अधिक पैदावार के लालच में बीमार हो रही धरती की कोख

Published at :12 May 2018 4:14 AM (IST)
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अधिक पैदावार के लालच में बीमार हो रही धरती की कोख

बांका : लगातार जैविक खेती के प्रति किसानों में जागरूकता लाने की बात जरूर हो रही है, परंतु हाल में इसका कोई भी सकारात्मक प्रभाव नहीं दिख रहा है. कुछ माह पहले बांका दौरा पर आये सूबे के कृषि मंत्री प्रेम कुमार ने भी जैविक कोरिडोर जैसे कई बड़ी बातें कहीं, परंतु जैविक खाद उत्पादन […]

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बांका : लगातार जैविक खेती के प्रति किसानों में जागरूकता लाने की बात जरूर हो रही है, परंतु हाल में इसका कोई भी सकारात्मक प्रभाव नहीं दिख रहा है. कुछ माह पहले बांका दौरा पर आये सूबे के कृषि मंत्री प्रेम कुमार ने भी जैविक कोरिडोर जैसे कई बड़ी बातें कहीं, परंतु जैविक खाद उत्पादन की योजना फिसड्डी साबित हो रही है. वहीं दूसरी ओर रासायनिक खाद की जरमरत कम होती नहीं दिख रही है. इस बार भी खरीफ खेती के लिए रासायनिक खाद डालने का बड़ा लक्ष्य तैयार किया गया है. जिससे पता चलता है कि साल-दर-साल रासायनिक खाद का प्रयोग कम नहीं ज्यादा ही हो रहा है.

वहीं दूसरी ओर रासायनिक खादों के अंधाधुंध प्रयोग और लगातार फसल लेने से खेत पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है. यानी अन्न की कोख कमजोर पड़ने लगी है. तरह-तरह के केमिकल युक्त उर्वरक से भूमि की उर्वरा शक्ति घट रही है.
हर साल कम हो रही फसलों की उपज, जैविक खाद के प्रयोग करने में हिचकिचा रहे
हाइब्रिड खेती की दौड़ में खेत की बीमारी का नहीं चलता पता
मौजूदा समय में किसान भी कम समय, कम खर्च की वजह से हाइब्रिड धान की खेती करने के साथ उनमें रासायनिक खाद का प्रयोग बड़ी मात्रा में कर बैठते हैं. सामान्य धान सहित अन्य फसल में भी रासायनिक खाद का प्रयोग प्रचुर मात्रा की जाती है. हाइब्रिड में धान सहित अन्य फसल का पैदावार थोड़ी अधिक जरुर होती है, परंतु खेत दोगुनी कमजोर हो जाती है. यही नहीं सामान्य धान सहित अन्य फसल में रासायनिक खाद के प्रयोग से दिनोंदिन पैदावार घटती जा रही है. किसान के मुताबिक पहले एक बीघा में 22 मन धान हुआ करता था. लेकिन रासायनिक खाद के प्रयोग से उपज 18 मन के आसपास सिमट गयी. हालांकि वैज्ञानिक विधि व जैविक खाद की खेती से पैदावार में सुधार के साथ भूमि भी स्वस्थ हो रही है.
कदम नहीं उठाये गये, तो खेती करना होगा मुश्किल
अगर अभी से इस समस्या को लेकर बड़े कदम नहीं उठाये गये तो आनेवाले समय में न केवल किसानों के लिए खेती करना पहाड़ लगेगा, बल्कि रासायनिक खाद की कीमत भी आसमान छूती नजर आयेगी.
रासायनिक खाद के अत्यधिक प्रयोग से खेत पर बुरा असर पड़ता है. किसान अधिक से अधिक मात्रा में जैविक खाद का प्रयोग करें. जैविक खाद के लिए कई सारी योजनाएं संचालित हैं. नियमानुसार इसका लाभ ले सकते हैं. जैविक खेती बढ़ावा के लिए लगातार जागरूकता जारी है.
सुदामा महतो, जिला कृषि पदाधिकारी, बांका
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