अररिया में 24 घंटे ड्यूटी के बीच बायोमेट्रिक हाजिरी बनी पेच : डॉक्टरों का फूटा गुस्सा, वेतन रोकने से बढ़ी नाराजगी

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सीएस को ज्ञापन सौंपते चिकित्सकों के शिष्टमंडल | Prabhat Khabar Network

अररिया में बायोमेट्रिक हाजिरी के कारण डॉक्टरों का वेतन रुका, भासा ने दी छूट की मांग। सिविल सर्जन ने जिलाधिकारी को पत्र लिखकर वेतन भुगतान का आग्रह किया।

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अररिया : जिले के सरकारी अस्पतालों में कार्यरत चिकित्सकों और स्वास्थ्य कर्मियों के लिए बायोमेट्रिक मशीन से उपस्थिति दर्ज करने की अनिवार्यता का मामला तूल पकड़ने लगा है. कई प्रखंडों में चिकित्सकों का एक माह से अधिक समय से वेतन लंबित होने से उनमें असंतोष बढ़ रहा है. बिहार स्वास्थ्य सेवा संघ (भासा), अररिया इकाई ने चिकित्सकों को बायोमेट्रिक उपस्थिति की अनिवार्यता से छूट देने की मांग की है.

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चिकित्सकों की कार्यप्रणाली सामान्य कर्मियों से अलग

भासा के प्रतिनिधिमंडल ने असैनिक शल्य चिकित्सक-सह-मुख्य चिकित्सा पदाधिकारी केके काश्यप को ज्ञापन सौंपकर कहा कि चिकित्सकों की कार्यप्रकृति सामान्य कार्यालय कर्मियों से अलग है. चिकित्सकों को 24 घंटे स्वास्थ्य सेवा के तहत ओपीडी के अलावा आकस्मिक ड्यूटी, रात्रि ड्यूटी, बुलावे पर ड्यूटी, पोस्टमार्टम, क्षेत्रीय भ्रमण, स्वास्थ्य शिविर, न्यायालय में गवाही और विशेष ड्यूटी जैसे कार्य करने पड़ते हैं.

कई बार निर्धारित ड्यूटी समाप्त होने के बाद भी चिकित्सकों को घंटों अस्पताल में रहकर मरीजों का इलाज करना पड़ता है. ऐसे में केवल बायोमेट्रिक मशीन में दर्ज उपस्थिति के आधार पर चिकित्सकों की उपस्थिति तय करना व्यवहारिक नहीं है.

वेतन लंबित होने से बढ़ी परेशानी

संघ ने बताया कि जिले के कई प्रखंडों में चिकित्सकों का वेतन एक माह से अधिक समय से लंबित है. इससे चिकित्सकों को आर्थिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है. वेतन लंबित होने से उनमें आक्रोश भी बढ़ रहा है.

सीएस ने डीएम को लिखा पत्र

भासा के आवेदन को गंभीरता से लेते हुए सिविल सर्जन अररिया ने जिलाधिकारी को पत्र लिखा है. पत्र में कहा गया है कि जिले में चिकित्सकों की कमी है और सीमित मानव संसाधन के बीच आकस्मिक एवं आवश्यक स्वास्थ्य सेवाएं संचालित की जा रही हैं. ऐसे में बायोमेट्रिक उपस्थिति के आधार पर वेतन रोकना उचित नहीं है.

रोस्टर और उपस्थिति पंजी से भुगतान की मांग

सिविल सर्जन ने जनहित में मांग की है कि जब तक राज्य सरकार की ओर से इस संबंध में स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी नहीं होता, तब तक चिकित्सकों के वेतन और मानदेय का भुगतान उपस्थिति पंजी, ड्यूटी रोस्टर और संबंधित प्रभारी के प्रमाणपत्र के आधार पर करने की अनुमति दी जाये. इससे चिकित्सकों को लंबित वेतन मिलने का रास्ता साफ हो सकता है.


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