मणिपुर में फिर बिहारी छात्रों पर हमला,दौड़ा-दौड़ा कर पीटा

Updated at : 30 Jun 2014 4:25 AM (IST)
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मणिपुर में फिर बिहारी छात्रों पर हमला,दौड़ा-दौड़ा कर पीटा

पटना : एनआइटी, मणिपुर में बिहार व अन्य हिंदीभाषी राज्यों के छात्रों की पिटाई की घटनाएं थमने का नाम नहीं ले रही हैं. शनिवार और रविवार को एक बार फिर वहां के स्थानीय छात्रों ने मिल कर बिहार के छात्रों की पिटाई की. इसमें पटना, सीवान, गोपालगंज के छात्र घायल हुए हैं. दो की हालत […]

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पटना : एनआइटी, मणिपुर में बिहार व अन्य हिंदीभाषी राज्यों के छात्रों की पिटाई की घटनाएं थमने का नाम नहीं ले रही हैं. शनिवार और रविवार को एक बार फिर वहां के स्थानीय छात्रों ने मिल कर बिहार के छात्रों की पिटाई की. इसमें पटना, सीवान, गोपालगंज के छात्र घायल हुए हैं. दो की हालत गंभीर है. यह जानकारी एनआइटी के छात्रों ने प्रभात खबर को फोन पर दी. छात्रों ने बिहार के गृह सचिव से फोन पर बात कर सुरक्षा की गुहार लगायी है. छात्रों ने घायलों के नाम नहीं छापने की बात कही है. उनका कहना था कि नाम छपने पर कॉलेज प्रशासन ज्यादा दिक्कत करता है.

टीवी के वायर खराब होने पर विवाद : जानकारी के मुताबिक, हॉस्टल में टीवी का वायर खराब होने पर विवाद शुरू हुआ. स्थानीय छात्रों ने बिहारी छात्रों पर वायर खराब करने आरोप लगाया और शनिवार को उन पर हमला कर दिया. जबकि टीवी का वायर कैसे खराब हुआ, यह कोई नहीं जनता है. छात्रों ने जानकारी दी कि शुद्ध खाना व हॉस्टल की साफ-सफाई की मांग करने पर बिहार व अन्य राज्यों के छात्र पहले से ही कॉलेज प्रशासन व स्थानीय छात्र के निशाने पर थे.

पिछली बार भोजन को लेकर हुई थी मारपीट : अगस्त, 2013 में भी बिहारी छात्रों के साथ स्थानीय छात्र ने मारपीट की थी. 25 अगस्त, 2013 की रात करीब साढ़े आठ बजे बिहार के कुछ छात्र मेस में खाना खा रहे थे. इसी दौरान उनकी मणिपुर के एक छात्र से खाने को लेकर बहस हो गयी. इसके बाद एनआइटी के डीन केएच मंगलेयम का बेटा सनाद 20 छात्रों के साथ वहां पहुंचा और आशुतोष (मनेर) व असद (बिहार) के साथ मारपीट की.

क्या करें, कुछ समझ में नहीं आ रहा : छात्रों ने बताया कि इस घटना के बाद माहौल काफी खराब है. कोई इस ओर ध्यान नहीं दे रहा, जबकि बराबर बिहार, यूपी, झारखंड, दिल्ली और अन्य हिंदी भाषी राज्यों के छात्रों के साथ मारपीट होता रहता है, लेकिन कॉलेज प्रशासन इस पर कोई कार्रवाई नहीं करता है. 27 अगस्त, 2013 को केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्रालय व बिहार के गृह सचिव को इ-मेल किया गया था, लेकिन कहीं से कोई मदद नहीं मिली. जब 13 सितंबर, 2013 को प्रभात खबर में खबर छपी तब बिहार के तत्कालीन डीजीपी अभयानंद ने मणिपुर के डीजीपी एमके दास से बात कर पुलिस चौकी की व्यवस्था कॉलेज कैंपस के पास की थी. कॉलेज प्रशासन हमेशा विवाद के लिए हमें ही जिम्मेवार मान रहा है. क्या करें, कुछ समझ में नहीं आ रहा.

कब-क्या हुआ

28 जून 2014 : टीवी के केबल खराब होने के कराण स्थानीय छात्र ने बिहारी छात्र को पीटा, दो घायल

29 जून 2014 : सुबह में ही छात्रों पर हमला, शिकायत नहीं सुन रहा कॉलेज प्रशासन

25 अगस्त 2013 : दो बिहारी छात्रों से मारपीट. इसमें मणिपुर के 20 छात्रों के साथ एनआइटी डीन का बेटा भी शामिल था. डायरेक्ट के पास शिकायत करने गये छात्रों पर गॉर्ड ने ताना था बंदूक.

27 अगस्त 2013 : एमएचआरडी व बिहार के गृह सचिव को इ-मेल भेजा गया था. उस समय के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के पीए से छात्रों ने की थी बात. नहीं निकला कोई हल.

