नहीं रहे डॉ पी गुप्ता

Updated at : 20 Jun 2014 5:30 AM (IST)
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नहीं रहे डॉ पी गुप्ता

पटना : प्रसिद्ध चिकित्सक, इतिहासकार, सामाजिक कार्यकर्ता और वाम आंदोलन के नेता डॉ पीयूषेंदु गुप्ता का गुरुवार को निधन हो गया. उन्होंने पटना के बैंक रोड स्थित अपने आवास पर सुबह 8.32 बजे अंतिम सांसें लीं. वह लंबे समय से बीमार थे. उनके परिवार में दो पुत्र, दो पुत्र वधू, एक पोता और एक पोती […]

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पटना : प्रसिद्ध चिकित्सक, इतिहासकार, सामाजिक कार्यकर्ता और वाम आंदोलन के नेता डॉ पीयूषेंदु गुप्ता का गुरुवार को निधन हो गया. उन्होंने पटना के बैंक रोड स्थित अपने आवास पर सुबह 8.32 बजे अंतिम सांसें लीं. वह लंबे समय से बीमार थे. उनके परिवार में दो पुत्र, दो पुत्र वधू, एक पोता और एक पोती है.

उनके ज्येष्ठ पुत्र डॉ शैबाल गुप्ता आद्री के सदस्य-सचिव हैं. देर शाम बांस घाट स्थित विद्युत शवदाह गृह में उनका अंतिम संस्कार कर दिया गया. घाट पर भी बड़ी संख्या में सामाजिक कार्यकर्ता, बुद्बिजीवी मौजूद थे. तीन माह पूर्व 30 मार्च को बैंक रोड स्थित आवास पर अपना 86 वां जन्मदिन मनाने वाले डॉ गुप्ता का जन्म 1928 में हुआ था. उन्होंने अपने जीवन का अधिकांश समय बेगूसराय में बिताया. वहां उन्होंने एक डॉक्टर के रूप में समाज की सेवा के साथ अकादमिक और सांस्कृतिक गतिविधियों से सामाजिक जीवन को समृद्ध बनाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया. बेगूसराय में दो दशक से अधिक समय तक सेवा देने के बाद वह 1984 में पटना लौट आये.

यहां भी उन्होंने मनोयोग से प्रोफेशनल, अकादमिक और सामाजिक गतिविधियों को जारी रखा. इस दौरान उनका महत्वपूर्ण ध्यान ड्रामा, संगीत और चित्रकला के क्षेत्र में बिहार की समृद्ध लोक कला परंपराओं को पुनर्जीवित और संरक्षित करने पर था. उन्होंने आद्री, पटना स्थित धरोहर के नाम से एक लोक कला म्यूजियम की योजना भी शुरू की थी. जीवन का अधिकांश समय सामाजिक और राजनीतिक गतिविधियों में बिताने के बावजूद उनका एक सक्रिय अकादमिक जीवन भी था.

इतिहास और पुरातत्व के क्षेत्र में उन्होंने इक्कीस लेख विभिन्न अकादमिक पत्रिकाओं में लिखे. हाल ही में उनके सम्मान में एक हार्दिक बधाई अंक नाम के पुस्तक का संपादन किया गया. इसमें उनके सारे लेख और उनके सहकर्मियों द्वारा प्रशस्ति संलेखों को संकलित किया गया है. एक कार्यक्रम में प्रोफेसर अमर्त्य सेन ने इस पुस्तक का लोकार्पण फरवरी, 2014 में किया. एशियाटिक सोसायटी पटना ने इस अवसर पर उन्हें ‘इतिहास रत्न’ से सम्मानित भी किया था.

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