औरंगाबाद में पार्थेनियम से बचाव के लिए विद्यार्थियों को किया जागरूक, केवीके वैज्ञानिकों ने बताए नियंत्रण के उपाय

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जागरूकता कार्यक्रम में शामिल विद्यार्थी व अन्य

Aurangabad News : औरंगाबाद में पार्थेनियम जागरूकता सप्ताह के तहत छात्रों को कांग्रेस घास के नुकसान और इसके नियंत्रण के उपायों के बारे में विस्तार से जानकारी दी गई.

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Aurangabad News : पार्थेनियम जैसे हानिकारक विदेशी आक्रामक खरपतवार के प्रति लोगों को जागरूक करने के उद्देश्य से 22 अगस्त तक 21वां पार्थेनियम जागरूकता सप्ताह मनाया जा रहा है. इसी कड़ी में सिरीस उच्च विद्यालय में कृषि विज्ञान केंद्र, औरंगाबाद के वैज्ञानिकों की मौजूदगी में जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया. इसमें विद्यालय के विद्यार्थियों और सभी स्टाफ सदस्यों ने सक्रिय भागीदारी निभाई.

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विद्यार्थियों को दी गई पार्थेनियम की पहचान और दुष्प्रभावों की जानकारी

कार्यक्रम के दौरान केवीके के वैज्ञानिक डॉ. आशुतोष कुमार ने विद्यार्थियों को पार्थेनियम के परिचय, उत्पत्ति, पहचान, प्रसार और इसके दुष्प्रभावों की विस्तार से जानकारी दी. उन्होंने बताया कि पार्थेनियम हिस्टेरोफोरस एक विदेशी आक्रामक खरपतवार है, जिसे आम बोलचाल में कांग्रेस घास, सफेद टोपी और असाढ़ी आदि नामों से जाना जाता है. उन्होंने बताया कि इसके फैलाव से खेतों के साथ-साथ सड़क किनारे, बंजर भूमि और अन्य गैर-कृषि क्षेत्रों में भी परेशानी बढ़ रही है. यह अत्यधिक मात्रा में बीज पैदा करता है और इसके बीज हवा, पानी तथा मानवीय गतिविधियों के माध्यम से तेजी से फैलते हैं.

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फसलों के साथ मानव स्वास्थ्य के लिए भी है नुकसानदायक

डॉ. आशुतोष कुमार ने बताया कि पार्थेनियम फसलों की उत्पादकता को प्रभावित करने के साथ-साथ मानव स्वास्थ्य के लिए भी नुकसानदायक है. इसके संपर्क में आने से त्वचा संबंधी एलर्जी और डर्मेटाइटिस जैसी समस्याएं हो सकती हैं. वहीं पशुओं के चारे के रूप में भी इसका उपयोग उचित नहीं माना जाता है.

फूल और बीज बनने से पहले करें नियंत्रण

कार्यक्रम के दूसरे सत्र में वैज्ञानिक डॉ. प्रतिभा कुमार ने पार्थेनियम के नियंत्रण और प्रबंधन के उपायों की जानकारी दी. उन्होंने कहा कि खेतों, विद्यालय परिसरों, सड़क किनारे और खाली जमीन की नियमित निगरानी जरूरी है. उन्होंने बताया कि पौधों को फूल और बीज बनने से पहले उखाड़कर सुरक्षित तरीके से नष्ट करने से इसके प्रसार को काफी हद तक रोका जा सकता है. पार्थेनियम के नियंत्रण के लिए यांत्रिक और सांस्कृतिक उपायों के साथ आवश्यकता के अनुसार रासायनिक नियंत्रण के तरीके भी अपनाए जा सकते हैं.

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सामूहिक प्रयास से ही संभव है पार्थेनियम का उन्मूलन

वैज्ञानिकों ने विद्यार्थियों से अपने आसपास पार्थेनियम की पहचान करने और इसके उन्मूलन के लिए लोगों को जागरूक करने की अपील की. उन्होंने कहा कि इसका नियंत्रण किसी एक व्यक्ति या संस्था की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि किसान, विद्यार्थी, विद्यालय और पूरे समुदाय के सामूहिक प्रयास से ही इस समस्या पर प्रभावी नियंत्रण पाया जा सकता है. कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों को जागरूक नागरिक बनाकर पार्थेनियम नियंत्रण का संदेश घर-घर तक पहुंचाना रहा.

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