विवादित बालू घाटों पर अनहोनी की आशंका

Published at :25 Jan 2016 3:58 AM (IST)
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विवादित बालू घाटों पर अनहोनी की आशंका

बांका : जिले में चांदन नदी के बालू घाट आम जनजीवन के लिए सिरदर्द बने हुए है. लगभग रोज ही इन घाटों पर सिर फुटौव्वल की स्थिति बनी हुई है. मामूली झड़पों से लेकर हत्या तक की घटनाएं इन घाटों पर होती रही हैं. यह सिलसिला जारी हैं. इन्हें लेकर आम जनजीवन अशांत एवं सशंकित […]

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बांका : जिले में चांदन नदी के बालू घाट आम जनजीवन के लिए सिरदर्द बने हुए है. लगभग रोज ही इन घाटों पर सिर फुटौव्वल की स्थिति बनी हुई है. मामूली झड़पों से लेकर हत्या तक की घटनाएं इन घाटों पर होती रही हैं. यह सिलसिला जारी हैं. इन्हें लेकर आम जनजीवन अशांत एवं सशंकित है. लेकिन पता नहीं क्यों, प्रशासन इन सबसे बेखबर हैं. वैसे प्रभावित तबके का मानना है कि प्रशासन जान बूझ कर इस ओर से बेखबर होने का अभिनय कर रहा है.

इधर एक सप्ताह से जिले के बांकी से लेकर जेठौर घाट तक तनाव की स्थिति बनी हुई हैं. इन घाटों पर इस दौरान कई बार सिर फुटौव्वल एवं गोलीबारी की घटनाएं भी हुई. एकाध मामले को छोड़ कर आम तौर पर पुलिस इन वारदातों की पुष्टि भी नहीं करती. इसके पीछे वजह चाहे जो हो, लेकिन पुलिस इस अनदेखी की वजह से इन वारदातों की बारंबारता इधर काफी बढ़ गयी है.
पिछले तीन दिनों से एक अन्य विवाद में बालू माफियाओं एवं ग्रामीणों को आमने – सामने ला खड़ा किया है.
यह मामला है बालू लदे ट्रकों के परिचालन के रूट का. बांकी घाट से बालू उठा कर निकलने वाले ट्रक पहले नयाडीह होकर पुनसिया में भागलपुर – दुमका मुख्य मार्ग पर निकलते थे, लेकिन कुछ रोज पूर्व नयाडीह के पास हुई मारपीट एवं गोलीबारी की घटना के बाद ग्रामीणों ने इस होकर चलने वाली बालू लोड ट्रकों का आना जाना रोक दिया. तबसे ट्रक माफियाओं के साथ मिल कर बालू घाटों से ताल्लुक रखने वाले कुछ ग्रामीण इन ट्रकों को विन्डी, मुड़हारा, बाघाकोल होकर शंकरपुर में बांका – ढाकामोड़ मार्ग पर निकालने का प्रयास करने लगे. हालांकि क्षेत्र के ग्रामीणों ने इसका विरोध किया.
जिससे दोनों पक्षों में तनातनी की स्थिति उत्पन्न हो गयी. इस मसले को लेकर क्षेत्र में कभी भी अनहोनी की आशंका कायम हो गयी है और आम अमनपसंद ग्रामीण सशंकित है. उनके रातों की नींद हराम है. लोग रतजगा करने पर विवश है. ग्रामीणों ने शनिवार को बांका दौरे पर पहुंचे ग्रामीण विकास मंत्री श्रवण कुमार को भी अपनी पीड़ा और आशंकाओं से अवगत कराया. लेकिन होना क्या है यह सिर्फ ग्रामीण ही जानते है. वे निराश है. अगर शीघ्र पुलिस और प्रशासन इस दिशा में सतर्क और सचेष्ट नहीं हुए तो इलाके में कभी भी किसी अनहोनी से इनकार नहीं किया जा सकता.
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