सरोजानंद जी महराज उर्फ नानू बाबा का जन्म उत्सव आज

Updated at : 24 Aug 2019 8:11 AM (IST)
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सरोजानंद जी महराज उर्फ नानू बाबा का जन्म उत्सव आज

अररिया : सरोजानंद जी महाराज उर्फ नानू बाबा को जब सपना आया और उन्हें सपने में भगवान की सेवा करने का आदेश मिला तो पढ़ाई लिखाई को छोड़ कर वे साधक बन गये. वह भी ऐसे साधक बन बैठे जिनकी नजर में सभी धर्मों के लिए एक समान आस्था है. इतना ही नहीं नानू बाबा […]

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अररिया : सरोजानंद जी महाराज उर्फ नानू बाबा को जब सपना आया और उन्हें सपने में भगवान की सेवा करने का आदेश मिला तो पढ़ाई लिखाई को छोड़ कर वे साधक बन गये. वह भी ऐसे साधक बन बैठे जिनकी नजर में सभी धर्मों के लिए एक समान आस्था है. इतना ही नहीं नानू बाबा अपने पैतृक जमीन को बेच कर मंदिर निर्माण में लगा दिये. इसके साथ ही बाबा ने अपना जमीन मंदिर, मसजिद व विधवा महिला को दान में भी दिये.

जबकि विश्व शांति के लिए 31 वर्षां से सावन माह में जिला मुख्यालय के सभी मंदिरों व जामा मसजिद में भी महादंड प्रणाम यात्रा करते आ रहे हैं. जबकि अररिया के बाहर अन्य राज्य व अन्य जिला में महादंड प्रणाम यात्रा कर चुके है. सभी को मिलाकर बाबा ने 41 वां महांदंड प्रणाम यात्रा पूरी कर ली है. नानू बाबा ने भक्तों के सहयोग से एक विशाल काली मंदिर का निर्माण कराया.
वर्ततान समय मां खड्गेश्वरी काली मंदिर धार्मिक पर्यटन से कम नहीं माना जा रहा है. मंदिर में पड़ोसी राष्ट्र नेपाल सहित अन्य राज्यों से भी भक्त पहुंच कर मां खड्गेश्वरी व नानू बाबा से आशीर्वाद लेते हैं. काली मंदिर में प्रत्येक शनिवार को महाभोग लगता है. साथ ही मां खड्गेश्वरी का विशेष श्रृंगार भी होता है. जो भक्तों को आकर्षित करता है.
आपसी सौहार्द की मिशाल हैं नानू बाबा
सावन माह में जिला मुख्याल के सभी मंदिरों में नानू बाबा दंड प्रणाम यात्रा करते हैं. इसी क्रम में प्रसिद्ध जामा मस्जिद में महादंड प्रणाम यात्रा करने पहुंचते हैं. जहां मस्जिद के इमाम से गले मिल कर आपसी सौहार्द का परिचय भी देते हैं. नानू बाबा ने अररिया जिला के रानीगंज प्रखंड अंतर्गत बेगवाही गांव में अपना पैतृक आठ डिसमिल जमिन मस्जिद निर्माण के लिए दान में दिया है. इस कारण नानू बाबा को सभी धर्म के लोग बड़े ही सम्मान के साथ नाम लेते हैं.
भक्तों की सेवा के लिए नानू बाबा ने नहीं किया विवाह : अररिया शहर में एक जमिंदार परिवार में जन्मे नानू बाबा के बारे में बताया जाता है कि इंटर पास करने के बाद उनके परिजनों ने फारबिसगंज कॉलेज में उनका नामांकण कराया. नानू बाबा पढ़ाई के साथ-साथ अच्छे फुटबॉल खिलाड़ी भी थे.
बाबा को जब यह पता चला कि उनकी शादी तय हो चुकी है तो उन्होंने अपने मां निहारीका देवी से पूछा कि बहु के देने के लिए कितना जेवर रखी हो. यह पूछने के बाद मां उन्हें सारा जेवर लाकर दिखाने लगी. जेवर दिखाने के बाद बाबा ने सारा जेवर लेकर घर के बगल में स्थिति काली मंदिर में जाकर काली मां को पहना दिया व बाबा ने अपने मां से कहा कि आज से हमारा जीवन मां काली को समर्पित है.
विश्व शांति के लिए नानू बाबा करते हैं महादंड प्रणाम : विश्व शांति के लिए नानू बाबा दंड प्रणाम यात्रा करते हैं. नानू बाबा जिला मुख्याल में 31 वर्षों से महादंड प्रणाम यात्रा देते आ रहे हैं.
जबकि भारत की राजधानी नई दिल्ली, पटना, कटिहार, पूर्णिया, सुंदरीमंठ, पटेगना, मदनपुर, अररिया आरएस, फारबिसगंज, कुर्साकांटा आदि जगहों पर विश्व शांति के लिए महादंड प्रणाम यात्रा कर चुके हैं. सभी का मिला कर नानू बाबा अब तक 41वां महादंड प्रणाम यात्रा पूरा कर चुके हैं. इस क्रम में उनके द्वारा अब तक लगभग 665 किमी महादंड प्रणाम यात्रा को पूरा किया जा चुका है.
सभी धर्मों के लिए मिशाल बन गये हैं नानू बाबा
31 वर्षों से सावन में करते आ रहे नानू बाबा महादंड प्रणाम यात्रा
मंदिर समेत मसजिद में भी करते हैं महादंड प्रणाम
अपनी पैतृक जमीन को बेच व भक्तों के सहयोग से बनाया 157 फिट ऊंचा मां खड्गेश्वारी काली मंदिर
जमीन बेच व भक्तों के सहयोग से बना दिये 157 फीट ऊंचा काली मंदिर
नानू बाबा को अचानक रात में सपना आया और उन्हें अपना पूरा जिवन मां काली की सेवा में लगाने का आदेश मिला. इसके बाद नानू बाबा ने अपना पढ़ाई लिखाई छोड़ मां काली के सेवा में लग गये. हालांकि नानू बाबा को काली मंदिर की बागडोर 1970 में पूरी तरह से मिली.
नानू बाबा ने अपने पैतृक जमीन लगभग 12 एकड़ बेच कर व भक्तों के सहयोग से एक झोपड़ीनुमा काली मंदिर को 157 फिट ऊंचा काली मंदिर बना दिया. बताया जाता है यह काली मंदिर विश्व के सब से ऊंचा काली मंदिर है. मंदिर का गुम्मद भक्तों काफी आकर्षित करता है.
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