दीपावली में एक तरफ जले दीप, तो दूसरी तरफ होता रहा जुए का खेल

Published at :01 Nov 2016 5:47 AM (IST)
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दीपावली में एक तरफ जले दीप, तो दूसरी तरफ होता रहा जुए का खेल

जुआरियों पर लगाम कसने में विफल रहा प्रशासन औरंगाबाद कार्यालय : दीपो का त्योहार माने जाने वाला दीपावली इस बार औरंगाबाद में जुआ के खेल के नाम से जाना जा रहा है. दीप तो धर्मस्थलियों और घर में जले , लेकिन जुआ का खेल चौक चौराहे से लेकर कोठे अटारियो में भी खुलकर खेला जा […]

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जुआरियों पर लगाम कसने में विफल रहा प्रशासन
औरंगाबाद कार्यालय : दीपो का त्योहार माने जाने वाला दीपावली इस बार औरंगाबाद में जुआ के खेल के नाम से जाना जा रहा है. दीप तो धर्मस्थलियों और घर में जले , लेकिन जुआ का खेल चौक चौराहे से लेकर कोठे अटारियो में भी खुलकर खेला जा रहा है. यहां तक कि धर्मस्थली के आड़ में भी जुआ का खेल चलता रहा और यहां की पुलिस देखती रही या फिर इनकी सहमति से सबकुछ चल रहा है यह तो पुलिस वाले ही जानते होंगे. लेकिन आम लोगों में चर्चा है कि इस बार जुआ खेलने वालो को पुलिस ने खुली छुट दे रखी थी. लोगों की सोच में दम भी दिखाई दे रही है.
पुलिस देखते रहे और जुआ का खेल होते रहे यह बात स्वीकार करने योग्य नहीं है. दीपावली की रात शहर के हर चौक- चौराहे पर दस-पांच की संख्या में लोग बैठ कर तास के पत्ते उलटते रहे. इसमें कितने लोगों की जेब खाली हो गयी,कितने लोग कर्ज लेकर माथे पर हाथ रखे बैठे हुए भी दिखायी दिये. यानी कि पैसा लूटने और लुटाने का खेल पूरी रात चली. लोगों का यह भी कहना है कि इस तरह जुआ का खेल सार्वजनिक होते हुए पहले कभी नहीं देखा गया था.
सोमवार के दिन तो संकट मोचन मानस मंदिर के समीप सुबह 6 बजे से दोपहर तक जुआड़ी दाव लगाते रहे,लेकिन एक बार भी पुलिस इन्हें न तो रोक पायी और नहीं तो ऐसे लोगों पर कोई कार्रवाई हुई, जबकि संकट मोचन मानस मंदिर नगर थाना से महज 50 गज की दूरी पर है. यह स्थिति है नगर थाने की निकट की एक धर्मस्थली की. इसी से अंदाजा लगाया जा सकता है कि जुआ का खेल खेलने वाले कितना निर्भिक रूप से इस अवैध धंधे को चलाते रहे और शहर के प्रतिष्ठित लोग अपनी आंखों से देखकर स्थानीय पुलिस को कोसते रहे. कुछ लोगों को पुलिस ने पकड़ी भी तो उन्हें वाक ओवर देकर छोड़ दिया गया.
क्या कहते हैं थानाध्यक्ष : इस संबंध में नगर थानाध्यक्ष सुभेंद्र कुमार सुमन से जब पूछा गया कि दीपावली की पूरी रात औरंगाबाद शहर जुआड़ियों के हवाले हो चुकी थी. जुआ का खेल वैसे खेले जा रहे थे,जैसे इन्हें खेलने का सरकारी प्रमाण पत्र मिल गया हो. इस पर थानाध्यक्ष ने कहा कि दीपावली की रात पर्व त्योहार का दिन था इसलिये कार्रवाई नहीं की गयी.
लेकिन आगे कही भी जुआ का खेल कोई खेलता है तो उसे बख्शा नहीं जायेगा, बल्कि कड़ी करवाई होगी. जब उनसे पूछा गया कि कुछ जुआड़ियो को पुलिस ने गिरफ्तार किया था और फिर छोड़ दिया. इस पर थानाध्यक्ष ने कहा कि पकड़े गये लोगों के पास से कोई वैसा चीज बरामद नहीं हुआ था जिससे स्पष्ट हो कि ये लोग जुआ खेल रहे थे.थानाध्यक्ष का यह कहना कि उनके पास से कोई बरामदगी नहीं थी तो फिर बड़ा सवाल यह है कि पुलिस उन्हें गिरफ्तार कर थाना क्यों लायी थी.
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