कोयल नहर की लाइनिंग ध्वस्त, जगह-जगह टूटा निर्माण; औरंगाबाद में CWC-टेक्निकल टीम की निगरानी पर सवाल

Updated:
विज्ञापन

कोयल नहर की लाइनिंग ध्वस्त

उत्तर कोयल नहर परियोजना की रीमॉडलिंग में कथित अनियमितताओं ने लाखों किसानों की सिंचाई उम्मीदों पर पानी फेर दिया है. पहली ही बारिश में लाइनिंग ध्वस्त होने से निर्माण गुणवत्ता और निगरानी व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं. किसानों की आजीविका दांव पर लगी है.

विज्ञापन

Koyal Canal Lining : बिहार और झारखंड के लाखों हेक्टेयर भूमि को सिंचाई सुविधा देने के लक्ष्य वाली उत्तर कोयल नहर परियोजना के रीमॉडलिंग कार्य में कथित अनियमितता ने किसानों की उम्मीदों पर सवाल खड़े कर दिए हैं. मगध क्षेत्र के किसानों की जीवनरेखा मानी जाने वाली इस परियोजना के रीमॉडलिंग और अधूरे कार्यों का शिलान्यास वर्ष 2019 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने डाल्टनगंज में किया था. परियोजना के निर्माण कार्यों की गुणवत्ता की मॉनिटरिंग की जिम्मेदारी केंद्र सरकार के जल शक्ति मंत्रालय और बिहार सरकार के जल संसाधन विभाग को दी गई है. इसके बावजूद रीमॉडलिंग कार्य की गुणवत्ता को लेकर लगातार शिकायतें सामने आ रही हैं. किसानों का आरोप है कि अधिकृत एजेंसी वाप्कोस के अधिकारियों और संवेदकों की कथित लापरवाही के कारण जल शक्ति मंत्रालय के निर्धारित मानकों की अनदेखी कर सीएनएस वर्क और लाइनिंग का काम कराया गया.

आपके शहर में

विज्ञापन

देव, कुटुंबा और मदनपुर प्रखंडों में कई स्थानों पर लाइनिंग ध्वस्त होने की बात सामने आने के बाद मॉनिटरिंग व्यवस्था भी सवालों के घेरे में है. कुटुंबा के पूर्व मुखिया औंकारनाथ सिंह, जगदीशपुर के पूर्व सरपंच अलखदेव प्रसाद सिन्हा, रामपुर गांव निवासी रिटायर्ड बीएओ रामचंद्र सिंह और रसलपुर के शिवनाथ पांडेय समेत दर्जनों किसानों का आरोप है कि निर्माण कार्य में गंभीर अनियमितता बरती गई है. किसानों के अनुसार घटिया सामग्री के इस्तेमाल से सीडी, क्रॉस रेगुलेटर, हेड रेगुलेटर और एक्वाडक्ट जैसे महत्वपूर्ण निर्माण कार्यों की गुणवत्ता प्रभावित हुई है.

पहली बरसात में टूटी लाइनिंग, किसानों ने उठाए सवाल

मदनपुर के किसान परशुराम सिंह, अरुण कुमार सिंह और अशोक सिंह का कहना है कि पहली ही बरसात में रीमॉडलिंग के तहत कराई गई लाइनिंग कई जगह पानी का दबाव नहीं झेल सकी. किसानों के मुताबिक पानी आने से पहले ही कई स्थानों पर दरारें उभरने लगी थीं, जबकि बाद में कई जगह लाइनिंग क्रैक होकर पूरी तरह ध्वस्त हो गई. अंबा, औरंगाबाद और मदनपुर डिवीजन में ऐसी दर्जनों जगह होने का दावा किसानों ने किया है.

इस स्थिति ने निर्माण की गुणवत्ता के साथ-साथ निगरानी व्यवस्था पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. किसानों का कहना है कि उत्तर कोयल नहर से लंबे समय से सिंचाई की उम्मीद लगाए बैठे किसानों के लिए यह परियोजना बेहद महत्वपूर्ण है और अगर निर्माण कार्य ही टिकाऊ नहीं रहा, तो इसका सीधा असर खेती और किसानों की आजीविका पर पड़ेगा.

