दोनों देशों के एजेंट करा रहे जाली नोटों की तस्करी

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पुलिसिया कार्रवाई का नहीं दिख रहा असर सीमा पर सक्रिय हैं दोनों देशों के एजेंट छौड़ादानो : प्रखंड क्षेत्र के जुआफर पंचायत के जयनगर गांव से जाली नोटों का बरामद हाेना कई सवालों को जन्म दे रहा है. इसमें न केवल सीमा सुरक्षा बलों की लापरवाही है. बल्कि, दोनों देशों के बीच शांति सौहार्द बिगाड़ने […]

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पुलिसिया कार्रवाई का नहीं दिख रहा असर

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सीमा पर सक्रिय हैं दोनों देशों के एजेंट
छौड़ादानो : प्रखंड क्षेत्र के जुआफर पंचायत के जयनगर गांव से जाली नोटों का बरामद हाेना कई सवालों को जन्म दे रहा है. इसमें न केवल सीमा सुरक्षा बलों की लापरवाही है. बल्कि, दोनों देशों के बीच शांति सौहार्द बिगाड़ने की साजिश रची जा रही है. हकीकत तो यह है कि एक सप्ताह बीतने के बाद भी पुलिस जाली नोट छापने की मशीन बरामद नहीं कर सकी है. हां यह सही है कि एक तस्कर की गिरफ्तारी जरूर हुई है.
हालांकि, पुलिस का दावा कह सकते हैं या फिर नाकामी, अब तक जो बातें सामने आयी है. इसमें विफलता के अलावा कोई सार्थक प्रयास नहीं दिख रहा है. जाली नोट की बरामदगी कोई नई बात नहीं है. नोट छापने का कारनामा काफी लंबे समय से चल रहा है. सीमा से सटे गांव पुरुषोत्तमपुर, हीरामनी, सेमरहिया आदि इलाके में यह काम फल-फूल रहा है. इसमें दोनों देशों के तस्कर काम को अंजाम दे रहे हैं. पुलिसिया दबिश पड़ने पर कारोबार में थोड़ी सी मंदी जरूर आती है. लेकिन कार्रवाई असर ज्यादा दिनों तक नहीं चल पाता है.
इधर, लोकसभा चुनाव को लेकर भी जाली नोट की तस्करी सक्रिय हो गये हैं. आशंका व्यक्त की जा रही है कि वोटों के सौदागरों द्वारा जाली नोट का उपयोग जनता का वोट ठगने के लिये भी किया जा सकता है. नेपाल की खुली सीमा के पार लाभ उठाकर जाली नोट के कारोबारी सीमाई क्षेत्र में सक्रिय एजेंटों के माध्यम से जाली नोट की तस्करी को अंजाम दे रहे हैं. अब देखने वाली बात यह है कि पुलिस तस्करों को कब पकड़कर सलाखों के पीछे डालेगी?
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