किलें काफी बढ़ गई हैं. महंगे हुए दाम, जानिए क्या है नया रेट स्थानीय खुदरा बाजारों में इन दिनों चीनी का दाम बढ़कर 65 रुपये प्रति किलोग्राम तक पहुंच गया है, जबकि शुद्ध सरसों तेल 200 रुपये प्रति लीटर के करीब बिक रहा है. कुछ समय पहले तक (अगस्त की शुरुआत में) चीनी 48 से 50 रुपये और सरसों तेल 200 रुपये प्रति लीटर के आसपास मिल रहा था. इसके अलावा थोक बाजार में चीनी का भाव करीब 6400 रुपये प्रति क्विंटल चल रहा है. रसोई से गायब हो रही मिठास और स्वाद महंगाई की इस दोहरी मार से आम उपभोक्ता खासे परेशान हैं. पहले से ही महंगी सब्जियों और अन्य राशन की मार झेल रहे परिवारों के लिए अब चाय की मिठास और भोजन का स्वाद बनाए रखना भी चुनौती बनता जा रहा है. गृहिणियों का कहना है कि अचानक बढ़े दामों ने उनके महीने के घरेलू बजट को असंतुलित कर दिया है.
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मिठाई और चाय के दामों पर भी असर बढ़ती कीमतों का असर अब बाजार के अन्य खान-पान पर भी दिखने लगा है। मिठाई दुकानदारों ने भी मिठाइयों के दाम में 20 रुपये प्रति किलोग्राम की वृद्धि कर दी है, जिससे अब वे ज्यादा दर वसूल रहे हैं. वहीं, चाय दुकानदारों ने भी 10 रुपये के बजाय 15 रुपये प्रति कप के दर से चाय देना शुरू कर दिया है, जिससे आम लोगों की परेशानी और बढ़ गई है. कारोबारियों का क्या है कहना स्थानीय दुकानदारों और खुदरा व्यापारियों का कहना है कि थोक मंडियों से महंगी आपूर्ति हो रही है, साथ ही परिवहन (ट्रांसपोर्टेशन) लागत में वृद्धि और स्थानीय बाजारों में माल की आवक कम होने के कारण कीमतों में यह भारी इजाफा हुआ है. कारोबारियों ने आने वाले दिनों में कीमतों में और तेजी आने की आशंका भी जताई है, जिसका सीधा असर ग्राहकों की खरीदारी पर पड़ रहा है. प्रशासन से नियंत्रण की मांग खाद्य पदार्थों के दामों में लगातार हो रही इस बेतहाशा वृद्धि से आम लोगों में नाराजगी है. स्थानीय उपभोक्ताओं और नागरिकों ने जिला प्रशासन व सरकार से मांग की है कि आवश्यक खाद्य पदार्थों की कीमतों पर जल्द से जल्द नियंत्रण लगाया जाए, ताकि आम जनता को इस बढ़ती महंगाई से राहत मिल सके.

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