टुडे लाइनिंग कार्य  प्रभात खबर अखबार में पूर्व में छपी खबर | Prabhat Khabar Network
टुडे लाइनिंग कार्य प्रभात खबर अखबार में पूर्व में छपी खबर | Prabhat Khabar Network

अजीत कुमार, पूर्व मुखिया अर्जुन पासवान और उमेश राय समेत अन्य किसानों ने मामले को लेकर औरंगाबाद के पूर्व सांसद सुशील कुमार सिंह से संपर्क कर उच्चस्तरीय जांच कराने और दोषी एजेंसी के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है. किसानों का कहना है कि पूरे रीमॉडलिंग कार्य की तकनीकी जांच कराकर जिम्मेदारी तय की जाए और मानकों के अनुरूप काम पूरा कराया जाए, ताकि उत्तर कोयल नहर परियोजना का वास्तविक लाभ किसानों तक पहुंच सके.

मुख्य सचिव व जल शक्ति मंत्रालय के अध्यक्ष भी परियोजना का कर चुके हैं निरीक्षण

योजना के मॉनिटरिंग स्थानीय अधिकारी तो कर ही रहे हैं. यहां तक की 12 नवंबर 2025 को बिहार सरकार के मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत द्वारा योजना का मॉनिटरिंग किया गया था. वे हेलीकॉप्टर से कुटुंबा प्रखंड अंतर्गत एरका स्थित सिंचाई कॉलोनी पहुंचे थे. मुख्य सचिव द्वारा योजना का मॉनिटरिंग किए जाने से ऐसा लगा कि अब यह कार्य ससमय गुणवत्ता के साथ पूर्ण कराया जाएगा.

टुडे लाइनिंग कार्य  प्रभात खबर अखबार में पूर्व में छपी खबर | Prabhat Khabar Network
टुडे लाइनिंग कार्य प्रभात खबर अखबार में पूर्व में छपी खबर | Prabhat Khabar Network

इतना ही नहीं जल शक्ति मंत्रालय वाप्कोस के अध्यक्ष सह सीएमडी शिल्पा सचिन शिंदे ने भी 24 मई को परियोजना के कार्यों का निरीक्षण किया था. केंद्र एवं राज्य सरकार के वरीय अधिकारियों द्वारा योजना के निरीक्षण के बावजूद भी कई जगहों पर खामियां आने से किसानों में काफी नाराजगी है.

मॉनिटरिंग टीम किसान के कटघरे में

लाइनिंग टूटने से मॉनिटरिंग टीम की कार्य शैली पर प्रश्न संवालिया दाग लग गया है. री-मॉडलिंग कार्यो के मानिटरिंग की जिम्मेवारी संबंधित विभाग के केंद्रीय व राज्य के निदेशक, वाप्कोस के महाप्रबंधक, सीएमडी, सीडब्लूसी, बिहार के वरीय अधिकारी, क्वॉलिटी और क्वांटिटी कंट्रोल टीम,सब कमेटी (1) सब कमेटी (2) के साथ अन्य अधिकारी लगाए गए थे.

वाप्कोस ने झारखंड में दो पैकेज और बिहार में अलग-अलग 9 पैकेज में लाईनिंग कार्य शुरू किया गया था. री-मॉडलिंग कार्य पूरा होने से पहले लाइनिंग टूट-टूट कर बिखर रही है.

टुडे लाइनिंग कार्य  प्रभात खबर अखबार में पूर्व में छपी खबर | Prabhat Khabar Network
टुडे लाइनिंग कार्य प्रभात खबर अखबार में पूर्व में छपी खबर | Prabhat Khabar Network

विदित हो कि उत्तर कोयल जलाशय बिहार और झारखंड के संयुक्त अंतरराज्यीय सिंचाई परियोजना है. उक्त योजना से बिहार में 91917 हजार हेक्टेयर और झारखंड 19604 हेक्टेयर भूमि सिंचित का लक्ष्य निर्धारित है.योजना के पूरा होने पर बिहार में 39801 हेक्टेयर अतिरिक्त भूमि सिंचित होने की उम्मीद थी.

