लाखों खर्च कर बना मॉडल आंगनबाड़ी अब बदहाल, बारिश में टपकती छत के नीचे बैठते हैं मासूम, कागजात भी हो रहे खराब

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आंगनबाड़ी के बाहर खेलते बच्चे. | Prabhat Khabar Network

कभी मॉडल आंगनबाड़ी के रूप में विकसित हुआ यह केंद्र अब रखरखाव के अभाव में बदहाल है. बारिश में छत टपकने से बच्चों को परेशानी हो रही है और जरूरी दस्तावेज भी खराब हो रहे हैं.

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बच्चों के बेहतर पोषण, प्रारंभिक शिक्षा और सुरक्षित माहौल के लिए सरकार लगातार योजनाओं पर खर्च कर रही है. लेकिन योजनाओं के धरातल पर पहुंचने के बाद रख-रखाव के अभाव में व्यवस्था किस तरह बदहाल हो जाती है, इसकी तस्वीर बाराहाट प्रखंड के मोहनपुर गांव स्थित आंगनबाड़ी केंद्र संख्या 76 में साफ देखने को मिल रही है. सरकारी खर्च से कभी मॉडल आंगनबाड़ी केंद्र के रूप में विकसित किया गया यह केंद्र अब जिम्मेदारों की कथित उदासीनता और देखरेख के अभाव में बदहाली की ओर बढ़ रहा है. कभी रंग-रोगन, चारदीवारी और बागवानी से सुसज्जित यह केंद्र अब बारिश में बच्चों के लिए परेशानी का सबब बन गया है.

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बारिश होते ही टपकने लगती है केंद्र की छत

आंगनबाड़ी केंद्र की सबसे बड़ी समस्या इसकी छत को लेकर है. बारिश होते ही केंद्र के कक्ष की छत कई जगहों से टपकने लगती है. छत से गिरने वाला पानी फर्श पर फैल जाता है, जिससे छोटे-छोटे बच्चों को बैठाने में परेशानी होती है. कई बार बच्चे टपकते पानी की वजह से भीग जाते हैं. ऐसे में उनके बीमार पड़ने की आशंका भी बनी रहती है.

केंद्र में कार्यरत सेविका पुष्पा कुमारी ने बताया कि बारिश के दौरान छत से लगातार पानी टपकने के कारण बच्चों को पढ़ाने और अन्य गतिविधियां संचालित करने में काफी परेशानी होती है. छोटे बच्चों को पानी से बचाकर सुरक्षित स्थान पर बैठाना मुश्किल हो जाता है. यही वजह है कि बरसात के दिनों में कई अभिभावक अपने बच्चों को आंगनबाड़ी केंद्र भेजने से भी परहेज करते हैं.

छत से पानी टपकने के कारण खराब हो रहे दस्तावेज

केंद्र की छत की स्थिति का असर वहां रखे जरूरी दस्तावेजों पर भी पड़ रहा है. छत से टपकने वाले पानी और फर्श पर फैलने वाली नमी के कारण कई महत्वपूर्ण कागजात खराब हो चुके हैं. इससे केंद्र में सरकारी अभिलेखों को सुरक्षित रखने में भी परेशानी हो रही है.

ऐसे में सवाल उठना लाजिमी है कि जब केंद्र में जरूरी दस्तावेज तक सुरक्षित नहीं हैं तो यहां आने वाले मासूम बच्चों की सुरक्षा और सुविधाओं की स्थिति कैसी होगी. आंगनबाड़ी केंद्र का उद्देश्य बच्चों को पोषण, प्रारंभिक शिक्षा और सुरक्षित वातावरण उपलब्ध कराना है, लेकिन भवन की बदहाल स्थिति इस उद्देश्य पर सवाल खड़े कर रही है.

कई बार विभाग को दी गयी जानकारी, फिर भी नहीं हुआ स्थायी समाधान

सेविका पुष्पा कुमारी के अनुसार केंद्र की जर्जर स्थिति और छत की समस्या को लेकर कई बार विभागीय स्तर पर पत्राचार किया गया है. बाल विकास परियोजना पदाधिकारी को भी समस्या से अवगत कराया गया, लेकिन इसके बावजूद अब तक छत की स्थायी मरम्मत नहीं हो सकी है.

ग्रामीणों का कहना है कि सरकारी राशि खर्च कर जिस केंद्र को मॉडल आंगनबाड़ी के रूप में विकसित किया गया था, उसके रख-रखाव पर भी नियमित ध्यान दिया जाना चाहिए. समय रहते मरम्मत और देखभाल नहीं हुई तो मॉडल आंगनबाड़ी की पहचान धीरे-धीरे पूरी तरह बदहाल केंद्र के रूप में बदल सकती है.

बच्चों की सुरक्षा के लिए तत्काल मरम्मत जरूरी

बरसात के दौरान छत से पानी टपकने की समस्या बच्चों की सुरक्षा से सीधे जुड़ी हुई है. ऐसे में अब केवल आश्वासन की नहीं, बल्कि तत्काल मरम्मत और स्थायी समाधान की जरूरत है. केंद्र की छत की मरम्मत के साथ भवन की स्थिति की भी जांच कर आवश्यक सुधार कराने की मांग उठ रही है.

स्थानीय लोगों का कहना है कि आंगनबाड़ी केंद्रों पर सरकार की ओर से बच्चों के पोषण और प्रारंभिक शिक्षा के लिए योजनाएं चलायी जा रही हैं. ऐसे में केंद्र का सुरक्षित और सुविधाजनक होना बेहद जरूरी है. जिम्मेदार विभाग को इस समस्या का जल्द समाधान करना चाहिए, ताकि बच्चों को बारिश के दौरान परेशानी का सामना नहीं करना पड़े.

कहते हैं अधिकारी

इस संबंध में बाल विकास परियोजना पदाधिकारी चंदन कुमार ने बताया कि वह शीघ्र ही इस मुद्दे को देखेंगे और समस्या के सार्थक समाधान का प्रयास किया जाएगा.

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