...तो कटोरे का धान लील जायेंगे बालू माफिया

Published at :30 Oct 2015 8:59 PM (IST)
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...तो कटोरे का धान लील जायेंगे बालू माफिया

…तो कटोरे का धान लील जायेंगे बालू माफियानदी से बालू के अवैध उत्खनन के कारण गहरी हो रही नदीनदी में अधिक गड्ढे की वजह से नहर में नहीं आ पाता है पानीनहर में पानी नहीं आने से धान की खेती में होती है परेशानीसिंचाई के लिए पंप सेट का ही रहता है सहाराडीजल अनुदान नहीं […]

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…तो कटोरे का धान लील जायेंगे बालू माफियानदी से बालू के अवैध उत्खनन के कारण गहरी हो रही नदीनदी में अधिक गड्ढे की वजह से नहर में नहीं आ पाता है पानीनहर में पानी नहीं आने से धान की खेती में होती है परेशानीसिंचाई के लिए पंप सेट का ही रहता है सहाराडीजल अनुदान नहीं मिल पाने से परेशान हैं किसानप्रतिनिधि, अमरपुरधान का कटोरा कहे जाने वाले अमरपुर को इन दिनों बालू माफिया की बुरी नजर लग गयी है. मालूम हो कि अमरपुर प्रखंड के किसानों के खेतों की सिंचाई चांदन व बिलासी नदी पर आधारित है. लेकिन इन नदियों से बालू माफिया द्वारा अनवरत अवैध बालू का उत्खनन किया जा रहा है. इससे नहर में पर्याप्त पानी नहीं आ पाता. धान की सिंचाई नहीं हो पाती है. इससे धान की फसल सूख रही है. इसका दंश यहां के किसान झेल ही रहे हैं. साथ ही राजस्व की चोरी से सरकार को भी नुकसान हो रहा है. कई गांवों के किसान होते हैं प्रभावितमालूम हो कि क्षेत्र के मादाचक, मालदेयचक, तारडीह, रूपसा, भदरिया, विरमा, वासुदेवपुर सहित अन्य घाटों से अवैध बालू का उठाव जारी है. बालू उठाव के कारण नदी का जल स्तर काफी नीचे चले जाने के कारण किसानों के समक्ष सिंचाई का मुकम्मल व्यवस्था नहीं हो पा रही है. सिंचाई सुविधा मुकम्मल न होने के चलते किसान हताश हो रहे हैं. इस वर्ष धान में बाली पर बारिश नहीं होने से किसान पहले से ही मायूस हैं. प्रशासन से किसानों ने मांगा सहयोगबांका जिले में किसानों के खेतों तक पानी पहुंचाने के लिए तीन डैम मौजूद है. बावजूद इसके किसानों के खेतों तक नहर के माध्यम से पानी नहीं पहुंच पा रहा है. किसान अपने फसल के उत्पादन को लेकर काफी चिंतित हैं. किसान राघवेंद्र पंजियारा, संजय वैद्य, कुमार बलवंत सिंह, निरंजन कुमार, मिथलेश कुमारी, कपिल कापरी सहित अन्य किसानों ने बताया कि यदि चांदन नदी से अवैध बालू उठाव को बंद कर दिया जाये, तो आने वाले समय में किसानों के खेतों तक सिंचाई के लिए पानी पहुंच सकता है. लेकिन इस दिशा में सरकार को ठोस कदम उठाने की जरूरत है. साथ ही स्थानीय प्रशासन को इस दिशा में कार्रवाई करने की भी जरूरत है.

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