डेब्यू पर गोल्डन डक, दूसरे टेस्ट में 80 और 92; पसिंदु सूरियाबंदारा ने बताया क्यों हैं खास
पसिंदु सूरियाबंदारा फोटो—एक्स
किसी भी क्रिकेटर के लिए टेस्ट डेब्यू खास होता है, पर पसिंदु सूरियाबंदारा का डेब्यू बेहद निराशाजनक रहा. पहली ही गेंद पर आउट होने के बाद, उन्होंने अगले टेस्ट में शानदार वापसी कर सबको चौंका दिया. जानें उनकी वापसी की दिलचस्प कहानी.
Pasindu Sooriyabandara: टेस्ट डेब्यू किसी भी क्रिकेटर के लिए जिंदगी का सबसे खास पल होता है, लेकिन पसिंदु सूरियाबंदारा के लिए यह शुरुआत बेहद मुश्किल रही. भारत के खिलाफ गॉल टेस्ट में उन्हें अचानक कन्कशन सब्स्टीट्यूट के तौर पर खेलने का मौका मिला और बल्लेबाजी करने उतरे तो पहली ही गेंद पर आउट हो गए. ऐसा डेब्यू किसी भी खिलाड़ी के लिए बड़ा झटका हो सकता है, लेकिन उन्होंने अगले ही टेस्ट में 80 और 92 की पारी से ऐसा जवाब दिया, जिसने उनकी कहानी ही बदल दी. उन्होंने अपनी बल्लेबाजी से बता दिया कि क्यों वह श्रीलंका के बैटिंग लाइनअप में ऊपरी क्रम में बल्लेबाजी करने के लिए खास हैं.
अचानक मिला टेस्ट डेब्यू, पहली ही गेंद पर खत्म हुई पारी
पसिंदु सूरियाबंदारा का टेस्ट डेब्यू किसी तय योजना के मुताबिक नहीं हुआ था. भारत के खिलाफ गॉल टेस्ट में वह शुरुआत में श्रीलंका की प्लेइंग-11 का हिस्सा नहीं थे. मुकाबले के दौरान दिनेश चांदीमल को फील्डिंग करते समय चोट लगी और वह आगे मैच में हिस्सा लेने की स्थिति में नहीं रहे. इसके बाद मैच रेफरी की अनुमति से पसिंदु को कन्कशन सब्स्टीट्यूट के तौर पर टीम में शामिल किया गया. मैदान पर उतरते ही उनके सामने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में खुद को साबित करने का मौका था. लेकिन बल्लेबाजी करने आए तो पहली ही गेंद पर मानव सुथार ने उन्हें आउट कर दिया.
दूसरे टेस्ट में मिला मौका, तो बल्ले ने दिया जवाब

गॉल की निराशा के बाद दूसरे टेस्ट में पसिंदु के पास खुद को साबित करने का मौका था. इस बार उन्हें अचानक टीम में शामिल नहीं किया गया था, बल्कि उनके पास शुरुआत से ही अपनी बल्लेबाजी दिखाने का अवसर था. उन्होंने पहली पारी में 133 गेंदों का सामना किया और 9 चौकों की मदद से 80 रन बनाए. यह उनके टेस्ट करियर का पहला अर्धशतक था. भारतीय गेंदबाज लगातार दबाव बनाने की कोशिश कर रहे थे, लेकिन पसिंदु ने जल्दबाजी नहीं दिखाई. उन्होंने परिस्थिति को समझकर बल्लेबाजी की और अपनी टीम के लिए महत्वपूर्ण रन जोड़े.
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फॉलोऑन के दबाव में 92 रन की जुझारू पारी
श्रीलंका की टीम पहली पारी के बाद मुश्किल स्थिति में थी और उसे फॉलोऑन खेलना पड़ा. दूसरी पारी में शुरुआती विकेट गिरने के बाद भारत के पास मैच जीतने का मौका दिखाई देने लगा. ऐसे समय में पसिंदु एक बार फिर क्रीज पर डटे रहे. उन्होंने 173 गेंदों का सामना किया और 10 चौकों तथा एक छक्के की मदद से 92 रन बनाए. वह अपने शतक से सिर्फ 8 रन दूर रह गए, लेकिन उनकी इस पारी की अहमियत स्कोरकार्ड पर दर्ज 92 रन से कहीं ज्यादा थी. एक छोर पर टिककर उन्होंने भारतीय गेंदबाजों के सामने लंबी लड़ाई लड़ी. श्रीलंका को मैच में बने रहने के लिए समय और साझेदारियों की जरूरत थी, और पसिंदु ने दोनों पारियों में अपनी जिम्मेदारी को बखूबी निभाया.
69 फर्स्ट क्लास मैच और 14 शतक
पसिंदु सूरियाबंदारा रातोंरात श्रीलंका की टेस्ट टीम तक नहीं पहुंचे हैं. उनके पीछे घरेलू क्रिकेट में लंबे समय तक की गई मेहनत है. 19 अक्टूबर 1999 को कोलंबो में जन्मे इस बल्लेबाज ने श्रीलंका की अंडर-19 टीम और श्रीलंका-ए के लिए भी क्रिकेट खेला है. फर्स्ट क्लास क्रिकेट में लगातार रन बनाकर उन्होंने अपनी क्षमता साबित की. 69 फर्स्ट क्लास मैचों में पसिंदु ने 4,893 रन बनाए हैं. उनका बल्लेबाजी औसत 53.76 का है. इस दौरान उनके बल्ले से 14 शतक और 23 अर्धशतक निकले हैं, जबकि उनका सर्वोच्च स्कोर 242 रन है.
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