गरीबों की मत पूछो बात, ऐसे कट रही पूस की रात

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बांका : इस बार की पूस की रात एक कंबल से नहीं कट रही है. लोग अपने ठेहुना को दोनों हाथों से दबा कर सोने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन ठंड है कि कम होने का नाम नहीं ले रही है. शहर के पावर ग्रिड कार्यालय के समीप रहने वाले महादलित परिवार अभी भी […]

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बांका : इस बार की पूस की रात एक कंबल से नहीं कट रही है. लोग अपने ठेहुना को दोनों हाथों से दबा कर सोने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन ठंड है कि कम होने का नाम नहीं ले रही है. शहर के पावर ग्रिड कार्यालय के समीप रहने वाले महादलित परिवार अभी भी किसी रहनुमा की ओर नजर टिकाये हैं.
महादलित परिवार के रंजीत कुमार, रवींद्र कुमार व कलावती देवी ने बताया कि सूप व डलिया बना कर बेचते हैं. इससे कमाई होती है तो दो वक्त की रोटी का जुगाड़ किसी तरह हो पाता है. उन्हें अपना कोई घर नहीं है. झोपड़ी थर्मोकोल के डब्बे से बना हुआ है. पुराने फटे कंबल के सहारे पूस की रात कट रही है. कलावती देवी ने कहा कि सुना है गरीब गुरबों को जाड़ से बचाने के लिए सामाजिक संगठन या प्रशासनिक अधिकारियों द्वारा कंबल भी बांटा जाता है. शायद इस मुहल्ले के गरीब भी किसी दानवीर की बाट जोह रहे हैं.
रैन बसेरा में चल रहा है जिला परिषद कार्यालय
गरीबों और बेसहारों के लिए रात गुजारने के लिए रैन बसेरा में इस वक्त जिला परिषद कार्यालय चल रहा है. हालांकि जिला परिषद का अपना कार्यालय निर्माणाधीन है. कुछ माह में यह अपने कार्यालय में शिफ्ट कर जायेगा लेकिन इस वक्त जिला प्रशासन को कोई न कोई व्यवस्था करनी चाहिए.
अलाव के लिए जिले से नहीं मिला है निर्देश
फुल्लीडुमर प्रतिनिधि के अनुसार, प्रखंड अंतर्गत किसी भी चौक-चौराहों पर अलाव की व्यवस्था नहीं की गयी है. शीतलहर में ठिठुर रहे लोगों ने कई बार संबंधित पदाधिकारी से अलाव जलाने की मांग की है. इस संबंध में अंचल अधिकारी मोतीलाल पासवान एवं अंचल निरीक्षक ने बताया कि जिले के वरीय पदाधिकारियों एवं सरकार का कोई ऐसा निर्देश नहीं मिला है. आदेश मिलते ही अलाव की व्यवस्था की जायेगी.
ठंड से बच्चे हो गये परेशान
रजौन प्रतिनिधि के अनुसार, पछुआ हवा चलने के साथ ही सोमवार से प्रखंड जबरदस्त शीतलहर की चपेट में है. इस कारण जहां लोग सरेशाम घरों में दुबकने को विवश हो रहे हैं वहीं स्कूली बच्चों को भी काफी कठिनाईयों का सामना करना पड़ रहा है. गरीब गुरबों के लिए प्रशासन द्वारा अब तक कोई ठोस व्यवस्था नहीं होने से उनके समक्ष गंभीर स्थिति उत्पन्न हो गयी है. दूसरी ओर अब तक सरकार द्वारा स्कूलों में छुट्टी नहीं दिये जाने को लेकर छोटे छात्रों के समक्ष भी अजीबो गरीब स्थिति प्रगट हो गयी है. हाजिरी नहीं छूटे इसलिए बच्चे ठंडी हवा के बीच स्कूल जाने को विवश हैं. कई अभिभावकों का मानना है कि अगर बच्चे को स्कूल नहीं भेजेंगे, तो हो सकता है कि छात्रवृत्ति की सूची से उसका नाम गायब हो जाये. बहरहाल ठंड ने अपना रौद्र रूप दिखाना शुरू कर दिया है.
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