पुनपुन के उफान से औरंगाबाद में बढ़ी बेचैनी, मुख्य सड़क पर चार से पांच फीट पानी

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गांव के चार्रो और पानी

औरंगाबाद के कैथी बनकट गांव में पुनपुन नदी का पानी सड़क पर आने से आवागमन ठप, धान की फसल बर्बाद होने की चिंता। प्रशासन से राहत और बचाव की मांग।

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औरंगाबाद के हसपुरा प्रखंड के  पुनपुन नदी का जलस्तर लगातार बढ़ने से कैथी बनकट गांव में बाढ़ का खतरा गहराता जा रहा है. नदी का पानी अब गांव की मुख्य सड़क पर चार से पांच फीट तक बह रहा है. तेज बहाव के कारण ग्रामीणों का आवागमन बुरी तरह प्रभावित हो गया है. गांव से प्रखंड और जिला मुख्यालय जाने का रास्ता लगभग बंद होने से ग्रामीणों में डर और चिंता बढ़ गई है.

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मुख्य रास्ते पर तेज बहाव, जरूरी सामान के लिए भी परेशानी

मुख्य सड़क पर पानी का तेज बहाव होने के कारण ग्रामीणों के लिए गांव से बाहर निकलना मुश्किल हो गया है. रोजमर्रा की जरूरतों के लिए लोगों को पानी के बीच से होकर बाजार जाना पड़ रहा है. ग्रामीण किसी तरह ब्रेड, दवा और अन्य जरूरी सामान लेकर वापस गांव लौट रहे हैं. पानी का बहाव लगातार बढ़ने से हादसे की आशंका भी बनी हुई है.

पानी और बढ़ा तो नाव के बिना नहीं होगा आवागमन

ग्रामीणों के अनुसार पुनपुन नदी का जलस्तर जिस तेजी से बढ़ रहा है, उससे आने वाले एक-दो दिनों में स्थिति और गंभीर हो सकती है. सड़क पर पानी की गहराई बढ़ने के साथ आवागमन पूरी तरह ठप होने की आशंका है. ऐसी स्थिति में गांव से बाहर आने-जाने के लिए नाव ही एकमात्र सहारा बचेगा.

खेतों में पानी भरने से किसानों की बढ़ी चिंता बाढ़ के पानी ने गांव के आसपास के खेतों को भी अपनी चपेट में लेना शुरू कर दिया है. सैकड़ों एकड़ में लगी धान की फसल पानी से प्रभावित हुई है. खेतों में लगातार पानी जमा रहने से किसानों को फसल बर्बाद होने की चिंता सताने लगी है. ग्रामीणों का कहना है कि यदि पानी एक-दो दिनों तक खेतों में जमा रहा तो धान की फसल को भारी नुकसान हो सकता है.

राहत और बचाव की व्यवस्था कराने की मांग

गांव के पूर्व पंच सुधीर शर्मा और पूर्व पैक्स अध्यक्ष रविंद्र शर्मा ने बताया कि पुनपुन नदी का जलस्तर लगातार बढ़ने से स्थिति चिंताजनक होती जा रही है. उन्होंने कहा कि पानी का बढ़ना जारी रहा तो ग्रामीणों के लिए नाव की व्यवस्था जरूरी हो जाएगी.

ग्रामीणों ने प्रशासन से तत्काल राहत और बचाव की व्यवस्था कराने की मांग की है. गांव में दवाइयां, खाद्य सामग्री और अन्य जरूरी सामान उपलब्ध कराने के साथ बाढ़ प्रभावित इलाकों में निगरानी बढ़ाने की मांग की गई है. किसानों ने जलभराव से हुई फसल क्षति का आकलन कर उचित मुआवजा देने की भी मांग की है. ग्रामीणों का कहना है कि समय रहते प्रशासन ने कदम नहीं उठाया तो जलस्तर बढ़ने के साथ गांव की स्थिति और गंभीर हो सकती है.

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