12 सितंबर 2013 : दो बार छात्रों के साथ मारपीट. शाम को जूनियर छात्रों (नये बैच) का हॉस्टल कराया गया खाली. छात्रों ने बिहार के गृह सचिव व डीजीपी को इ-मेल भेज कर सुरक्षा की गुहार लगायी.

15 सितंबर 2013 : कॉलेज कैंपस के पास पुलिस चौकी की व्यवस्था

सिकंदराबाद जंकशन पर बिहारी परीक्षार्थियों को दौड़ा-दौड़ा कर पीटा

पटना3आंध्र प्रदेश के सिकंदराबाद जंकशन पर रविवार को आंध्र और रेलवे पुलिस ने बिहार के परीक्षार्थियों को दौड़ा-दौड़ा कर पीटा. घटना में कई परीक्षार्थियों को काफी चोटें आयीं. इनमें कई की हालत गंभीर है. इसके विरोध में परीक्षार्थियों ने भी पुलिस पर हमला किया. घटना के बाद वहां परीक्षार्थी के बीच भगदड़ मच गयी. घटना 3:15 बजे शुरू हुई, जब परीक्षार्थी आरआरबी के लोको पायलट व टेक्नीशियन पद की परीक्षा देकर सिकंदराबाद जंकशन पहुंचे. सौरभ कुमार (राजपुर, पटना), राकेश कुमार (शेखपुरा, पटना) ने प्रभात खबर को फोन कर बताया कि जैसे ही छात्रों का जत्था सिकंदराबाद जंकशन पहुंचा, वैसे ही पुलिस ने स्टेशन में प्रवेश करने से रोक दिया. वहां पर बड़ी संख्या में पुलिस फोर्स की व्यवस्था पहले से ही रेलवे ने कर रखी थी. इसके बाद छात्र विरोध करने लगे. विरोध के बाद छात्र जंकशन में प्रवेश कर गये.

छात्र हावड़ा जानेवाली फलकनुमा एक्सप्रेस (12704) पर सवार होने के लिए जैसे ही आगे बढ़े, वहां सभी कोचों में पहले से मौजूद करीब 10-10 पुलिसकर्मियों ने उन्हें ट्रेन में घुसने से रोक दिया. जेनरल कोच में काफी भीड़ रहने के कारण पुलिस से अनुरोध किया, लेकिन उसने एक भी नहीं सुनी. अंत में पुलिस के इस रवैये के विरोध में सभी परीक्षार्थी ट्रैक पर लेट गये. स्थिति अनियंत्रित देख कर पुलिस परीक्षार्थियों को खदेड़ना लगी, साथ ही डंडे बरसाने लगी. इस परीक्षार्थियों ने भी पुलिस पर हमला कर दिया. करीब दो घंटे तक सिकंदराबाद जंकशन रणक्षेत्र बना रहा. फलकनुमा एक्सप्रेस खुलने के बाद सिकंदराबाद जंकशन की स्थिति कुछ ठीक हुई, लेकिन बिहार के हजारों परीक्षार्थी वहां फंसे हुए हैं.

करीब 50 बार खोले गये वैक्यूम

फलकनुमा एक्सप्रेस जैसे ही चार बजे सिकंदराबाद से खुली, उसका वैक्यूम खोल दिया गया. इस दौरान करीब 50 बार उसक वैक्यूम खोला गया. ट्रेन भी अपने समय से करीब डेढ़ घंटे लेट से खुली. इस दौरान कई परीक्षार्थी इस ट्रेन के इंजन तो कई चलती ट्रेन में आपातकालीन खिड़की से कोच में प्रवेश किया. प्लेटफॉर्म से ट्रेन निकलने के बाद परीक्षार्थी अपनी जान पर खेल कर इस ट्रेन के अंदर घुसे. सिकंदराबाद में फंसे बिहार के परीक्षार्थियों ने बताया कि यहां से घर लौटने में काफी परेशानी हो रही है.

क्यों आते हो यहां एग्जाम देने के लिए

पटना के पिंटू ने फोन पर बताया कि घटना के समय जीआरपीएफ, आंध्र पुलिस, आरपीएफ के अलावा अनेक पुलिस फोर्स को सिकंदराबाद जंकशन पर बुला लिया गया था, वह भी वज्र व आंसू गैसवाले वाहनों के साथ. पुलिसकर्मी पीट रहे थे और बार-बार कह रहे थे, क्यों आते हो यहां एग्जाम देने के लिए. यहां एग्जाम देने कभी मत आना. अपशब्दों का भी वे प्रयोग कर रहे थे. जो परीक्षार्थी वहां फंस गये हैं, उन्हें किसी भी ट्रेन पर चढ़ने नहीं दिया जा रहा है. पुलिसकर्मी मारने के लिए दौड़ पड़ते हैं.

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