5,000 से अधिक कृषि विशेषज्ञों की नियुक्ति जल्द

Updated at : 26 Jun 2014 8:24 AM (IST)
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5,000 से अधिक कृषि विशेषज्ञों की नियुक्ति जल्द

पटना: कृषि विभाग के प्रधान सचिव अमृत लाल मीणा ने बुधवार को कहा कि जल्द ही राज्य में पांच हजार से अधिक कृषि विशेषज्ञों की नियुक्ति होगी. सूचना एवं जन संपर्क विभाग के संवाद कक्ष में पत्रकारों से बातचीत में उन्होंने कहा कि राज्य में कार्यरत 4200 कृषि समन्वयक के पद स्थायी होंगे. इनकी नियुक्ति […]

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पटना: कृषि विभाग के प्रधान सचिव अमृत लाल मीणा ने बुधवार को कहा कि जल्द ही राज्य में पांच हजार से अधिक कृषि विशेषज्ञों की नियुक्ति होगी. सूचना एवं जन संपर्क विभाग के संवाद कक्ष में पत्रकारों से बातचीत में उन्होंने कहा कि राज्य में कार्यरत 4200 कृषि समन्वयक के पद स्थायी होंगे.

इनकी नियुक्ति कर्मचारी चयन आयोग द्वारा होगी. इनका वेतन लगभग 20 हजार रुपये होगा. इसके अलावा पांच हजार कृषि सलाहकारों की एनआइसी द्वारा ऑनलाइन नियुक्ति की जायेगी. इन्हें 15 हजार रुपये वेतन मिलेगा. उन्होंने कहा कि राज्य में कृषि समन्वयक नहीं मिल रहे हैं, खासकर एग्रोनोमी, हॉर्टिकल्चर, भूमि संरक्षण विषय में शिक्षाप्राप्त लोगों की काफी कमी है. इसके लिए उन्होंने राज्य के दोनों कृषि कॉलेजों के प्रबंधन से कृषि की सभी सीटों पर नामांकन के लिए बात की है. फिलहाल कृषि कॉलेजों में 80 प्रतिशत सीटों पर नामांकन हो चुकी है.

मीणा ने बताया कि अनुसूचित जाति के कोटे के कृषि विशेषज्ञों के छह सौ पद अब भी खाली हैं. इनकी नियुक्ति के लिए नियम में परिवर्तन किये जायेंगे. पत्रकारों के प्रश्नों के जवाब में मीणा ने कहा कि राजेंद्र कृषि विश्वविद्यालय को केंद्रीय विवि बनाने के लिए सरकार की ओर से सभी प्रकार की प्रक्रिया को पूरी कर ली गयी है. एमओयू के एक घोषणा पर मतभिन्नता की बात स्वीकारते हुए कहा कि केंद्रीय विवि बनने के बाद कर्मचारियों के प्रोन्नति और पेंशन के लिए वे राज्य सरकार को एक लीगल सेल बनाने की बात कह रहे हैं, जबकि राज्य सरकार का कहना है कि केंद्रीय विवि बनने के बाद पूरी जिम्मेवारी उनकी होनी चाहिए. मीणा ने कहा कि इसे जल्द ही सुलझा लिया जायेगा.

उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार से मिलनेवाली राशि की प्रत्याशा में विभाग ने 257 करोड़ रुपये अधिक खर्च किये हैं. इस राशि की मांग केंद्र से की जा रही है. उन्होंने बताया कि केंद्र से विभाग को 863 करोड़ रुपये मिलने थे, पर मिले मात्र 423 करोड़ रुपये. विभाग ने 680 करोड़ रुपये खर्च किये. किसानों को कृषि औजारों के लिए बैंक बनाने और मॉनसून कमजोर होने की स्थिति में तैयार कंटिजेंसी प्लान के तहत काम करने की बात कही. उन्होंने कहा कि राज्य में कृषि कार्यक्रम के तहत हुए खर्च की निष्पक्ष जांच के लिए चंद्रगुप्त प्रबंधन संस्थान, आद्री और एएन सिन्हा सामाजिक अध्ययन संस्थान द्वारा रिपोर्ट मिल चुकी है. इसका अध्ययन किया जा रहा है. पत्रकार सम्मेलन में सचिव, बागवानी अजय यादव ने भी संबोधित किया. कृषि समन्वयकों के हड़ताल के बारे में कहा कि उनसे बात की जा रही है. सामान्य प्रशासन विभाग से विमर्श के बाद उनकी बहाली की होगी.

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