सूख रहे चापाकल व कुएं, चुआंड़ी के भरोसे मिट रही लोगों की प्यास

Updated at : 07 May 2019 6:42 AM (IST)
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सूख रहे चापाकल व कुएं, चुआंड़ी के भरोसे मिट रही लोगों की प्यास

निरंजन कुमार, बांका : आज बात जिला मुख्यालय से सुदूर गांव की नहीं, बल्कि पास के इलाके की हकीकत की होगी. यहां के पेयजल संकट व सरकारी तंत्र की विफलता की खुद गवाही सरकारी योजनाएं दे रही है. प्रभात खबर संवाददाता ने सोमवार को छत्रपाल पंचायत के आधा दर्जन गांव की लाइव रिपोर्टिंग की. रिपोटिंग […]

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निरंजन कुमार, बांका : आज बात जिला मुख्यालय से सुदूर गांव की नहीं, बल्कि पास के इलाके की हकीकत की होगी. यहां के पेयजल संकट व सरकारी तंत्र की विफलता की खुद गवाही सरकारी योजनाएं दे रही है.

प्रभात खबर संवाददाता ने सोमवार को छत्रपाल पंचायत के आधा दर्जन गांव की लाइव रिपोर्टिंग की. रिपोटिंग के जरिये हकीकत यह आयी कि गांव में सूखा कुआं गर्मी का प्रतीक बन गया है और ग्रामीणों की प्यास महज चुआंड़ी के भरोसे बुझ रही है.
ग्रामीणों ने बताया कि हकीमत सामने है ज्यादा कहने की जरूरत नहीं है. सरकार व सरकारी तंत्र पेयजल के प्रति कितनी चिंतित है, इस रिपोर्टिंग के जरिये सामने आ गयी है. आइये कुछ गांव की लाइव रिपोर्टिंग से समझें कैसी है पानी के बिना ग्रामीणों की जिंदगानी.
बोतल बंद पानी पीने वाले अफसर एक बार पी लें इस चुआंड़ी का पानी . समय 10:30. छत्रपाल पंचायत अंतर्गत सूअरकोढ़ गांव की. गांव में 17 घर हैं. करीब 90 लोग यहां रहते हैं. गांव में एक भी चापाकल नहीं है. एक कुआं है, जो गर्मी के प्रतीक के रूप में सूखा पड़ा है. कुआं में पानी की जगह गंदगी भरा हुआ है.
तपती गर्मी के बीच यहां के ग्रामीण पास के एक जोर में चुआंड़ी से पानी निकालने में जुटे हुए हैं. ग्रामीण दासो कोल, रामदेव कोल, फूलो कोल, सिकेंदर कोल आदि ने बताया कि चुआंड़ी से ही प्यास बुझती है. करोड़ों की योजना की बात करने वाली सरकार ने यहां एक चापाकल तक नहीं दिया है. हकीकत सब सामने है कुछ बताने की जरूरत नहीं है.
बस इतना ही कहना है कि बिसलेरी पानी पीने वाले अधिकारी बस चुआंड़ी का गंदा पानी एक घूंट पीले, ग्रामीणों का दर्द खुद मालूम पड़ जायेगा. मुखिया विनोद यादव ने बताया कि पीएचइडी को चापाकल व जल-मीनार के लिए आवेदन दिया गया है, परंतु अबतक पहल नहीं हुआ है.
समस्या से निबटने को चापाकल की होगी व्यवस्था
जल संकट के लिए चापाकल की व्यवस्था की जायेगी. जहां खराब चापाकल हैं, वहां टीम मरम्मत के लिए टीम भेजी जा रही है. सात निश्चिय के तहत बने जल-मीनार की भी जांच की जायेगी. दोषी के विरुद्ध कार्रवाई सुनिश्चित होगी.
विजय चंद्रा, बीडीओ, बांका
चिरचिरिया, मनड्डा व हिरमोती में नल-जल योजना के पानी टंकी से बूंद भर नहीं निकल रहा पानी
12:00 दोपहर. गांव चिरचिरिया. यह गांव आदिवासियों की है. करीब 60 घर हैं. यहां करीब 30 लाख की लागत से सात निश्चयत योजना के तहत हर घर-नल का जल योजना के तहत जल-मीनार खड़ा है. परंतु शुरुआती समय से ही यहां से पानी प्राप्त नहीं हो रहा है. यही स्थिति मुस्लिम बहुल मनड्डा व आदिवासी बहुल हिरमोती की भी है.
यहां भी हर घर-नल का जल योजना के तहत काम पूरा किया गया, पंरतु ग्रामीणों की प्यास बुझाने के लिए इस योजना के तहत पानी नहीं मिल रही है. ग्रामीणों के मुताबिक योजना में मात्र खाना-पूर्ति की गयी है. ऐसे संवेदक व कर्मियों की विरुद्ध कार्रवाई सुनिश्चित करने की जरूरत है.
शहनाई के आगे पानी का संकट, कैसे उठेगी डोली
समय 11:00 बजे. आजाद नगर. यहां करीब 70 घर हैं. गांव में एक चापाकल है. गर्मी के बीच दर्जनों की संख्या में महिला-पुरुष एक अदद चापाकल से पानी लेने के लिए कतार में लगे हुए हैं. चापाकल पानी निकालने में लोग पानी मांग रहे हैं. गांव में एक बेटी की शादी है.
शहनाई के बीच यहां जल संकट है. गांव में सगे-संबंधियों व अतिथियों की भीड़ लगने वाली है. ग्रामीण इस बात से चिंतित हैं कि सैकड़ों की संख्या में बाहर से आने वाले लोगों की प्यास कैसे बुझेगी. खाना कैसे बनेगा इत्यादि. ग्रामीणों के मुताबिक करीब 250 लोग यहां रहते हैं, मगर पेयजल सहित अन्य सुविधा के लिए रत्ती भर गंभीरता किसी में नहीं दिख रही है.
संवेदक ने आधा-अधूरा किया काम, पानी बहकर हो रहा बर्बाद
समय 11:30 बजे. गांव चौबटिया. 125 घर. संवेदक ने सात निश्चय योजना के तहत आधा-अधूरा काम गुम हो गये. नतीतजतन, एक पाइप से खुला हुआ है, यहां जब-जब मोटर चलता है पानी नीचे बहकर बर्बाद हो रहा है. ग्रामीणों के मुताबिक सभी घर में कनेक्शन नहीं है. सरकार की राशि भी खर्च हो गयी और प्यास भी नहीं बूझ रही.
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