सूर्यदेव का नवग्रहों में है सम्राट का स्थान

Published at :04 Nov 2016 6:37 AM (IST)
विज्ञापन
सूर्यदेव का नवग्रहों में है सम्राट का स्थान

जगत में प्रकाश, ज्ञान, उर्जा, उष्मा व जीवन शक्ति करते हैं प्रदान कटोरिया : पृथ्वी से लगभग 24 करोड़ मील दूर रहने वाले साक्षात देवता सूर्य को सृष्टि का गति दाता कहा गया है. जो जगत में प्रकाश, ज्ञान, उर्जा, उष्मा व जीवन शक्ति प्रदान करने वाला है. वेद पुराणों में सूर्य को आयु, बुद्धि, […]

विज्ञापन

जगत में प्रकाश, ज्ञान, उर्जा, उष्मा व जीवन शक्ति करते हैं प्रदान

कटोरिया : पृथ्वी से लगभग 24 करोड़ मील दूर रहने वाले साक्षात देवता सूर्य को सृष्टि का गति दाता कहा गया है. जो जगत में प्रकाश, ज्ञान, उर्जा, उष्मा व जीवन शक्ति प्रदान करने वाला है. वेद पुराणों में सूर्य को आयु, बुद्धि, ज्ञान, विद्या, आरोग्यता, आत्मबल, ज्योति, मार्गदर्शक, प्रकृति को गति, संतुलन तथा जीवन शक्ति देने वाला एवं रोगाणु, कीटाणु, पिशाच, भूत आदि का नाशक कहा गया है. सूर्य नवग्रहों (सूर्य, चंद्रमा, मंगल, बुध, बृहस्पति, शुक्र, राहु, केतु व शनि) में सम्राट का स्थान रखता है.
ज्योतिष शास्त्र सूर्य को काल पुरूष की आत्मा मानता है. अर्थशास्त्र सूर्य को भौतिक देवत्रैय में प्रतिष्ठापित करता है. (जिस प्रकार ब्रम्हा, विष्णु व महेश तीन अभौतिक महादेव हैं, उसी प्रकार सूर्य, अग्नि व चंद्र तीन भौतिक देव कहे गये हैं.) जो न केवल त्रिगुण सतरज, तम के सूचक हैं, बल्कि संसार की मात्र तीन शक्तियों (ज्ञान शक्ति, क्रिया शक्ति व इच्छा शक्ति) के स्थायी होने से उत्पत्ति, स्थिति व प्रलय के कर्ता भी हैं. यह सभी जानते हैं कि कोई भी कार्य बिना इन तीन शक्तियों ज्ञान,
क्रिया व इच्छा के संपन्न ही नहीं हो सकता. इसमें भी सूर्य का महत्व स्पष्ट हो जाता है. सूर्य ही काल का नियामक भी है. रात, दिन, ऋतु, वर्ष, संवत, दर आदि समय मापन के घटक या अवस्थाएं सूर्य पर ही आश्रित हैं. वेदों ने इसलिए सांकेतिक रूप में सूर्य रथ को सात घोड़े, तीन नेमियों व चौबीस अरों वाला एक पहिया कहा है. सूर्य रथ को अबाध व अविराम भी कहा गया है. स्पष्ट है कि भूत, भविष्य, वर्तमान (तीन नेमियों) व चौबीस घंटों (अरों) वाला एक पहिया ही समय है तथा सूर्य के सात घोड़े सात दिनों (जिस पर समय चलता है) तथा प्रकाश किरणों के सात रंगों का एक ही प्रतिनिधित्व करता है.
उग्र और अग्नि प्रधान हैं सूर्य
पौराणिक दृष्टि से सूर्य कश्यप ऋषि द्वारा उत्पन्न हुए हैं. जैसा कि सूर्याष्टक में कहा गया है. ज्योतिष शास्त्र के अनुसार सूर्य उग्र और अग्नि प्रधान हैं. इसका लिंग पुरूष, जाति क्षत्रिय, वर्ण लाल है. आकार चोकोर, नेत्र मधुपिंगल, दृष्टि तीक्ष्ण, केश सुनहरे, उष्ण व रूक्ष होने से प्रवृत्ति पित्त प्रधान तथा सप्तगुणी है. ऐसी मान्यता है कि सूर्य की पत्नी छाया है और इसके दो पुत्र यमराज व महाबलि हैं.
विज्ञापन
Prabhat Khabar Digital Desk

लेखक के बारे में

By Prabhat Khabar Digital Desk

यह प्रभात खबर का डिजिटल न्यूज डेस्क है। इसमें प्रभात खबर के डिजिटल टीम के साथियों की रूटीन खबरें प्रकाशित होती हैं।

Prabhat Khabar App :

देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए

Download from Google PlayDownload from App Store
विज्ञापन