सब्जियों में कीटनाशकों का प्रयोग बन रहा घातक, बढ़ रहीं बीमारियां

Updated at : 24 Aug 2018 4:20 AM (IST)
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सब्जियों में कीटनाशकों का प्रयोग बन रहा घातक, बढ़ रहीं बीमारियां

मदनपुर : अनाज हो या सब्जी, अच्छे पैदावार के लिए इनमें कीटनाशकों का जो प्रयोग हो रहा है, उससे मानव सेहत को गंभीर खतरा है. कीटनाशक बनानेवाली कंपनियां ज्यादा से ज्यादा लाभ कमाने के चक्कर में कीटनाशकों में जहर का ओवरडोज मिला रही हैं. जानकारों का कहना है कि फल, सब्जी या अनाज में मौजूद […]

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मदनपुर : अनाज हो या सब्जी, अच्छे पैदावार के लिए इनमें कीटनाशकों का जो प्रयोग हो रहा है, उससे मानव सेहत को गंभीर खतरा है. कीटनाशक बनानेवाली कंपनियां ज्यादा से ज्यादा लाभ कमाने के चक्कर में कीटनाशकों में जहर का ओवरडोज मिला रही हैं. जानकारों का कहना है कि फल, सब्जी या अनाज में मौजूद कीटनाशक कई खतरनाक बीमारियों को जन्म दे रहे हैं. यह रसायन लिवर व किडनी जैसे महत्वपूर्ण अंगों के लिए खतरनाक हैं. साथ ही कैंसर जैसी भी बीमारी पैदा करते हैं .कीटनाशकों के नमूनों की हुई जांच से भी यह बात सामने आ चुकी है.

जांच-पड़ताल की नहीं है मुकम्मल व्यवस्था : कृषि विभाग की ओर से अभियान चलाकर कीटनाशकों की जांच की बात कही जाती है. विभाग का कहना है कि बीते वर्ष औरंगाबाद समेत अन्य जिलों से कीटनाशकों के सैंपल लेकर प्रयोगशाला में जांच करायी गयी थी. इनमें से दो दर्जन से अधिक सैंपलों में जरूरत से ज्यादा खतरनाक रसायन पाए गए थे. इसको लेकर संबंधित कंपनियों के विरुद्ध नोटिस भी जारी किये गये थे. विभाग ने जांच में गड़बड़ पाये जाने वाले ऐसे सभी खतरनाक कीटनाशकों की बिक्री पर रोक लगा दी थी. जब कंपनियों में जांच पर सवाल उठाये, तो विभाग ने सभी नमूनों को फरीदाबाद सीआइएल भेजा था .जानकारों के अनुसार, फरीदाबाद की लैब ने पांच कीटनाशकों को ही मानक के अनुरूप पाया. गौरतलब है कि बिहार में कीटनाशकों की जांच के लिए महज एक प्रयोगशाला है. पटना के मीठापुर में स्थित इस प्रयोगशाला की क्षमता भी कम बतायी जाती है. जिले में ऐसे मामलों की जांच पड़ताल की मुकम्मल व्यवस्था नहीं है.
मुनाफे के लिए प्रोडक्ट्स को बना रहे हैं ज्यादा जहरीला ! : कम खर्च में कारगर कीटनाशक की चाहत में किसान अपनी फसल में जहरीले रसायन डाल रहे हैं. मुनाफे के खेल में कंपनियां किसानों को झांसा देकर अपना उल्लू सीधा कर रही हैं. किसी भी कीटनाशक को तैयार करने में उसमें खतरनाक केमिकल मिलाने का अनुपात निर्धारित है. कई रासायनिकों की जांच से भी खुलासा हो चुका है कि इन्हें बनाने में तय मानकों का घोर उल्लंघन होता है. अधिक उपज के लिए किसान इन कीटनाशकों को जितना ज्यादा इस्तेमाल कर रहे हैं, उतने ही अधिक कीट पतंगों की प्रतिरोधक क्षमता भी बढ़ रही है.
रक्त में मिल कर बन रहा जहर : कीटनाशक युक्त फल, सब्जी या अनाज को लगातार ग्रहण करने से आदमी के स्वास्थ्य पर घातक प्रभाव पड़ता है. खाने-पीने की चीजों में मिले हुए कीटनाशक जब मनुष्य के पेट में पहुंचते हैं तो वहां से रक्त में मिल कर शरीर के सभी अंगों तक पहुंच जाते हैं. जेनरल फिजीशियन डॉ सुरेंद्र सिंह बताते हैं कि शरीर में मिलने के बाद कीटनाशक लिवर और किडनी को डैमेज करना शुरू करते हैं. इसकी ज्यादा मात्रा हो जाने पर कैंसर का खतरा उत्पन्न हो जाता है .कीटनाशकों के प्रभाव से गैस, एसिडिटी, अनिंद्रा,डिमेंसिया आदि की शिकायत बढ़ती है. यह मस्तिक पर भी असर डालता है. डॉक्टर कहते हैं कि कीटनाशकों के दुष्परिणाम के कारण नपुंसकता और डायबिटीज के मामले बढ़ते जा रहे हैं.
जिन रसायनों में पाया गया था ज्यादा जहर : क्विनोलफोस, हेक्साकोनाजोल, सायपरमेथरिन, क्लोपायरीफोस, फिपरोनिल, कारबेंडाजिम फोर्ट, इमिडाक्लोपिरड, करबेंडाजिम आदि.
क्या कहते हैं चिकित्सक
कीटनाशक युक्त अनाज फल या सब्जी के लगातार खाते रहने से ब्रेन और नर्व्स पर भी इसका असर पड़ता है. सिर दर्द, उल्टी का अनुभव, अनिंद्रा, आंखों से धुंधला दिखना आदि लक्षण दिख सकते हैं. शरीर में कीटनाशक जाने के बाद यह लिवर और किडनी को नुकसान पहुंचाने लगते हैं.
डॉ सत्यनारायण प्रसाद, प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी
क्या कहते हैं अधिकारी
कीटनाशकों की जांच के लिए समय-समय पर अभियान चलाया जाता है. प्रयोगशाला जांच में मानकों पर खरे नहीं उतरने वाले कीटनाशकों की बिक्री पर विभाग की ओर से रोक लगा दी गयी है. कीटनाशकों के प्रयोग को लेकर किसानों को भी सजग होने की आवश्यकता है.
कृष्णा प्रसाद, बीएओ, मदनपुर
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