184 आंगनबाड़ी केंद्रों पर दो माह से बंद पोषाहार, 20 हजार महिलाओं और बच्चों के सामने पोषण का संकट

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फोटो- बाराहाट सीडीपीओ चंदन कुमार

बांका के 184 आंगनबाड़ी केंद्रों पर पिछले दो महीनों से पोषाहार वितरण ठप है, जिससे करीब 18 से 20 हजार गर्भवती महिलाओं, धात्री माताओं और छोटे बच्चों के पोषण पर गंभीर संकट मंडरा रहा है. सरकारी फंड की कमी के कारण ये लाभुक परेशान हैं और उन्हें अपने स्तर पर खाद्य सामग्री का प्रबंध करना पड़ रहा है.

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बांका, बाराहाट. प्रखंड की 184 आंगनबाड़ी केंद्रों पर पिछले दो माह से पोषाहार वितरण बंद है. विभाग की ओर से सरकारी फंड उपलब्ध नहीं होने का हवाला दिया जा रहा है. इसका सीधा असर करीब 18 से 20 हजार लाभुकों पर पड़ रहा है. इनमें गर्भवती महिलाएं, धात्री माताएं और छोटे बच्चे शामिल हैं. जिन परिवारों के लिए आंगनबाड़ी केंद्र से मिलने वाला पोषाहार पोषण का महत्वपूर्ण सहारा था, उन्हें अब अपने स्तर पर खाद्य सामग्री की व्यवस्था करनी पड़ रही है.

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दो महीने से आंगनबाड़ी केंद्रों से खाली हाथ लौट रहे लाभुक

विभागीय आंकड़ों के अनुसार प्रत्येक आंगनबाड़ी केंद्र पर गर्भवती और धात्री महिलाओं के साथ स्कूल पूर्व शिक्षा से जुड़े बच्चों और अन्य पात्र लाभुकों को पोषाहार तथा टीएचआर उपलब्ध कराया जाता है. बाराहाट प्रखंड में ऐसे 184 केंद्र संचालित हैं. सभी केंद्रों को मिलाकर लाभुकों की संख्या करीब 18 से 20 हजार बताई जा रही है.

पिछले दो माह से पोषाहार वितरण नहीं होने के कारण इन परिवारों की परेशानी लगातार बढ़ रही है. खासकर आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के लिए बच्चों और महिलाओं के लिए पौष्टिक भोजन की अतिरिक्त व्यवस्था करना मुश्किल हो रहा है.

फंड के आगे ठप हुई पोषण व्यवस्था, उठ रही जवाबदेही पर सवाल

आंगनबाड़ी केंद्रों के माध्यम से जरूरतमंद परिवारों की महिलाओं और बच्चों को पोषण उपलब्ध कराने की योजना संचालित की जाती है. इसका उद्देश्य गर्भवती महिलाओं, धात्री माताओं और छोटे बच्चों को आवश्यक पोषण उपलब्ध कराना है. लेकिन फंड उपलब्ध नहीं होने के कारण दो माह से वितरण व्यवस्था ठप है. स्थिति को लेकर सवाल उठ रहा है कि जब योजना से हजारों लाभुक जुड़े हैं तो लगातार दो माह तक पोषाहार वितरण बंद रहने की स्थिति क्यों बनी. यदि सरकारी फंड समय पर उपलब्ध नहीं होता है तो इसका असर सीधे उन परिवारों पर पड़ता है, जो पहले से ही आर्थिक रूप से कमजोर हैं.

बाजार से खाद्य सामग्री खरीदने का बढ़ा अतिरिक्त बोझ

लाभुकों का कहना है कि आंगनबाड़ी केंद्र से मिलने वाले पोषाहार से परिवारों को काफी राहत मिलती थी. बच्चों और महिलाओं के लिए पौष्टिक भोजन की व्यवस्था करना आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के लिए पहले से ही चुनौती है. ऐसे में दो माह से पोषाहार नहीं मिलने के कारण उन्हें बाजार से खाद्य सामग्री खरीदनी पड़ रही है. इससे परिवारों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ रहा है. कई परिवारों के लिए रोजमर्रा की जरूरतों के साथ बच्चों और महिलाओं के पोषण की अलग से व्यवस्था करना आसान नहीं है.


लाभुक चांदनी कुमारी
लाभुक चांदनी कुमारी

लाभुकों ने कहा, दो माह से इंतजार के बाद भी नहीं मिला पोषाहार

लाभुक स्वीटी कुमारी, मोना कुमारी और चांदनी कुमारी ने बताया कि आंगनबाड़ी केंद्र से मिलने वाला पोषाहार उनके परिवार के लिए काफी मददगार था. पिछले दो माह से पोषाहार नहीं मिलने के कारण परेशानी बढ़ गई है. उन्होंने बताया कि जरूरतमंद परिवारों के लिए बच्चों और महिलाओं के पोषण की अतिरिक्त व्यवस्था करना मुश्किल हो रहा है. लाभुकों को उम्मीद है कि जल्द से जल्द पोषाहार वितरण दोबारा शुरू किया जाएगा.

सीडीपीओ बोले, सरकार के पास फिलहाल फंड उपलब्ध नहीं

मामले को लेकर बाल विकास परियोजना पदाधिकारी चंदन कुमार ने बताया कि सरकार के पास फिलहाल फंड उपलब्ध नहीं है. इसी वजह से आंगनबाड़ी केंद्रों पर पोषाहार वितरण नहीं हो पाया है. उन्होंने कहा कि जैसे ही फंड उपलब्ध होगा, आंगनबाड़ी केंद्रों पर पोषाहार वितरण सुनिश्चित कराया जाएगा. विभाग की ओर से फंड उपलब्ध होने का इंतजार किया जा रहा है.

फंड आने तक कैसे पूरी होगी हजारों लाभुकों की पोषण जरूरत

आंगनबाड़ी केंद्रों पर दो माह से पोषाहार वितरण बंद होने के बाद अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि फंड आने तक हजारों लाभुकों की पोषण जरूरतें कैसे पूरी होंगी. योजना का उद्देश्य ही जरूरतमंद महिलाओं और बच्चों को पोषण सुरक्षा उपलब्ध कराना है. ऐसे में लंबे समय तक पोषाहार वितरण बाधित रहने से योजना के उद्देश्य पर असर पड़ रहा है. ग्रामीण परिवारों को अब इंतजार है कि सरकार की ओर से फंड कब जारी होता है और 184 आंगनबाड़ी केंद्रों पर पोषाहार वितरण व्यवस्था कब दोबारा शुरू होती है.



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