औरंगाबाद: उत्तर कोयल मुख्य नहर के री-मॉडलिंग कार्य की गुणवत्ता पर सवाल, जगह-जगह टूट रही लाइनिंग
76 से 80 KM के बीच क्षतिग्रस्त लाइनिंग की तस्वीर
उत्तर कोयल मुख्य नहर के री-मॉडलिंग कार्य की गुणवत्ता पर फिर सवाल उठे हैं. जगह-जगह लाइनिंग टूटने से स्थानीय किसान नाराज हैं और घटिया सामग्री के इस्तेमाल का आरोप लगा रहे हैं. किसानों ने उच्चस्तरीय जांच और दोषियों पर कार्रवाई की मांग की है.
Aurangabad Utttar Koyal Canal: उत्तर कोयल मुख्य नहर के री-मॉडलिंग कार्य की गुणवत्ता पर एक बार फिर सवाल खड़े हो गये हैं. नहर में जगह-जगह लाइनिंग टूटने से निर्माण कार्य की गुणवत्ता कटघरे में आ गयी है. स्थानीय किसानों ने आरोप लगाया है कि अधिकृत एजेंसी वाप्कोस के संवेदकों द्वारा सीएनएस वर्क और लाइनिंग कार्य में अनियमितता बरती गयी है. किसानों के अनुसार घटिया सामग्री के इस्तेमाल से सीडी, क्रॉस रेगुलेटर, हेड रेगुलेटर और एक्वाडक्ट जैसी संरचनाओं की गुणवत्ता भी प्रभावित हुई है.
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पैकेज आठ में तीन-चार जगह टूटी लाइनिंग
ताजा मामला सदर डिवीजन के पैकेज आठ का है. यहां 76 से 80 किलोमीटर के बीच तीन-चार स्थानों पर नहर की लाइनिंग टूटकर बेड में चली गयी है. इससे पहले पिछले महीने मदनपुर में 99 किलोमीटर के पास भी लाइनिंग टूटने की बात सामने आयी थी.
वहीं, जुलाई 2025 में अंबा में 50 से 51.5 किलोमीटर के बीच करीब डेढ़ किलोमीटर की लाइनिंग ध्वस्त होने की जानकारी सामने आयी थी. बताया गया कि उक्त लाइनिंग का काम एमएस कंस्ट्रक्शन, हैदराबाद द्वारा कराया गया है.

सिंचाई की उम्मीदों को लगा झटका
किसानों का कहना है कि उत्तर कोयल मुख्य नहर के जीर्णोद्धार और री-मॉडलिंग कार्य से क्षेत्र में सिंचाई व्यवस्था बेहतर होने की उम्मीद जगी थी. लेकिन निर्माण के कुछ समय बाद ही लाइनिंग टूटने से किसानों की उम्मीदों को झटका लगा है.
किसानों ने नहर के री-मॉडलिंग कार्य की उच्चस्तरीय जांच कराने और गुणवत्ता में गड़बड़ी के लिए जिम्मेदार एजेंसी के खिलाफ कार्रवाई करने की मांग की है.
पूर्व सांसद ने भी उठाये सवाल
पूर्व सांसद ने भी नहर के री-मॉडलिंग कार्य की गुणवत्ता पर सवाल उठाया है. उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के हस्तक्षेप से मृतप्राय परियोजना को गति मिली थी, लेकिन निर्माण कार्य में अनियमितता के कारण नहर की संरचनाएं क्षतिग्रस्त हो रही हैं.
उन्होंने जल शक्ति मंत्रालय से मामले की जांच कराने की मांग की है. साथ ही कहा कि यदि समय रहते री-मॉडलिंग कार्य की गुणवत्ता की जांच नहीं हुई, तो पूरी लाइनिंग ध्वस्त हो सकती है.
लगातार टूट रही लाइनिंग, मॉनिटरिंग व्यवस्था पर सवाल
लगातार लाइनिंग टूटने की घटनाओं ने परियोजना की मॉनिटरिंग व्यवस्था पर भी सवाल खड़े कर दिये हैं. पिछले वर्ष अंबा के ढीबर पुल के पास 263.84 मीटर और मदनपुर में 150 मीटर लाइनिंग टूटने की बात सामने आयी थी.
अब सदर डिवीजन में लाइनिंग टूटने के बाद चीफ इंजीनियर अर्जुन प्रसाद सिंह के नेतृत्व में कार्यपालक अभियंता आरिफ खान ने स्थल का निरीक्षण किया. निरीक्षण के दौरान लाइनिंग को हुई क्षति की पुष्टि की गयी.
बारिश के पानी के दबाव से टूटने का दावा
वाप्कोस के प्रोजेक्ट मैनेजर फारूख खान ने बताया कि पिछले दो-तीन दिनों से हो रही बारिश के कारण पानी के दबाव से लाइनिंग टूटी है. उन्होंने कहा कि टूटे हुए पैनल को हटाकर उसे दुरुस्त किया जायेगा. साथ ही पानी की निकासी के लिए अतिरिक्त स्ट्रक्चर तैयार किये जायेंगे.

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