बूंद-बूंद पानी के लिए भटकते हैं ग्रामीण
Edited by Prabhat Khabar Digital Desk
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बांका: कहते हैं कि जल ही जीवन है लेकिन यहां लैया समुदाय के लोगों के सामने जल की घनघोर समस्या है. ग्रामीणों को पीने का पानी नहीं मिल रहा है. ग्रामीणों ने कहा कि यहां पर पशुपालन मंत्री के पद पर रहते हुए वर्तमान विधायक राम नारायण मंडल ने एक चापाकल दिया था लेकिन वह […]
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बांका: कहते हैं कि जल ही जीवन है लेकिन यहां लैया समुदाय के लोगों के सामने जल की घनघोर समस्या है. ग्रामीणों को पीने का पानी नहीं मिल रहा है. ग्रामीणों ने कहा कि यहां पर पशुपालन मंत्री के पद पर रहते हुए वर्तमान विधायक राम नारायण मंडल ने एक चापाकल दिया था लेकिन वह अब खराब हो चुका है. मामला बांका थाना क्षेत्र के कदरसी टोला भतकुंडी का है. जहां के गरीब व असहाय लोग पीने के पानी के लिए दर ब दर की ठोकर खाते हैं. इस गांव में आदमी तो दूर यहां के पशुओं को भी पानी नहीं मिल रहा है. ग्रामीणों का कहना है कि अगर इस गांव में आग लग जायेगी तो उसको बुझाने के लिए पानी नहीं मिलेगा.
ग्रामीण बताते हैं कि पास के विद्यालय से पानी लाकर पीना पड़ता है. सरकार दावा कर ले कि गरीबों को लिए तरह-तरह की योजना चलायी जा रही है लेकिन यहां ये दावे पुख्ता नहीं है. गरीबों को योजना का लाभ मिल पा रहा है. मालूम हो कि प्रखंड क्षेत्र अंतर्गत करमा पंचायत के भतकुंडी कदरसी टोला में जहां पांच सौ से अधिक की आबादी वाले यह टोला है. जिसमें एक भी चापाकल की सुविधा लोगों को नहीं मिल पा रहा है.
लोग पीने वाले पानी के लिए काफी समय तक इंतजार के बाद पानी को अपने घर ले जाते हैं. यही नहीं इस टोला में पिछले कई साल पूर्व में एक चापाकल का निर्माण स्थानीय मुखिया के द्वारा कराया गया था. जो पिछले कई माह से खराब पड़ा हुआ है.
ग्रामीणों ने चापाकल की मरम्मती कराने के लिए जनप्रतिनिधि सहित विभाग के पदाधिकारी का दरवाजा को खटखटाया. फिर भी खराब पड़े चापाकल की मरम्मती नहीं की गयी. टोला वासी इसके बाद पीने के पानी के लिए टोला के समीप राजकीयकृत बुनियादी विद्यालय भतकुंडी जहां से लोग डर डर कर पाने पी रहे हैं.
इस संबंध में ग्रामीण गोवर्धन लैया, पलटू लैया, सरगुन लैया, नारो लैया, सियाराम लैया, मनोहर लैया, फंटूस भुजार, मनोज लैया, मनको देवी, मो कांता देवी, मंटू लैया, कुसूम देवी, सनचरिया देवी, आशा देवी, रामा देवी, लूखो देवी, रेखा देवी बताया कि पशु पक्षी को पानी पीने में कष्ट नहीं होता है. लेकिन हम लोगों को पानी पीने में कष्ट हो रही है.
विद्यालय के शिक्षक द्वारा विद्यालय से पानी लेने के लिए मना करते है. जिससे हम लोगों को विद्यालय खुलने से पहले ही अपने डब्बा में पानी भर कर रखना पड़ता है. वो भी लोग इस तरह से विद्यालय से पानी लेकर भागते है लगता है कि चोरी कर भाग रहे है. मालूम हो लोग विद्यालय परिसर में लगे चापाकल चार दीवारी के अंदर है. जिसमें दीवार को पार कर लोग पाने निकाल कर बाहर करते है जिसके दीवार के बाहर खड़े दूसरे लोगों ने इस पानी को अपने घर तक पहुंचाने का काम करते है. ग्रामीणों का कहना है कि अगर इस तरह कर रवैया हम लोगों के साथ रहा तो आने वाले गरमी के मौसम में काफी परेशानी का सामना करना पड़ेगा.
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