अन्नु व रेणु की सुनवाई पूरी, फैसले का इंतजार

पटना: अन्नु शुक्ला और रेणु कुशवाहा की विधानसभा की सदस्यता समाप्त करने की जदयू की सिफारिश पर विधानसभा अध्यक्ष के कार्यालय में बुधवार को दूसरे दिन सुनवाई पूरी हो गयी. इसके बाद अन्नु शुक्ला ने कहा कि मैं पूरी तरह से पार्टी के साथ हैं. नीतीश कुमार के साथ मैं हमेशा बनी रहूंगी. सुनवाई के […]
पटना: अन्नु शुक्ला और रेणु कुशवाहा की विधानसभा की सदस्यता समाप्त करने की जदयू की सिफारिश पर विधानसभा अध्यक्ष के कार्यालय में बुधवार को दूसरे दिन सुनवाई पूरी हो गयी. इसके बाद अन्नु शुक्ला ने कहा कि मैं पूरी तरह से पार्टी के साथ हैं.
नीतीश कुमार के साथ मैं हमेशा बनी रहूंगी. सुनवाई के लिए अन्नु शुक्ला का समय तीन बजे निर्धारित था. 3:15 बजे वह विधानसभा अध्यक्ष के कार्यालय पहुंचीं और सवा घंटे तक चली सुनवाई के बाद पत्रकारों से उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री से भी मेरी बात हुई है. उन्होंने कहा कि मेरे साहब (मुन्ना शुक्ला) का भी जदयू परिवार बनाने में योगदान रहा है. मैं चाहूंगी कि यह घर बरकरार रहे. जदयू अपना घर है. कभी बच्चे गलती करते हैं, तो थोड़े ही उसे घर से अलग कर दिया जाता है. कभी गाजिर्यन भी गलती करते हैं, तो परिवार से थोड़े ही अलग हो जाते हैं.
अन्नु ने कहा कि मुख्य सचेतक श्रवण कुमार भी सभी बातों से अवगत हुए हैं. अब राज्यसभा उपचुनाव के बाद सुनवाई पर निर्णय होगा. पूर्व मंत्री रेणु कुशवाहा ने कहा कि सुनवाई के दौरान मैंने विस अध्यक्ष को अपनी बातें कहीं हैं.
पत्रकारों के प्रश्नों के जवाब में कहा कि मैं पार्टी के साथ हूं. सुनवाई पूरी होने के बाद कब निर्णय होगा, इस सवाल के जवाब में कहा कि विस अध्यक्ष सुनवाई के बाद कब इस मामले को कनक्लूड (पूरा) करेंगे, मुङो पता नहीं. सुनवाई शुरू होने के पूर्व विधानसभा परिसर में गहमागहमी का माहौल बना रहा है.
हाइकोर्ट में रेणु कुशवाहा की याचिका खारिज
पटना. जदयू की निलंबित विधायक रेणु कुशवाहा की याचिका को पटना हाइकोर्ट ने खारिज कर दी है. हाइकोर्ट ने कहा कि यह मामला अभी प्री-मेच्योर है, इसलिए कोर्ट इसमें हस्तक्षेप नहीं करेगा. वह विधानसभा स्पीकर के नोटिस के खिलाफ हाइकोर्ट गयी थीं. स्पीकर ने उनकी विधानसभा की सदस्यता समाप्त करने की जदयू की सिफारिश पर नोटिस जारी कर जवाब मांगा था. इस मामले पर मंगलवार को न्यायमूर्ति ज्योति शरण ने सुनवाई की थी और फैसला सुरक्षित रख लिया था. बुधवार को न्यायमूर्ति ज्योति शरण ने फैसला सुनाते हुए कहा कि सिर्फ नोटिस मिलने से किसी विधायक के अधिकार का हनन नहीं होता. इस मामले पर अभी कार्रवाई नहीं हुई है और न ही ऑर्डर हुआ है.
याचिकाकर्ता कुछ जल्दबाजी में कोर्ट की शरण में आ गयीं. इस मामले पर हाइकोर्ट तभी कुछ विचार कर सकता है, जब उन पर कोई कार्रवाई हो. उधर, रेणु कुशवाहा के अधिवक्ता शशिभूषण कुमार मंगलम ने सफाई दी कि विधायक ने पार्टी विरोधी कोई काम नहीं किया है. न ही पार्टी के पास इसके कोई ठोस सबूत हैं. इस ग्राउंड पर उनकी सदस्यता रद्द करने का नोटिस देना सही नहीं है.
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