क्षेत्र का धरोहर है पौराणिक दुर्गा मंदिर

Published at :01 Nov 2015 9:43 PM (IST)
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क्षेत्र का धरोहर है पौराणिक दुर्गा मंदिर

क्षेत्र का धरोहर है पौराणिक दुर्गा मंदिर फोटो 1 बांका 7 : तिलडीहा दुर्गा मंदिर में पूजा अर्चना के लिए पहुंचे श्रद्धालु ठाकुर विनोद सिंह, शंभुगंज बांका जिला एवं मुंगेर जिला के सीमावर्ती क्षेत्र अंतर्गत प्रखंड क्षेत्र के छत्रहार पंचायत के हरवंशपुर गांव में स्थापित तिलडीहा दुर्गा मंदिर पूर्वी बिहार के साथ- साथ अन्य राज्यों […]

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क्षेत्र का धरोहर है पौराणिक दुर्गा मंदिर फोटो 1 बांका 7 : तिलडीहा दुर्गा मंदिर में पूजा अर्चना के लिए पहुंचे श्रद्धालु ठाकुर विनोद सिंह, शंभुगंज बांका जिला एवं मुंगेर जिला के सीमावर्ती क्षेत्र अंतर्गत प्रखंड क्षेत्र के छत्रहार पंचायत के हरवंशपुर गांव में स्थापित तिलडीहा दुर्गा मंदिर पूर्वी बिहार के साथ- साथ अन्य राज्यों में भी प्रसिद्ध है. यहां कृष्ण, काली, भगवती की अराधना के लिए लोग आते हैं. दुर्गा मंदिर में नवरात्र के अवसर पर कई राज्य के श्रद्धालु व तांत्रिक पहुंचते हैं. मंदिर की स्थापना 1603 ई में बंगाल के नदिया शांतिपुरा जिले के दास पोसा गांव के साधक पंडित हरवल्लव दास ने तांत्रिक पद्धति से की थी. 108 नरमुंड पर मां भगवती के मंदिर की स्थापना की थी. मंदिर के दक्षिणी छोर पर कल्लू बाबा का स्थान है, जहां सिधिया श्मशान घाट है. मंदिर के मेढ़पति एवं अन्य स्थानीय लोगों द्वारा कहा जाता है कि बंगाल राज्य के दास पोसा गांव में हरिवल्लव दास एवं हरवल्लव दास दो भाई रहते थे. बड़ा भाई हरिवल्लव दास पूजा पाठ कर अपने परिसर का भरण पोषण करते थे, लेकिन छोटा भाई हरवल्लव दास दिन रात तंत्र मंत्र की सिद्धि और भगवती के पूजा में लगे रहते थे. किसी भी प्रकार से धन उपार्जन नहीं करते थे, जिससे परिवार का भरण पोषण हो सकें. दोनों भाई में विवाद हुआ. छोटा भाई जो अविवाहित थे भगवती का नाम लेकर घर से अनजान जगह यह मन में सोच कर निकल गये कि मैया तुम जहां कहोगी वहीं अब रहेंगे. कई महीने चलते चलते हरवल्लव दास गंगा किनारे सुलतानगंज से दक्षिण दिशा में चला तो इनको मालूम हुआ कि दक्षिण दिशा में शंकर बाबा का मंदिर बाबा बैद्यनाथ धाम है. बैद्यनाथ जाने के लिए सुलतानगंज से निकला तो रास्ते में तारापुर मिला जहां रात्रि विश्राम करने रूक गये. रूकने के बाद उन्हें जानकारी मिला कि तारापुर के मोहनगंज और धौनी में कुछ बंगाल से आकर बंगाली कायस्थ बसे है. हरवल्लव इन परिवारों से मिल कर भगवती की स्थापना करने की बात कही. लेकिन पूर्व में ही दोनों जगह भगवती एवं काली मंदिर का स्थापना हो चुका था. आखिरकार पंडित सुबह जब तारापुर से पूर्व की ओर निकले तो पूर्व में बदुआ नदी मिला तथा नदी के पूर्वी किनारा पर कल्लू बाबा एवं सिंधिया श्मशान घाट को देख कर भगवती के मंदिर का स्थापना करने को सोचा वहीं पंडित हरवल्लव दास को रात में मां भगवती ने स्वप्न दिया कि इसी श्मशान घाट पर मेरा स्थापना करो हम आ रहे है. उन्होंने महातांत्रिक बाबा आचार्य महेशानंद शर्मा को अपना गुरु मान कर तांत्रिक विधि से मां भगवती का स्थापना कर पूजा अर्चना शुरू किया और अपना विवाह भी मोहनगंज में कर लिया. आज भी पंडित हरवल्लव दास के वंशज ही भगवती मंदिर में मेढ़पति है और तांत्रिक आचार्य महेशानंद शर्मा के वंशज मंदिर में पूजारी है. पूर्व में मंदिर का रूप छोटा था, लेकिन ज्यों – ज्यों इस मंदिर की ख्याति मिलते गया है और श्रद्धालुओं के मनोकामना पूर्ण होते गये इस मंदिर का रुप भी बदलते गया. अब तो शारदीय नवरात्रा के बाद भी मंगलवार एवं शनिवार को श्रद्धालुओं की अपार भीड़ पूजा अर्चना के लिए लगा रहता है. मंदिर के वर्तमान मेढ़पति योगेश चंद्र दास है. यहां शारीदय नवरात्रा के अवसर पर प्रत्येक दिन मां भगवती के पूजा पाठ करने का अलग – अलग विधि है. अभी भी माता का गर्भ गृह और पिंड मिट्टी का बना हुआ है. हालांकि मंदिर के बाहर चारों तरफ श्रद्धालुओं द्वारा किये गये दास से पक्कीकरण कर मंदिर को विशाल रूप दिया गया . इस मंदिर में वर्ष के कुछ महीना छोड़ कर पाठा का बलि दिया जाता है. क्षेत्र के साथ – साथ अगल बगल क्षेत्र के आमजनों द्वारा इसे पर्यटक स्थल घोषित करने की मांग कई बार उठाया गया, लेकिन आज तक आमजनों की मांग सरकार द्वारा नहीं किया गया. अगर इस जगह को पर्यटन स्थल घोषित कर दिया जाता तो क्षेत्र के साथ – साथ आस-पास के दूसरे जिले के आमजनों की रोजी रोटी में बढ़ावा मिलता. यहां आने के लिए दूसरे राज्य के लोग रेलवे स्टेशन सुलतानगंज में उतर कर सड़क मार्ग से तारापुर होते हुए दुर्गा मंदिर आते है. वहीं बांका से आने वाले श्रद्धालु बांका से सड़क मार्ग से शंभुगंज होते हुए मंदिर परिसर तक जाते है. करंट से ऑटो चालक की मौतशंभुगंज. थाना क्षेत्र के मिर्जापुर पंचायत अंतर्गत मिर्जापुर गांव के उमेश साह के पुत्र कन्हाई साह की मौत करंट लगने से हो गयी. कन्हाई अपना ऑटो चलाता था. रविवार को गुन्नथ गांव अपने ऑटो से समान पहुंचाने गया था. ऑटो पर रखे आटे का बोरा उतारने के क्रम में वहां से गुजर रहे ग्यारह हजार वोल्ट के तार की चपेट में आने से घटना स्थल पर ही उसकी मौत हो गयी. कन्हाई की मौत से घर में कोहराम मच गया.

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