नव वर्ष पर मंदार में लगेगा सैलानियों का जमावड़ा

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मंदार क्षेत्र में दर्जनों पिकनिक स्पॉट हैं मौजूद बौंसी : प्राकृतिक सौंदर्य एवं मनोरम वादियों से घिरे मंदार पर्वत पर हर वर्ष कि तरह इस वर्ष भी हजारों सैलानी सपरिवार घुमने व पिकनिक का आनंद लेने पहुचेगें. प्रखंड क्षेत्र मे आधे दर्जन से अधिक रमणीक व पुजनीय स्थल हैं. इसी क्रम मे सबसे पहला स्थान […]

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मंदार क्षेत्र में दर्जनों पिकनिक स्पॉट हैं मौजूद
बौंसी : प्राकृतिक सौंदर्य एवं मनोरम वादियों से घिरे मंदार पर्वत पर हर वर्ष कि तरह इस वर्ष भी हजारों सैलानी सपरिवार घुमने व पिकनिक का आनंद लेने पहुचेगें. प्रखंड क्षेत्र मे आधे दर्जन से अधिक रमणीक व पुजनीय स्थल हैं. इसी क्रम मे सबसे पहला स्थान मंदार पर्वत का है. जहां प्रखंड ही नहीं आस-पास के जिले के अलावे अन्य राज्यों के लोग भी यहां आते हैं.
पौराणिक व ऐतिहासिक दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण मंदार पर्वत अपने धर्म, अध्यात्म, अंग बंग कि संस्कृति, ऐतिहासिक एवं मनोरम वादियों के लिए भी जाना जाता है. यहां वैसे तो प्रत्येक माह सैलानियों व श्रद्वालुओं की भीड़ रहती है, लेकिन शीत ऋतु के नवंबर माह के प्रथम सप्ताह से मार्च के प्रथम सप्ताह तक अनवरत सैलानियों का आना लगा रहता है, लेकिन नव वर्ष का प्रथम दिन एवं 14 जनवरी खास होता है. इस दिन पर मंदार पर हजारों हजार की संख्या में श्रद्घालु व सैलानी यहां घुमने व पिकनिक मनाने पहुंचते हैं.
पाप से मिलती है मुक्ति
पुराण के अनुसार मान्यता है कि पापहरणी सरोवर में डुबकी लगाने से पाप से मुक्ति मिलती है. मंदार पर्वत के तराई स्थित पापहरणी में मकर संक्राति के मौके पर लाखों श्रद्घालु आस्था कि डुबकी लगाते हैं. साथ ही वर्ष भर पर्व त्योहार के अवसर पर भी श्रद्घालु पवित्र स्नान करते हैं. वहीं नववर्ष में भी लोग पापहरणी सरोवर में स्नान कर नये साल की शुरूआत करते हैं. इन श्ऱद्घालुओं की माने तो वर्ष भर में किये गये पापों से स्नान के बाद मुक्ति मिल जाती है. मंदार पर्वत पर देखी-अनदेखी दर्जनों गुफाएं है जो सैलानियों को विशेष आकर्षित करती है. इन गुफाओं के अलावे सीताकुण्ड, शंखकुंड, गयाकुंड सहित दर्जनों कुंड है. पर्वत पर मूर्तियों एवं भगAावशेषों का टुकड़ा सैलानियों को आकर्षित करता है. इन सब के अलावे प्रखंड क्षेत्र में गुरुधाम, लखदीपा मंदिर, कामधेनु मंदिर, जैन मंदिर, पिपेश्वरनाथ सहित अन्य रमणीक स्थल हैं.
डैम करता है आकर्षित
60 के दशक में बना यह डैम प्राकृतिक संपदा एवं मनोरम वादियों का अद्भुत क्षेत्र है. प्रखंड मुख्यालय से 25 किमी दूर चांदन नदी पर स्थित लक्ष्मीपुर डैम अद्भुत जल संग्रह व कई रहस्यों को समेटे आज भी सैलानियों को अपनी ओर आकर्षित करता है. प्राकृति प्रेमी व शांति प्रिय लोग नव वर्ष के मौके पर हजारों की संख्या में पिकनिक मनाने यहां आते है. डैम के आस पास यहां काफी पिकनिक स्पॉट है जहां सैलानियों को प्रवास के लिए मशक्कत नहीं करनी पड़ती है.
रतनसार की पहाड़ी
प्रखंड के श्याम बाजार से 6 किमी दूर दर्जनों पहाड़ियों की श्रृंखलाओं की अपनी अलग ही पहचान है. पहाड़ियों के बीचोंबीच से निकली छोटी बड़ी पानी की धारा के साथ हरियाली किसी का भी मन मोह लेती है. बौंसी की मसूरी कही जाने वाली रतनसार पहाड़ पर नये साल के मौके पर लोग वनभोज मनाने आते हैं. वन विभाग के द्वारा भी यहां काफी बड़े पैमाने पर पौधरोपन व छोटे बड़े बांध का निर्माण किया गया है.
भगवान मधुसूदन मंदिर
मंदार क्षेत्र के मधुसूदन मंदिर में नव वर्ष के मौके पर सुबह से ही श्रद्घालुओं की भीड़ उमड़ने लगती है. लोग 1 जनवरी की शुरूआत भगवान मधुसूदन की पूजा अर्चना से करते है. यू तो भगवान मधुसूदन के दर्शन हेतु वर्ष भर श्रद्घालुओं का आना लगा रहता है. नववर्ष के दिन यहां प्रखंड क्षेत्र के अलावे जिले के भी लोग पहुंचते हैं.
महर्षि मेंहीं धाम
बौंसी बाजार से 11 किमी दूर स्थित मनियारपूर में महर्षि मेंहीं आश्रम में नये साल पर इनके अनुयायीयों के अलावे घुमने आये लोगों की भी अच्छी खासी भीड़ रहती है.
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