दाउदनगर में शिक्षक दिवस पर ज्ञान ज्योति शिक्षण केंद्र में समारोह, विद्यार्थियों ने सांस्कृतिक प्रस्तुतियों से बांधा समां

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सम्मानित करते निदेशक

ज्ञान ज्योति शिक्षण केंद्र, दाउदनगर में शिक्षक दिवस का आयोजन हर्षोल्लास से हुआ. इस अवसर पर शिक्षकों को सम्मानित किया गया और छात्रों ने रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किए. समारोह में शिक्षकों के महत्व और संस्कारों पर विशेष जोर दिया गया.

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औरंगाबाद के दाउदनगर में पुरानाशहर स्थित ज्ञान ज्योति शिक्षण केंद्र में शिक्षक दिवस समारोह हर्षोल्लास के साथ मनाया गया. कार्यक्रम में संस्था के निदेशक सह सम्पूर्णानंद एजुकेशनल एंड सोशल डेवलपमेंट ट्रस्ट के सचिव डॉ. चंचल कुमार ने सभी शिक्षकों को मोमेंटो देकर सम्मानित किया. समारोह के दौरान विद्यार्थियों ने भाषण, गीत समेत कई सांस्कृतिक प्रस्तुतियां देकर कार्यक्रम को यादगार बना दिया.

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कार्यक्रम की शुरुआत तिलक-मौली बंधन और गायत्री मंत्र के साथ हुई. इसके बाद विद्यार्थियों ने अलग-अलग सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किए. फलक नाज और संध्या कुमारी के प्रभावशाली भाषण ने उपस्थित लोगों का ध्यान आकर्षित किया. वहीं, बेटी के संस्कार से संबंधित गीत की प्रस्तुति ने समारोह में भावुकता का रंग भर दिया.

शिक्षक की गुणवत्ता ही सबसे महत्वपूर्ण

समारोह को संबोधित करते हुए संस्था के निदेशक डॉ. चंचल कुमार ने शिक्षक के महत्व पर विस्तार से प्रकाश डाला. उन्होंने कहा कि शिक्षक हमेशा पूज्य थे, हैं और आगे भी रहेंगे. शिक्षक के पास धन हो या न हो, लेकिन उसमें गुण और अच्छे संस्कार जरूर होने चाहिए. उन्होंने कहा कि समाज में शिक्षक की पूजा उसके ज्ञान और गुणवत्ता के कारण होती है.

डॉ. चंचल कुमार ने कहा कि जो शिक्षक अपने शिष्य को अज्ञान और अंधकार से निकालकर ज्ञान के प्रकाश की ओर ले जाता है, वही सच्चे अर्थों में गुरु कहलाने योग्य है. गुरु का स्थान जीवन में बेहद ऊंचा माना गया है और इसी कारण गुरु की तुलना भगवान से भी की जाती है.

उन्होंने कहा कि भारतीय परंपरा में माता, पिता और गुरु को जीवन के तीन प्रमुख देवों के रूप में माना गया है. बच्चे के जीवन की पहली पाठशाला उसका घर होता है. माता-पिता ही उसे शुरुआती संस्कार और जीवन की पहली सीख देते हैं. इसके बाद शिक्षक उसके ज्ञान और व्यक्तित्व को दिशा देने का काम करते हैं.

संस्कार के बिना जीवन अधूरा

डॉ. चंचल कुमार ने विद्यार्थियों को संस्कार के महत्व के बारे में भी बताया. उन्होंने कहा कि शिक्षा के साथ जीवन में अच्छे संस्कारों का होना बेहद जरूरी है. केवल किताबी ज्ञान से व्यक्ति का संपूर्ण विकास नहीं हो सकता. संस्कार ही व्यक्ति को सही और गलत के बीच अंतर समझने की क्षमता देते हैं.

उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि जिस प्रकार पतवार के बिना नाव की दिशा तय करना मुश्किल हो जाता है, उसी प्रकार संस्कार के बिना मनुष्य का जीवन भी अधूरा हो जाता है. उन्होंने विद्यार्थियों से अपील की कि वे अपने गुरु के प्रति हमेशा श्रद्धा और सम्मान का भाव बनाए रखें.

निदेशक ने कहा कि जिस तरह भक्त और भगवान के बीच श्रद्धा का संबंध होता है, उसी तरह विद्यार्थियों के जीवन में गुरु के प्रति सम्मान और विश्वास होना चाहिए. गुरु के मार्गदर्शन को अपनाकर विद्यार्थी अपने जीवन में सही दिशा हासिल कर सकते हैं.

समारोह के दौरान संस्था के सभी शिक्षक मौजूद रहे. कार्यक्रम में विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया और शिक्षक दिवस के अवसर पर अपने शिक्षकों के प्रति सम्मान और आभार व्यक्त किया.

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