आरा के बाढ़ पीड़ितों के बीच आइसा-आरवाइए की टीम ने बांटी राहत सामग्री, 23 से चलेगा राहत कोष संग्रह

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बाढ़ पीड़ितों के बीच राहत सामग्री वितरण करते माले के कार्यकर्ता | Prabhat Khabar Network

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भाकपा-माले ने बाढ़ पीड़ितों को राहत सामग्री बांटी और सरकार पर आपदा प्रबंधन में लापरवाही का आरोप लगाया. देखें माले की प्रमुख मांगें.

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Bhojpur Flood: भाकपा-माले और छात्र-युवा संगठन आइसा-आरवाइए की भोजपुर इकाइयों ने लगातार दूसरे दिन बाढ़ पीड़ितों के बीच राहत सामग्री का वितरण किया. जिले के सर्वाधिक प्रभावित प्रखंडों में शामिल आरा ग्रामीण के रामापुर सनदिया पंचायत में बाढ़ का संकट झेल रहे जरूरतमंद ग्रामीणों के बीच राहत टीम पहुंची और राशन पैकेट वितरित किये. राशन पैकेट में चावल, दाल, आलू, गुड़, बिस्किट और माचिस शामिल थे.

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सरकार पर आपदा राहत में लापरवाही का आरोप

इस मौके पर भाकपा-माले जिला सचिव अभ्युदय ने आरोप लगाया कि बाढ़ आपदा से निपटने में सरकार आपराधिक लापरवाही बरत रही है. उन्होंने कहा कि जनता को सरकार ने बेसहारा छोड़ दिया है. सभी बाढ़ पीड़ितों को मुआवजे और फसल क्षति की राशि नहीं मिल रही है. वहीं, सार्वजनिक रसोई और मेडिकल कैंप भी आम तौर पर काम नहीं कर रहे हैं.

उन्होंने आरोप लगाया कि जान-माल की भारी क्षति के बीच सरकारी तंत्र आपदा राहत राशि की लूट में डूबा हुआ है. अभ्युदय ने कहा कि बिहार की डबल इंजन सरकार ने प्रधानमंत्री के जन्मोत्सव का पर्व मनाने में हजारों करोड़ रुपये खर्च करना जरूरी समझा, जबकि बाढ़ में प्रभावित जनता को उसके हाल पर छोड़ दिया गया.

उन्होंने कहा कि प्रशासन के विभिन्न स्तरों पर आपदा राहत में तेजी लाने की मांग उठाते हुए मुख्यमंत्री तक को मिलकर ज्ञापन सौंपे गये हैं, लेकिन हालात जस के तस हैं.

भोजपुर के करीब 10 प्रखंड बाढ़ व कटाव से प्रभावित

राहत अभियान का नेतृत्व कर रहे माले के पूर्व विधायक शिवप्रकाश रंजन ने कहा कि भोजपुर के कमोबेश 10 प्रखंड बाढ़ और कटाव की आपदा झेल रहे हैं. उनके अनुसार, बाढ़ में 25 से अधिक लोगों की डूबने से मौत हो चुकी है और दर्जनों घर कटाव में समा चुके हैं.

उन्होंने कहा कि बाढ़ के कारण बड़ी संख्या में लोगों के घर, सड़क, विद्यालय, कृषि भूमि और आजीविका प्रभावित हुई है. जान-माल की गंभीर क्षति के बावजूद सरकार के प्रयास दिखावे भर के हैं.

राहत टीम में शामिल रहे संगठन के पदाधिकारी

आरा ग्रामीण के रामापुर सनदिया पंचायत पहुंची राहत टीम का नेतृत्व भाकपा-माले के पूर्व विधायक शिवप्रकाश रंजन, माले प्रखंड सचिव विजय ओझा, आरवाइए जिला सचिव निरंजन केसरी, आइसा जिलाध्यक्ष विकास कुमार, आइसा जिला सचिव जयशंकर प्रसाद और आरवाइए जिलाध्यक्ष विशाल कुमार ने किया.

