Aurangabad News: सावन की शुरुआत के बावजूद बारिश का इंतजार, औरंगाबाद में धान रोपनी लक्ष्य से काफी पीछे

Author Ambuj kumar|Edited by Vikash Jha
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सूखे पड़े खेत, रोपनी कर रही महिलाएं, खेत तैयार कर रहे किसान मजदूर | Prabhat Khabar Network

सूखे पड़े खेत, रोपनी कर रही महिलाएं, खेत तैयार कर रहे किसान मजदूर | Prabhat Khabar Network

सावन का महीना शुरू हो चुका है, लेकिन औरंगाबाद जिले के खेत अभी भी बारिश का इंतज़ार कर रहे हैं. मानसून की देरी के कारण धान की रोपनी लक्ष्य से काफी पीछे चल रही है, जिससे किसानों की चिंता बढ़ गई है. कृषि विशेषज्ञ उत्पादन में कमी की आशंका जता रहे हैं.

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Aurangabad News: सावन माह की शुरुआत हो चुकी है, लेकिन औरंगाबाद जिले के खेत अब भी बारिश के इंतजार में प्यासे हैं. सामान्य तौर पर इस समय तक जिले के अधिकांश खेत धान की हरियाली से भर जाते हैं, लेकिन इस वर्ष तस्वीर इसके विपरीत है. मानसून की कमजोर गतिविधि और पर्याप्त बारिश न होने से धान की रोपनी काफी पीछे चल रही है. किसान आसमान की ओर टकटकी लगाए बैठे हैं, वहीं कृषि विभाग भी मान रहा है कि समय पर अच्छी बारिश नहीं हुई तो उत्पादन पर इसका प्रतिकूल असर पड़ सकता है.

लक्ष्य के मुकाबले केवल 27 फीसदी रोपाई

खरीफ मौसम 2026-27 में औरंगाबाद जिले के विभिन्न प्रखंडों में कुल 1.72 लाख हेक्टेयर भूमि में धान की खेती का लक्ष्य निर्धारित किया गया है. हालांकि जिला कृषि कार्यालय के आंकड़ों के अनुसार 27 जुलाई तक केवल 47,825.50 हेक्टेयर, यानी 27.81 प्रतिशत क्षेत्र में ही धान की रोपाई संभव हो पाई है. समय पर बारिश नहीं होने के कारण किसान काफी चिंतित नजर आ रहे हैं.

नवीनगर कुटुंबा और मदनपुर में स्थिति गंभीर

जिले के नवीनगर, मदनपुर और कुटुंबा प्रखंड की स्थिति सबसे ज्यादा चिंताजनक है. नवीनगर में लक्ष्य के मुकाबले मात्र 9.18 प्रतिशत, मदनपुर में 11.08 प्रतिशत और कुटुंबा में 13.90 प्रतिशत ही रोपाई हो सकी है. इसके अलावा देव में 15.46%, गोह में 18.80%, औरंगाबाद सदर में 22.90%, रफीगंज में 22.65% और हसपुरा में 25.07% क्षेत्र में रोपनी हुई है. वहीं बारुण में 56.39%, ओबरा में 55.34% और दाउदनगर में 54.85% रोपाई के साथ बेहतर स्थिति दर्ज की गई है.

बारिश में देरी से पैदावार घटने की आशंका

कृषि विशेषज्ञों के अनुसार जुलाई बीत जाने के बाद रोपाई होने पर पैदावार प्रभावित होने की आशंका बढ़ जाती है. कृषि मौसम वैज्ञानिक डॉ अनूप कुमार चौबे ने बताया कि किसानों ने 22 से 25 जून के बीच धान का बिचड़ा तैयार किया था, जो अब एक माह से अधिक का हो चुका है. अधिक दिनों के बिचड़े की रोपाई करने से पौधों में कल्ले कम निकलते हैं, जिससे प्रति हेक्टेयर उत्पादन घट सकता है.

सिंचाई के साधनों की कमी से बढ़ी परेशानी

जिले का दक्षिणी इलाका जो झारखंड की सीमा से सटा है, वहां खेती पूरी तरह वर्षा पर निर्भर है. रफीगंज, मदनपुर, नवीनगर, देव और कुटुंबा प्रखंड के कई गांवों में सिंचाई के पर्याप्त साधन नहीं हैं. बारिश में देरी से इन क्षेत्रों में खेती सबसे अधिक प्रभावित हुई है. जिला कृषि पदाधिकारी संदीप राज ने बताया कि 17,200 हेक्टेयर में नर्सरी तैयार है और किसानों को सीधी बुआई व आधुनिक तकनीक अपनाने की सलाह दी जा रही है. मौसम अनुकूल होते ही रोपाई में तेजी आने की उम्मीद है.


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