50 वर्ष पूर्व शुरू हुआ यह परियोजना आज भी है अधूरा

1972 में हुआ था कोयल नहर का सृजन. जानकारी केअनुसार वर्ष 1972 उत्तर कोयल सिंचाई परियोजना का सृजन किया गया था. इसके 21 वर्षो के बाद बिहार सरकार के वन विभाग की आपत्ति पर सभी तरह के सरंचनाओं के निर्माण पर रोक लगा दिया गया. बताया जाता है कि कुटकू डैम का डूब क्षेत्र में आने भूमि टाईगर प्रोजेक्ट का भूभाग था.

2007 से लेकर 2013 तक उक्त सिंचाई परियोजना मृत प्राय हो गई थी. 2009 के बाद उस समय के सासंद सुशील कुमार सिंह ने कोयल नहर के अधूरे कार्यो को पूरा करने का प्रयास किया. लंबे अर्से तक कोई खास सफलता नहीं मिली. हालांकि लगातार प्रयास से वर्ष 2014 में नरेंद्र मोदी की सरकार में सभी तरह की अड़चने दूर हो गई और केन्द्र सरकार द्वारा झारखंड पोरसन में कोयल नहर के आरएमसी, लाईनिंग,रास्ते व पुल पुलिया के सरंचनाओ के लिए 2430.76 हजार करोड़ राशि स्वीकृति दी थी.

टुडे लाइनिंग कार्य  प्रभात खबर अखबार में पूर्व में छपी खबर | Prabhat Khabar Network
टुडे लाइनिंग कार्य प्रभात खबर अखबार में पूर्व में छपी खबर | Prabhat Khabar Network

रीमाॅडलिंग होने से बेहतर सिंचाई सुविधा बहाल होने की उम्मीद जगी थी. अनवरत निमार्ण कार्य जारी रहने से विभिन्न क्षेत्रो के किसानों में खासा उत्साह था, परंतु कार्य में अनियमितता सामने आने से किसानों के सपनों पर एक बार फिर से पानी फिरता दिख रहा है.

उत्तर कोयल नहर परियोजना में अनियमितता बर्दाश्त नहीं -पूर्व सांसद

पूर्व सांसद सुशील कुमार सिंह ने बताया कि लगातार प्रयास के बाद पीएम नरेंद्र मोदी के हस्तक्षेप से मृतप्राय परियोजना को गति मिली है. प्रधानमंत्री द्वारा खुद परियोजना का शिलान्यास किया गया है. कार्य एजेंसी द्वारा कार्य के गुणवत्ता में लापरवाही की जाती है तो इसे बर्दाश्त नहीं किया जाएगा. उन्होंने कहा कि यह कार्य हजारों किसानों के जीवन से जुड़ा है. ध्वस्त हो रहे लाइनिंग कार्य के गुणवत्ता पर सवाल उठ रहे हैं. वे इसके लिए बिहार के मुख्यमंत्री, भारत सरकार के जल संसाधन मंत्रालय एवं प्रधानमंत्री को पत्र लिखेंगे.

क्या बोले चीफ इंजीनियर

जल संसाधन विभाग के चीफ इंजीनियर अर्जुन प्रसाद सिंह ने बताया के री-माॅडलिंग के लिए वाप्कोस अधिकृत है. निरीक्षण के दौरान देखा गया कि मुख्य नहर की लाइनिंग क्षतिग्रस्त हुई है. जब तक बेहतर ढंग से डिजाईन कर लाइनिंग नही होगी, सिंचाई प्रभावित होगी.

विज्ञापन

Prabhat Khabar App :

देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए

Download from Google PlayDownload from App Store
विज्ञापन