टीम में रौशन कुशवाहा, अखिलेश गुप्ता, साहिल अरोरा, धनोज यादव, हरेराम सिंह, विवेक कुमार, नीतू कुमारी, मुस्कान, वर्षा, सन्नी देवल, अमित यादव, अजीत पासवान, प्रदीप कुमार, विवेक यादव, सुमित कुमार, सागर पासवान, विद्यानिवास, गोलू कुमार, अनूप कुमार आदि शामिल थे.

23 सितंबर तक चलेगा राहत कोष संग्रह

संगठन के अनुसार, 10 से 23 सितंबर तक चलने वाले बाढ़ राहत कोष संग्रह अभियान में भाकपा-माले की प्रखंड कमिटियों और आइसा-आरवाइए की टीमों के माध्यम से भोजपुर के आम नागरिकों से राहत कोष संग्रह किया गया है.

बाढ़ राहत वितरण अभियान तीन दिनों तक चलेगा. शाहपुर के अलावा सर्वाधिक प्रभावित आरा ग्रामीण और बड़हरा प्रखंडों में भाकपा-माले तथा छात्र-युवा संगठन आइसा-आरवाइए की टीमें राहत सामग्री वितरण के लिए पहुंच रही हैं.

माले ने रखीं राहत और मुआवजे से जुड़ी मांगें

भाकपा-माले ने सरकार से राहत वितरण में पारदर्शिता, मुआवजा और पुनर्वास समेत कई मांगें रखी हैं.

राहत वितरण में अनियमितता : प्लास्टिक किट और अन्य सामग्री के वितरण में भेदभाव व अनियमितता की जांच कर दोषियों पर कार्रवाई की जाए और वितरण व्यवस्था पारदर्शी हो.

मुआवजा : बाढ़ में मृत सभी लोगों के आश्रितों को 20-20 लाख रुपये दिये जाएं. छूटे मृतकों की पहचान के लिए विशेष सर्वे कराया जाए.

छूटे परिवार : मुआवजा सूची से छूटे सभी परिवारों की जांच कर उन्हें सूची में जोड़ा जाए और अनुग्रह राशि दी जाए.

सामुदायिक किचेन : भकुरा, पिरौटा, जगवलिया और बसंतपुर पंचायतों के सभी जरूरतमंद क्षेत्रों में आवश्यकता के अनुसार किचेन चलाये जाएं. बंद किये गये किचेन को अगले एक माह तक चालू रखा जाए.

खाद्यान्न : प्रत्येक प्रभावित परिवार को कम-से-कम तीन माह का खाद्यान्न और आवश्यक सामग्री उपलब्ध करायी जाए.

बिजली बिल : बाढ़ अवधि के घरेलू बिजली बिल माफ किये जाएं.

सड़कें व पुल : भोजपुर की 56 जलमग्न सड़कों, जिनमें पीडब्ल्यूडी की पांच और ग्रामीण कार्य प्रमंडल, आरा की 51 सड़कें शामिल हैं, तथा पुल-पुलियों की तकनीकी जांच कर तत्काल मरम्मत करायी जाए.

स्कूल : स्कूलों की तत्काल सफाई, मलबे की निकासी और क्षतिग्रस्त भवनों की मरम्मत करायी जाए.

फसल क्षति : बटाईदारों सहित सभी किसानों का निष्पक्ष सर्वे कर उचित मुआवजा दिया जाए.

पिपरपांती, बड़हरा : 14 सितंबर की रात घरों के ढहने की जांच कर प्रभावित परिवारों को आर्थिक सहायता और सुरक्षित पुनर्वास दिया जाए. गंगा में विलीन हुए या विलीन होने की कगार पर खड़े सात गरीब परिवारों को पांच डिसमिल जमीन और आवास के लिए 2.5 लाख रुपये दिये जाएं.

इमादपुर, सहार : सोन नदी के कटाव से प्रभावित परिवारों को उपयुक्त भूमि या मुआवजा उपलब्ध कराते हुए पुनर्वास की व्यवस्था की जाए.

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