मंदार शिखर पर विराजते हैं काशी विश्वनाथ, त्रिलिंग क्षेत्र में गूंजता है हर-हर महादेव

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पर्वत शिखर स्थित काशी विश्वनाथ मंदिर और शिवलिंग  | Prabhat Khabar Network

बांका के मंदार पर्वत पर स्थित काशी विश्वनाथ मंदिर की धार्मिक महत्ता और त्रिलिंग क्षेत्र के पौराणिक महत्व के बारे में विस्तार से जानें।

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बौंसी : बांका का मंदार पर्वत समुद्र मंथन की पौराणिक कथा और ऐतिहासिक विरासत के साथ शिव-विष्णु आस्था के संगम के लिए भी प्रसिद्ध है. मंदार पर्वत शिखर पर विराजमान काशी विश्वनाथ शिवलिंग इसकी धार्मिक महत्ता को और बढ़ाता है. धार्मिक मान्यता के अनुसार काशी विश्वनाथ के विराजमान होने के कारण मंदार क्षेत्र को त्रिलिंग क्षेत्र कहा जाता है.

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तीन प्रमुख शिवलिंगों से जुड़ा है त्रिलिंग क्षेत्र

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार मंदार क्षेत्र के दक्षिण में स्थित रावणेश्वर वैद्यनाथ, बासुकीनाथ धाम के नागेश्वर और मंदार शिखर पर स्थित काशी विश्वनाथ—इन तीन प्रमुख शिवलिंगों से घिरे भूभाग को त्रिलिंग क्षेत्र कहा जाता है. सनातन परंपरा में इस क्षेत्र को शिव आराधना की दृष्टि से विशेष पवित्र माना गया है.

भगवान मधुसूदन के प्रेम में शिवलिंग स्थापना की मान्यता

पौराणिक कथा के अनुसार भगवान शिव ने मंदार पर्वत को अपनी वासस्थली बनाया था. मान्यता है कि काशी लौटने से पहले भगवान शिव ने भगवान मधुसूदन के प्रति प्रेम और स्नेह के कारण मंदार पर्वत के शिखर पर अपने हाथों से शिवलिंग की स्थापना की. यही शिवलिंग कालांतर में काशी विश्वनाथ के नाम से प्रसिद्ध हुआ.

पर्वत की ऊंचाई पर स्थित काशी विश्वनाथ मंदिर तक पहुंचने के लिए श्रद्धालु सीढ़ियों के रास्ते शिखर तक जाते हैं और भगवान शिव का दर्शन-पूजन करते हैं.

मंदार पर्वत पर करीब एक दर्जन शिवलिंग

मंदार की धार्मिक विशेषता केवल काशी विश्वनाथ तक सीमित नहीं है. पर्वत के अलग-अलग हिस्सों में करीब एक दर्जन शिवलिंग श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र हैं. पर्वत की तराई में स्थित अर्धनारीश्वर शिवलिंग भी विशेष धार्मिक महत्व रखता है. मान्यता है कि मंदार पर्वत पर देवी-देवताओं का वास है.

समुद्र मंथन की कथा से भी जुड़ा है मंदार

मंदार पर्वत का संबंध समुद्र मंथन की पौराणिक कथा से भी जोड़ा जाता है. मान्यता है कि मंदराचल पर्वत को मथनी बनाकर समुद्र मंथन किया गया था. समुद्र मंथन से निकले विष को भगवान शिव ने ग्रहण किया और नीलकंठ कहलाए. इस वजह से भी मंदार का संबंध शिव आराधना से गहरा माना जाता है.

सावन में गूंजता है हर-हर महादेव

सावन के महीने में मंदार पर्वत पर शिवभक्तों की भीड़ बढ़ जाती है. दूर-दराज से श्रद्धालु काशी विश्वनाथ समेत पर्वत पर स्थित अन्य शिवलिंगों का दर्शन और जलाभिषेक करने पहुंचते हैं. हर-हर महादेव और बोल बम के जयघोष से पूरा मंदार भक्तिमय हो उठता है.

धार्मिक मान्यताओं, त्रिलिंग क्षेत्र की अवधारणा और समुद्र मंथन से जुड़े पौराणिक प्रसंगों के कारण मंदार पर्वत आज भी बिहार की प्राचीन आध्यात्मिक परंपरा का महत्वपूर्ण केंद्र बना हुआ है.

फोटो कैप्शन :मंदार पर्वत,पर्वत शिखर स्थित काशी विश्वनाथ मंदिर और शिवलिंग     | Prabhat Khabar Network
फोटो कैप्शन :मंदार पर्वत,पर्वत शिखर स्थित काशी विश्वनाथ मंदिर और शिवलिंग  | Prabhat Khabar Network


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