चांदन के पारडीह प्राथमिक विद्यालय में दो कमरों में चल रही पांच कक्षाएं, 45 बच्चों की पढ़ाई पर संकट

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फोटो- पारडीह स्कूल | Prabhat Khabar Network

चांदन के पारडीह प्राथमिक विद्यालय की हालत दयनीय है. महज दो कमरों में प्रथम से पंचम वर्ग तक के 45 बच्चों को पढ़ाया जा रहा है, और एक हिस्से में कार्यालय भी चल रहा है. यह स्थिति बच्चों की शिक्षा और सुरक्षा दोनों पर भारी पड़ रही है.

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चांदन (बांका). चांदन प्रखंड क्षेत्र के चांदन पंचायत स्थित प्राथमिक विद्यालय पारडीह वर्तमान में महज दो कमरों में सिमटा हुआ है. विद्यालय में प्रथम से पंचम वर्ग तक कुल 45 बच्चे नामांकित हैं, जिनकी पढ़ाई दो कमरों में जैसे-तैसे करायी जा रही है. स्थिति यह है कि एक कमरे के आधे हिस्से में कार्यालय का संचालन भी करना पड़ रहा है. ऐसे में पांच कक्षाओं के बच्चों को पढ़ाने के साथ कार्यालय चलाना शिक्षकों के लिए बड़ी चुनौती बना हुआ है. गुणवत्तापूर्ण शिक्षा को लेकर किये जा रहे सरकारी दावों के बीच विद्यालय की यह स्थिति बुनियादी सुविधाओं पर सवाल खड़े कर रही है.

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1960 में रखी गयी थी विद्यालय की नींव

प्रखंड मुख्यालय से करीब दो किलोमीटर की दूरी पर सुल्तानगंज-देवघर मुख्य मार्ग के किनारे स्थित इस विद्यालय की नींव वर्ष 1960 में रखी गयी थी. स्थानीय निवासी खादीधारी चौधरी ने विद्यालय के लिए जमीन दान में दी थी. इसके बाद वर्ष 1972 में विद्यालय में एक कमरे का निर्माण कराया गया.

समय के साथ भवन की स्थिति खराब हो गयी. करीब तीन दशक पहले दो कमरों का निर्माण कराया गया, लेकिन इसके बाद विद्यालय में भवन विस्तार की दिशा में कोई ठोस पहल नहीं हो सकी. नतीजतन आज भी दो कमरों में ही कार्यालय और बच्चों की पढ़ाई का काम चल रहा है.

दो कमरों में पांच कक्षाओं का संचालन

विद्यालय में प्रथम से पंचम वर्ग तक कुल 45 बच्चे नामांकित हैं. इनके लिए चार शिक्षक नियुक्त हैं. इनमें तीन महिला शिक्षक और एक पुरुष शिक्षक शामिल हैं. पर्याप्त शिक्षक होने के बावजूद भवन की कमी के कारण एक साथ पांच कक्षाओं का संचालन करना मुश्किल हो रहा है. एक कमरे के आधे हिस्से में कार्यालय चलने के कारण पढ़ाई के लिए उपलब्ध जगह और कम हो जाती है. इससे बच्चों और शिक्षकों दोनों को परेशानी का सामना करना पड़ता है.

बरामदे और खुले मैदान में करना पड़ता है भोजन

विद्यालय में रसोईघर, शौचालय और पेयजल की व्यवस्था उपलब्ध है, लेकिन भवन और चहारदीवारी की कमी अब भी बनी हुई है. मध्यान्न भोजन के समय बच्चों को खुले मैदान अथवा विद्यालय के बरामदे में बैठकर भोजन करना पड़ता है. ग्रामीणों का कहना है कि बच्चों की संख्या और कक्षाओं को देखते हुए विद्यालय में अतिरिक्त कमरों का निर्माण बेहद जरूरी है. कई बार भवन निर्माण की मांग उठाये जाने के बावजूद अब तक स्थिति में बदलाव नहीं आया है.

मुख्य सड़क के किनारे स्कूल, बच्चों की सुरक्षा भी चिंता

विद्यालय सुल्तानगंज-देवघर मुख्य मार्ग के किनारे स्थित है. ऐसे में चहारदीवारी का नहीं होना बच्चों की सुरक्षा को लेकर भी चिंता का विषय बना हुआ है. विद्यालय परिसर और मुख्य सड़क के बीच सुरक्षा व्यवस्था मजबूत नहीं होने से अभिभावकों को भी बच्चों की सुरक्षा की चिंता रहती है.

ग्रामीणों का कहना है कि विद्यालय के लिए अतिरिक्त भवन और चहारदीवारी का निर्माण होने से बच्चों को सुरक्षित और बेहतर शैक्षणिक वातावरण मिल सकेगा.

अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों को दी गयी जानकारी

विद्यालय की प्रधान शिक्षिका प्रीति कुमारी ने बताया कि विद्यालय भवन की समस्या को लेकर पूर्व बीईओ को भी लिखित आवेदन दिया गया था. वर्तमान में बीपीआरओ सह प्रभारी प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी, चांदन और स्थानीय जनप्रतिनिधियों को भी समस्या से अवगत कराया जा चुका है.

उन्होंने बताया कि विद्यालय में भवन की कमी के कारण दो कमरों में पांच कक्षाओं का संचालन और कार्यालय चलाने में काफी परेशानी होती है. कई बार समस्या से अवगत कराने के बावजूद अब तक भवन निर्माण की दिशा में कोई ठोस पहल नहीं हुई है.

भवन निर्माण की उम्मीद में ग्रामीण

ग्रामीणों और विद्यालय के शिक्षकों को उम्मीद है कि विभाग विद्यालय की मौजूदा स्थिति का संज्ञान लेकर जल्द अतिरिक्त कमरों का निर्माण करायेगा. साथ ही मुख्य सड़क के किनारे स्थित विद्यालय में बच्चों की सुरक्षा को देखते हुए चहारदीवारी का निर्माण भी कराया जायेगा. इससे 45 बच्चों को पढ़ाई के लिए पर्याप्त जगह और सुरक्षित वातावरण मिल सकेगा.

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